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एसटीएफ का फै क्ट्री में छापा, आठ टैंक सीज
अमर उजाला ब्यूरो /फतेहपुर
Updated Fri, 24 Mar 2017 12:37 AM IST
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रामपुर स्थित इसी फैक्ट्री में पड़ा छापा
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ-कानपुर एसटीएफ की संयुक्त टीमों ने जिले में हाईवे स्थित एक केेमिकल फैक्ट्री में बुधवार रात छापेमारी की। केमिकल से भरे आठ टैंक सीज कर दिए। जिला पूर्ति अफसर की टीम ने सैंपलिंग भी की। चोरी का केरोसिन ऑयल होने व केमिकल से कुछ और निर्माण करने का आरोप लगा है। हालांकि एसटीएफ ने फैक्ट्री मालिक को उन्नाव में एक केमिकल टैंकर के साथ पकड़ा है, जिसका लखनऊ में खुलासा करने की योजना है। औंग थाना क्षेत्र के रामपुर मोड़ स्थित फैक्ट्री में बुधवार रात एसटीएफ की छापेमारी हुई। इसकी सूचना पर जिला पूर्ति अधिकारी विजय प्रताप भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि श्री बाला जी केमिकल फैक्ट्री के अंदर आठ टैंकों में तरल पदार्थ भरा हुआ था।
उसके कागजात फैक्ट्री प्रशासन नहीं दिखा सका। तरल पदार्थ को केमिकल बताने के अलावा कोई सही जानकारी भी नहीं दी जा सकी। प्रथमदृष्टया केरोसिन डंप होने की आशंका है। सभी टैंकों का सैंपल लिया गया है। करीब दो लाख लीटर टैंकों में केमिकल मिला है। नमूनों को जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। उधर, एसटीएफ को खबर मिली थी कि केमिकल फैक्ट्री में चोरी के केरोसिन ऑयल से नकली डीजल, पेट्रोल बनाया जाता है। फैक्ट्री मालिक कानपुर बर्रा के निवासी हैं।
फिल्टर मशीनों से केरोसिन का रंग बदलकर कई तरह के केमिकल तैयार करते हैं। आरोपी करीब दस साल से कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। एसटीएफ सूत्रों की मानें तो इसके पीछे बड़े ऑयल माफियाओं का नेटवर्क जुड़ा हो सकता है। यह कई स्थानों पर अपने अड्डे बनाए हैं और सभी जगहों पर ऑयल को उतारा जाता है। दोनों फैक्ट्री मालिकों को उन्नाव में केमिकल लिखे टैंकर क्रूड ऑयल (कच्चा केरोसिन) के साथ पकड़े जाने की बात करते हुए एसटीएफ इनसे पूछताछ कर रही है।
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उसके कागजात फैक्ट्री प्रशासन नहीं दिखा सका। तरल पदार्थ को केमिकल बताने के अलावा कोई सही जानकारी भी नहीं दी जा सकी। प्रथमदृष्टया केरोसिन डंप होने की आशंका है। सभी टैंकों का सैंपल लिया गया है। करीब दो लाख लीटर टैंकों में केमिकल मिला है। नमूनों को जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। उधर, एसटीएफ को खबर मिली थी कि केमिकल फैक्ट्री में चोरी के केरोसिन ऑयल से नकली डीजल, पेट्रोल बनाया जाता है। फैक्ट्री मालिक कानपुर बर्रा के निवासी हैं।
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फिल्टर मशीनों से केरोसिन का रंग बदलकर कई तरह के केमिकल तैयार करते हैं। आरोपी करीब दस साल से कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। एसटीएफ सूत्रों की मानें तो इसके पीछे बड़े ऑयल माफियाओं का नेटवर्क जुड़ा हो सकता है। यह कई स्थानों पर अपने अड्डे बनाए हैं और सभी जगहों पर ऑयल को उतारा जाता है। दोनों फैक्ट्री मालिकों को उन्नाव में केमिकल लिखे टैंकर क्रूड ऑयल (कच्चा केरोसिन) के साथ पकड़े जाने की बात करते हुए एसटीएफ इनसे पूछताछ कर रही है।
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