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एसटीएफ ने गांजे की खेप पकड़ी, प्लेन से उड़ गया तस्कर
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खागा (फतेहपुर)। उड़ीसा से आगरा जा रहा पांच क्विंटल गांजा एसटीएफ लखनऊ और एनसीबी ने संयुक्त कार्रवाई में बुधवार की रात कानपुर-प्रयागराज हाईवे के कटोघन टोल प्लाजा पर पकड़ा। गांजा एक ट्रेलर में स्टील की चद्दरों के बीच में छिपाया गया था। ड्राइवर और क्लीनर को गिरफ्तार कर लिया गया। टीम की पूछताछ में गांजा तस्कर आगरा का निकला। तीन लाख के भाड़े में यह लोग सप्लाई लेकर जा रहे थे।
एसटीएफ लखनऊ को नेशनल हाईवे से अंतर्राज्यीय गांजा की तस्करी होने की खबर मिली थी। एसटीएफ सीओ पीके मिश्र के निर्देशन में टीम ने छानबीन शुरू की। एसटीएफ टीम के प्रभारी निरीक्षक अंजनी कुमार त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र राय, प्रशांत कुमार और एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) के अधीक्षक मोहम्मद नवाब की संयुक्त टीम बुधवार रात खागा के कटोघन टोल प्लाजा पर पहुंची। टीम ने ट्रेलर के पीछे लदा कंटेनर खुलवाया। इसमें स्टील की चादरें लदी हुई थी। टीम को एक बार सूचना गलत लगी। दोबारा छानबीन चालू की। चादरें पलटाई गई। अंदर की ओर गांजा भरे कई बोरे रखे मिले। पुलिस ने ड्राइवर वेद सिंह पुत्र विपत्ति राम और क्लीनर कुमार पाल पुत्र हरिश्चंद्र (निवासी नगर परमोल पोस्ट अकोला थाना कागारोल जिला आगरा) को गिरफ्तार किया। टीम की पूछताछ में चालक व खलासी ने बताया कि उड़ीसा में गजेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति ने गांजा के बोरे लोड कराए थे। गांजा आगरा
पहुंचाना था। इसके बदले में गजेंद्र सिंह से तीन लाख रुपये मिलने थे। एसटीएफ ने उनके पास से दो मोबाइल, 1200 रुपये, एक आधार कार्ड, दो ग्रीन कार्ड बरामद किए। पुलिस की जांच में पांच सौ एक किलोग्राम गांजा 17 बंडलों से बरामद हुआ। निरीक्षक ज्ञानेंद्र राय ने बताया कि करीब 52 लाख रुपये कीमत का गांजा है। आगरा के
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तस्कर का नेटवर्क कई जिलों में फैला है। तस्कर प्लेन से आता-जाता है। गुणवत्तापरक माल की लोडिंग कराने खुद प्लेन से जाता है। भाड़ा लेकर रूट पर जाने वाले ट्रक चालकों से संपर्क करता है। उन्हीं ट्रकों में माल लोड कराता है। तस्कर की जांच शुरू की गई है। एनसीबी ने इस कार्रवाई की रिपोर्ट दर्ज की है। खागा कोतवाल वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि कोतवाली में टीम ने लिखापढ़ी नहीं कराई है।
फोटो संख्या एवं परिचय
18- टीम के हत्थे चढ़े ट्रेलर और चालक खलासी
19- ट्रेलर से बरामद गांजा
एसटीएफ ने गांजा की खेप पकड़ी
लखनऊ एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने की कार्रवाई
कानपुर-प्रयागराज हाईवे के कटोघन टोल प्लाजा पर पकड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
साइड स्टोरी--
जिले में प्रतिदिन सवा क्विंटल गांजे की खपत
- मादक पदार्थ के कारोबार में दो माफिया सक्रिय
- जेल जाने के बाद नहीं सुधर सके माफिया
- पुलोिस अधिकारियों से लेकर निचले क्रम का उठना-बैठना
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में प्रतिदिन मादक पदार्थों में अनुमानित सवा क्विंटल गांजे की खपत होती है। सालों से दो माफियाओं के गैंग सक्रिय हैं। उनकी आबकारी और पुलिस महकमे में मजबूत पकड़ है। यहां तक पुलिस को जरूरत पड़ने पर मादक पदार्थ की सप्लाई और अपने लोगों को चालान के लिए सुपुर्द कर देते हैं। कम मात्रा में पकड़े जाने के कारण आसानी से जमानत पर रिहा हो जाते हैं। संगठित गिरोह के कारण धंधे में संलिप्त लोगों का बाला भी बांका नहीं हो पाता है। चुनावी सीजन में पुलिस अधीक्षक ने शिकंजा कसने के लिए आरोपियों के खिलाफ निर्देश जारी किए हैं।
एसटीएफ लखनऊ ने खागा हाईवे के कटोघन से बुधवार रात ट्रक में गांजा तस्करों की 52 लाख कीमत की बड़ी खेप पकड़ी है। इससे पहले करीब पांच साल पहले लोकल एसओजी ने मलवां थाना क्षेत्र में गांजे की खेप पकड़ी थी। उसके बाद अब खागा में यह एसटीएफ की पकड़ में बड़ी बरामदगी है। हाईवे पर अंतर्राज्यीय स्तर पर गांजा तस्करी नया नहीं है। कहीं न कहीं हाईवे के छह थानों और तीन चौकियों की पुलिस पर सवाल उठते हैं। खुफिया तंत्र कमजोर होने के चलते बाहरी फोर्स ने गुडवर्क में बाजी मारी है। गांजा कारोबारियों ने बीस थाना क्षेत्रों में करीब 150 अड्डे बिक्री के बना रखे हैं। कोई इलाका गांजा कारोबार से अछूता नहीं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गांजा कारोबार में संलिप्त लोग अकूत संपत्ति और राजनैतिक पकड़ वाले हैं। शहर और खागा के दो माफियाओं ने नेटवर्क को आपरेट कर रहे हैं। उन्होंने धंधे में प्रतिस्पर्धा को लेकर सीमाएं बांध रखी हैं। शहर के माफिया का जाल बांदा तक फैला हुआ है। किशनपुर थाने में बुधवार को पकड़ी गई बीस किलो गांजे की खगेप उसकी ही बताई जा रही है। नए-नए लड़कों को सप्लाई के काम में लगाते हैं। जिससे वह खुद पकड़े न जा सके। मलवां में कुछ दिन पहले नेटवर्क से जुड़े लड़के दो किलो गांजे के साथ पकड़े गए थे। इनकी अड्डे प्रमुख तौर पर भांग के ठेके हैं। गांजा कारोबारियों की महकमे में सिपाहियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक है। उनके साथ मिलते जुलते और यहां तक अधिकारियों के प्रमुख आयोजनों तक आते-जाते देखा जाता है। चुनावी सीजन के बाद भी नेटवर्क को तोड़ना आसान नहीं है। करीब पांच साल पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को एक कारोबारी के ठिकाने में दबिश के लिए अपने अंगरक्षकों समेत टीम में शामिल दरोगा, कांस्टेबलों के मोबाइल जमा कराने पड़े थे। जिसके बाद दबिश में गांजे की बरामदगी हो सकी थी। कहा जाता है कि गांजा कारोबारियों से पुलिस की एक स्पेशल टीम को एक लाख रुपये प्रतिमाह की सौगात मिलती है। वहीं थानों में मोटी रकम का हिस्सा बंटता है। कारोबारियों की क्विंटलों गांजे की खपत से करोड़ों का कारोबार चल रहा है।
इनसेट
एक माह पहले मिले थे इनपुट
एसटीएफ को राष्ट्रीय राज्यमार्ग दो से गांजा तस्करी के एक माह पहले इनपुट एक टीम से मिले थे। टीम ने उड़ीसा, एमपी, बिहार, झारखंड से तस्करों की सप्लाई होने के बारे में बताया था। जिसे संज्ञान में लेकर एसटीएफ वर्क कर रही थी। बीच में भी एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक आवाजाही हुई थे। भौगोलिक जानकारी के लिए गठित टीम में एसटीएफ के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र राय को लगाया गया था। इंस्पेक्टर जिले में तीन साल पहले तैनात रहे हैं। खबर है कि तस्करी के नेटवर्क में लोकेशन बताने में कानपुर, फतेहपुर, प्रयागराज आबकारी और पुलिस के सिपाहियों की संलिप्तता है। कार्रवाई का दौर आगे बढ़ा तो पशु तस्करी की तरह कई पुलिस कर्मी गांजा तस्करों को बढ़ावा देने में फंस सकते हैं।
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एसटीएफ लखनऊ को नेशनल हाईवे से अंतर्राज्यीय गांजा की तस्करी होने की खबर मिली थी। एसटीएफ सीओ पीके मिश्र के निर्देशन में टीम ने छानबीन शुरू की। एसटीएफ टीम के प्रभारी निरीक्षक अंजनी कुमार त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र राय, प्रशांत कुमार और एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) के अधीक्षक मोहम्मद नवाब की संयुक्त टीम बुधवार रात खागा के कटोघन टोल प्लाजा पर पहुंची। टीम ने ट्रेलर के पीछे लदा कंटेनर खुलवाया। इसमें स्टील की चादरें लदी हुई थी। टीम को एक बार सूचना गलत लगी। दोबारा छानबीन चालू की। चादरें पलटाई गई। अंदर की ओर गांजा भरे कई बोरे रखे मिले। पुलिस ने ड्राइवर वेद सिंह पुत्र विपत्ति राम और क्लीनर कुमार पाल पुत्र हरिश्चंद्र (निवासी नगर परमोल पोस्ट अकोला थाना कागारोल जिला आगरा) को गिरफ्तार किया। टीम की पूछताछ में चालक व खलासी ने बताया कि उड़ीसा में गजेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति ने गांजा के बोरे लोड कराए थे। गांजा आगरा
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पहुंचाना था। इसके बदले में गजेंद्र सिंह से तीन लाख रुपये मिलने थे। एसटीएफ ने उनके पास से दो मोबाइल, 1200 रुपये, एक आधार कार्ड, दो ग्रीन कार्ड बरामद किए। पुलिस की जांच में पांच सौ एक किलोग्राम गांजा 17 बंडलों से बरामद हुआ। निरीक्षक ज्ञानेंद्र राय ने बताया कि करीब 52 लाख रुपये कीमत का गांजा है। आगरा के
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तस्कर का नेटवर्क कई जिलों में फैला है। तस्कर प्लेन से आता-जाता है। गुणवत्तापरक माल की लोडिंग कराने खुद प्लेन से जाता है। भाड़ा लेकर रूट पर जाने वाले ट्रक चालकों से संपर्क करता है। उन्हीं ट्रकों में माल लोड कराता है। तस्कर की जांच शुरू की गई है। एनसीबी ने इस कार्रवाई की रिपोर्ट दर्ज की है। खागा कोतवाल वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि कोतवाली में टीम ने लिखापढ़ी नहीं कराई है।
फोटो संख्या एवं परिचय
18- टीम के हत्थे चढ़े ट्रेलर और चालक खलासी
19- ट्रेलर से बरामद गांजा
एसटीएफ ने गांजा की खेप पकड़ी
लखनऊ एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने की कार्रवाई
कानपुर-प्रयागराज हाईवे के कटोघन टोल प्लाजा पर पकड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
साइड स्टोरी--
जिले में प्रतिदिन सवा क्विंटल गांजे की खपत
- मादक पदार्थ के कारोबार में दो माफिया सक्रिय
- जेल जाने के बाद नहीं सुधर सके माफिया
- पुलोिस अधिकारियों से लेकर निचले क्रम का उठना-बैठना
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले में प्रतिदिन मादक पदार्थों में अनुमानित सवा क्विंटल गांजे की खपत होती है। सालों से दो माफियाओं के गैंग सक्रिय हैं। उनकी आबकारी और पुलिस महकमे में मजबूत पकड़ है। यहां तक पुलिस को जरूरत पड़ने पर मादक पदार्थ की सप्लाई और अपने लोगों को चालान के लिए सुपुर्द कर देते हैं। कम मात्रा में पकड़े जाने के कारण आसानी से जमानत पर रिहा हो जाते हैं। संगठित गिरोह के कारण धंधे में संलिप्त लोगों का बाला भी बांका नहीं हो पाता है। चुनावी सीजन में पुलिस अधीक्षक ने शिकंजा कसने के लिए आरोपियों के खिलाफ निर्देश जारी किए हैं।
एसटीएफ लखनऊ ने खागा हाईवे के कटोघन से बुधवार रात ट्रक में गांजा तस्करों की 52 लाख कीमत की बड़ी खेप पकड़ी है। इससे पहले करीब पांच साल पहले लोकल एसओजी ने मलवां थाना क्षेत्र में गांजे की खेप पकड़ी थी। उसके बाद अब खागा में यह एसटीएफ की पकड़ में बड़ी बरामदगी है। हाईवे पर अंतर्राज्यीय स्तर पर गांजा तस्करी नया नहीं है। कहीं न कहीं हाईवे के छह थानों और तीन चौकियों की पुलिस पर सवाल उठते हैं। खुफिया तंत्र कमजोर होने के चलते बाहरी फोर्स ने गुडवर्क में बाजी मारी है। गांजा कारोबारियों ने बीस थाना क्षेत्रों में करीब 150 अड्डे बिक्री के बना रखे हैं। कोई इलाका गांजा कारोबार से अछूता नहीं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गांजा कारोबार में संलिप्त लोग अकूत संपत्ति और राजनैतिक पकड़ वाले हैं। शहर और खागा के दो माफियाओं ने नेटवर्क को आपरेट कर रहे हैं। उन्होंने धंधे में प्रतिस्पर्धा को लेकर सीमाएं बांध रखी हैं। शहर के माफिया का जाल बांदा तक फैला हुआ है। किशनपुर थाने में बुधवार को पकड़ी गई बीस किलो गांजे की खगेप उसकी ही बताई जा रही है। नए-नए लड़कों को सप्लाई के काम में लगाते हैं। जिससे वह खुद पकड़े न जा सके। मलवां में कुछ दिन पहले नेटवर्क से जुड़े लड़के दो किलो गांजे के साथ पकड़े गए थे। इनकी अड्डे प्रमुख तौर पर भांग के ठेके हैं। गांजा कारोबारियों की महकमे में सिपाहियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक है। उनके साथ मिलते जुलते और यहां तक अधिकारियों के प्रमुख आयोजनों तक आते-जाते देखा जाता है। चुनावी सीजन के बाद भी नेटवर्क को तोड़ना आसान नहीं है। करीब पांच साल पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को एक कारोबारी के ठिकाने में दबिश के लिए अपने अंगरक्षकों समेत टीम में शामिल दरोगा, कांस्टेबलों के मोबाइल जमा कराने पड़े थे। जिसके बाद दबिश में गांजे की बरामदगी हो सकी थी। कहा जाता है कि गांजा कारोबारियों से पुलिस की एक स्पेशल टीम को एक लाख रुपये प्रतिमाह की सौगात मिलती है। वहीं थानों में मोटी रकम का हिस्सा बंटता है। कारोबारियों की क्विंटलों गांजे की खपत से करोड़ों का कारोबार चल रहा है।
इनसेट
एक माह पहले मिले थे इनपुट
एसटीएफ को राष्ट्रीय राज्यमार्ग दो से गांजा तस्करी के एक माह पहले इनपुट एक टीम से मिले थे। टीम ने उड़ीसा, एमपी, बिहार, झारखंड से तस्करों की सप्लाई होने के बारे में बताया था। जिसे संज्ञान में लेकर एसटीएफ वर्क कर रही थी। बीच में भी एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक आवाजाही हुई थे। भौगोलिक जानकारी के लिए गठित टीम में एसटीएफ के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र राय को लगाया गया था। इंस्पेक्टर जिले में तीन साल पहले तैनात रहे हैं। खबर है कि तस्करी के नेटवर्क में लोकेशन बताने में कानपुर, फतेहपुर, प्रयागराज आबकारी और पुलिस के सिपाहियों की संलिप्तता है। कार्रवाई का दौर आगे बढ़ा तो पशु तस्करी की तरह कई पुलिस कर्मी गांजा तस्करों को बढ़ावा देने में फंस सकते हैं।
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