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श्रमिक मजदूरों को खेती से बीज तैयार करने के बताए गुर
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फतेहपुर। कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव में चल रहे तीन दिवसीय प्रशिक्षण के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रवासी मजदूरों को कृषि वैज्ञानिकों ने खेती करने का तरीका बताया। सह संयोजक डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि खेती में बीज की गुणवत्ता बहुत मायने रखती है। खेती के माध्यम से बीज का उत्पादन करें और उसकी पैकिंग कराकर बिक्री करें।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अपने गांव में ही कृषि आधारित व्यवसाय से जुड़ कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। समूह के साथ एक क्लस्टर बनाकर कम क्षेत्रफल में उन्नत बीजों की बुआई करें और बीज तैयार करें। पैकिंग कराकर बिक्री करने में ज्यादा मुनाफा होगा। उन्होंने कहा कि बीज तैयार करने के लिए ध्यान रखना होगा कि उच्च गुणवत्ता की फसल तैयार हो। इसके लिए तैयार होने वाले बीज को छन्ना लगाकर साफ करना होगा। डॉ. नौशाद आलम ने कहा कि बीज उत्पादन में कंपोस्ट का उपयोग करें। रासायनिक खाद बहुत ही कम प्रयोग करें। डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि पशुपालन के माध्यम से प्रवासी मजदूर खुद को रोजगार से जोड़ सकते हैं। दुग्ध उत्पादन के साथ कंपोस्ट भी तैयार होगी।
प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने सीड हब के विषय में बताया। कहा कि केवीके थरियांव में गुणवत्तापरक बीज की पैकिंग की जानी है। इसमें जिन किसानों को फसल तैयार करने के बाद बीज बिक्री करनी होती है उनका पहले से पंजीकरण किया जाता है। फसल बुआई के लिए केंद्र से बीज दिया जाता है और समय-समय पर सिंचाई और कंपोस्ट के छिड़काव की जानकारी दी जाती है। मौसम विशेषज्ञ सचिन कुमार शुक्ला ने कहा कि बीज उत्पादन में मौसम की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिले के किसानों को लगातार मोबाइल, व्हाटसएप के माध्यम से हमेशा सूचना दी जाती है।
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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अपने गांव में ही कृषि आधारित व्यवसाय से जुड़ कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। समूह के साथ एक क्लस्टर बनाकर कम क्षेत्रफल में उन्नत बीजों की बुआई करें और बीज तैयार करें। पैकिंग कराकर बिक्री करने में ज्यादा मुनाफा होगा। उन्होंने कहा कि बीज तैयार करने के लिए ध्यान रखना होगा कि उच्च गुणवत्ता की फसल तैयार हो। इसके लिए तैयार होने वाले बीज को छन्ना लगाकर साफ करना होगा। डॉ. नौशाद आलम ने कहा कि बीज उत्पादन में कंपोस्ट का उपयोग करें। रासायनिक खाद बहुत ही कम प्रयोग करें। डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि पशुपालन के माध्यम से प्रवासी मजदूर खुद को रोजगार से जोड़ सकते हैं। दुग्ध उत्पादन के साथ कंपोस्ट भी तैयार होगी।
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प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने सीड हब के विषय में बताया। कहा कि केवीके थरियांव में गुणवत्तापरक बीज की पैकिंग की जानी है। इसमें जिन किसानों को फसल तैयार करने के बाद बीज बिक्री करनी होती है उनका पहले से पंजीकरण किया जाता है। फसल बुआई के लिए केंद्र से बीज दिया जाता है और समय-समय पर सिंचाई और कंपोस्ट के छिड़काव की जानकारी दी जाती है। मौसम विशेषज्ञ सचिन कुमार शुक्ला ने कहा कि बीज उत्पादन में मौसम की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिले के किसानों को लगातार मोबाइल, व्हाटसएप के माध्यम से हमेशा सूचना दी जाती है।
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