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सगे भाई की हत्या करने वाले दो सगे भाइयों और भतीजे को उम्रकैद
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फतेहपुर। युवक की हत्या के मामले में जिला जज अशोक कुमार की कोर्ट ने शनिवार को दो सगे भाइयों समेत तीन को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने मुल्जिमों पर अर्थदंड भी लगाया है। प्रकरण न्यायालय में तीन साल से मामला विचाराधीन था।
बकेवर थानाक्षेत्र के नहरामऊ गांव के 35 वर्षीय रामसेवक का अपने सगे बड़े भाइयों शिवनरायन और रामप्रताप से जमीन का विवाद चल रहा था। शिवनरायन और रामप्रताप ने मां के हिस्से की जमीन अपने नाम लिखा ली थी। इसका रामसेवक विरोध कर रहा था। सात फरवरी 2018 की रात करीब आठ बजे शिवनरायन, रामप्रताप और रामप्रताप के बेटे विश्वराम एक राय होकर रामसेवक के पास पहुंचे और जमीन को लेकर झगड़ने लगे।
बात बढ़ी तो शिवनरायन, रामप्रताप और विश्वराम मिलकर रामसेवक को घर से घसीटकर सड़क पर ले आए और कुल्हाड़ी, फरसे से उस पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। जिससे रामसेवक की मौत हो गई। पत्नी महबिरिया की आंखों के सामने उसके पति की निर्मम हत्या की गई। इस हत्याकांड से पूरे गांव में दहशत फैल गई थी। तबसे प्रकरण जिला जज की अदालत में विचाराधीन था।
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हत्याभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए अदालत के समक्ष जिला शासकीय अधिवक्ता सहदेव गुप्त और सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे ने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। कोर्ट के समक्ष मृतक रामसेवक की पत्नी महबिरिया ने आंखों देखी घटना को बया की। प्रकरण की सुनवाई कर रहे जिला जज अशोक कुमार ने मुल्जिम शिवनरायन, रामप्रताप और विश्वराम को मृत्यु तक आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। घटना के बाद से तीनों मुल्जिम जेल में थे।
डेढ़ बीघा जमीन ने हंसते खेलते परिवार को बिखेर दिया। कोर्ट के फैसले की जानकारी गांव पहुंची तो तीन साल पुरानी घटना फिर से लोगों के जेहन में ताजा हो गई। गांव के लोगों का कहना था कि जिस जमीन के लिए यह सब हुआ वह तो रह गई लेकिन पूरा परिवार बिखर गया।
मृतक रामसेवक के पिता के पास कुल साढ़े सात बीघे जमीन थी। पिता की मृत्यु के बाद जमीन के पांच बराबर हिस्से किए गए। पहला हिस्सा डेढ़ बीघा मां चंदा देवी के नाम आया। शेष चार भाई रामसेवक, शिवनरायन, रामप्रताप और बिहारी के हिस्से भी डेढ़-डेढ़ बीघे जमीन आई। चारों भाई दूसरे राज्यों में प्राइवेट नौकरियां करते थे। शिवनरायन और रामप्रताप ने मां चंदा देवी के हिस्से की डेढ़ बीघा जमीन भी आधी-आधी यानी 15-15 बिस्वा अपने नाम लिखा ली थी।
रामसेवक का इसी बात को लेकर विरोध था। यह विरोध इतना बढ़ा कि शिवनरायन और रामप्रताप ने अपने ही सगे भाई रामसेवक की हत्या कर डाली। इस अपराध में रामप्रताप ने अपने बेटे विश्वराम को भी शामिल कर लिया। अब जब तीनों को आजीवन कारावास हो गया है तो गांव में जिस जमीन के पीछे इतना खूनी संघर्ष हुआ, उसे देखने वाला ही कोई नहीं बचा। मृतक रामसेवक की पत्नी महबिरिया भी घटना के बाद से अपनी दो बेटियों और एक बेटे के साथ चांदपुर थानाक्षेत्र के धाने गांव स्थित मायके में रहती है। नहरामऊ का घर बंद पड़ा है।
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बकेवर थानाक्षेत्र के नहरामऊ गांव के 35 वर्षीय रामसेवक का अपने सगे बड़े भाइयों शिवनरायन और रामप्रताप से जमीन का विवाद चल रहा था। शिवनरायन और रामप्रताप ने मां के हिस्से की जमीन अपने नाम लिखा ली थी। इसका रामसेवक विरोध कर रहा था। सात फरवरी 2018 की रात करीब आठ बजे शिवनरायन, रामप्रताप और रामप्रताप के बेटे विश्वराम एक राय होकर रामसेवक के पास पहुंचे और जमीन को लेकर झगड़ने लगे।
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बात बढ़ी तो शिवनरायन, रामप्रताप और विश्वराम मिलकर रामसेवक को घर से घसीटकर सड़क पर ले आए और कुल्हाड़ी, फरसे से उस पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। जिससे रामसेवक की मौत हो गई। पत्नी महबिरिया की आंखों के सामने उसके पति की निर्मम हत्या की गई। इस हत्याकांड से पूरे गांव में दहशत फैल गई थी। तबसे प्रकरण जिला जज की अदालत में विचाराधीन था।
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हत्याभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए अदालत के समक्ष जिला शासकीय अधिवक्ता सहदेव गुप्त और सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे ने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। कोर्ट के समक्ष मृतक रामसेवक की पत्नी महबिरिया ने आंखों देखी घटना को बया की। प्रकरण की सुनवाई कर रहे जिला जज अशोक कुमार ने मुल्जिम शिवनरायन, रामप्रताप और विश्वराम को मृत्यु तक आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। घटना के बाद से तीनों मुल्जिम जेल में थे।
डेढ़ बीघा जमीन ने हंसते खेलते परिवार को बिखेर दिया। कोर्ट के फैसले की जानकारी गांव पहुंची तो तीन साल पुरानी घटना फिर से लोगों के जेहन में ताजा हो गई। गांव के लोगों का कहना था कि जिस जमीन के लिए यह सब हुआ वह तो रह गई लेकिन पूरा परिवार बिखर गया।
मृतक रामसेवक के पिता के पास कुल साढ़े सात बीघे जमीन थी। पिता की मृत्यु के बाद जमीन के पांच बराबर हिस्से किए गए। पहला हिस्सा डेढ़ बीघा मां चंदा देवी के नाम आया। शेष चार भाई रामसेवक, शिवनरायन, रामप्रताप और बिहारी के हिस्से भी डेढ़-डेढ़ बीघे जमीन आई। चारों भाई दूसरे राज्यों में प्राइवेट नौकरियां करते थे। शिवनरायन और रामप्रताप ने मां चंदा देवी के हिस्से की डेढ़ बीघा जमीन भी आधी-आधी यानी 15-15 बिस्वा अपने नाम लिखा ली थी।
रामसेवक का इसी बात को लेकर विरोध था। यह विरोध इतना बढ़ा कि शिवनरायन और रामप्रताप ने अपने ही सगे भाई रामसेवक की हत्या कर डाली। इस अपराध में रामप्रताप ने अपने बेटे विश्वराम को भी शामिल कर लिया। अब जब तीनों को आजीवन कारावास हो गया है तो गांव में जिस जमीन के पीछे इतना खूनी संघर्ष हुआ, उसे देखने वाला ही कोई नहीं बचा। मृतक रामसेवक की पत्नी महबिरिया भी घटना के बाद से अपनी दो बेटियों और एक बेटे के साथ चांदपुर थानाक्षेत्र के धाने गांव स्थित मायके में रहती है। नहरामऊ का घर बंद पड़ा है।