{"_id":"61311f148ebc3ebeb708a706","slug":"crime-fatehpur-news-court-decision-fatehpur-news-knp64979800","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस की विवेचना कोर्ट के कठघरे में ...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस की विवेचना कोर्ट के कठघरे में ...
विज्ञापन
सीओ बिंदकी समेत तीन के खिलाफ कोर्ट ने डीजीपी को लिखा पत्र
फतेहपुर। कानून के रखवाले अनाधिकारिक रूप से अब अपराधियों के रहनुमा बनते नजर आ रहे हैं। यह कोई कहने की बात नहीं है, पुलिस की यह प्रवृत्ति अदालती प्रक्रिया के दौरान बकायदा लिखापढ़ी में पकड़ में आई है। मामला चाहे हत्या के प्रयास का हो या फिर किसी नाबालिग से दुष्कर्म का, दोनों ही मामलों में पुलिस ने अपराधियों को बचाने में सिद्दत से प्रयास किया।
अदालतों ने मामला पकड़ा तो अब कार्रवाई की नौबत बन आई है। गुुरुवार को ऐसे ही दो मामलों की बानगी देखने को मिली, जिसमें अदालत ने बिंदकी सीओ के साथ ही मौजूदा जाफरगंज और खखरेरू इंस्पेक्टर के विरुद्घ कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है।
केस एक-
अभियुक्त के पक्ष में ही लगा दी एफआर
फतेहपुर। अपराधियों पर पुलिस की मेहरबानी इस कदर है कि हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले के अभियुक्त के पक्ष में ही विवेचक ने एफआर लगा दी। जिगनी गांव में अफ्सार और महमूद ने चचेरे भाई शकीउल्ला की हत्या का प्रयास किया था। मामले में तत्कालीन विवेचक और मौजूदा जाफरगंज इंस्पेक्टर केशव वर्मा के विरुद्घ अपर जिला जज विनोद कुमार चौरसिया ने विभागीय कार्रवाई के लिए एसपी और डीजीपी को पत्र लिखा है।
विज्ञापन
पीड़ित पक्ष की ओर से न्यायालय में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश वर्मा ने बताया कि केशव वर्मा ने विवेचना के दौरान अभियुक्त अफ्सार को बचाने के लिए उसके पक्ष में एफआर लगा दी। इतना हीं नहीं उन्होंने अदालत के समक्ष यह बयान भी दर्ज कराया कि अफ्सार ने बताया कि उसने गोली नहीं चलाई, इसलिए उन्होंने कोर्ट में घटना में प्रयोग हुआ कट्टा भी दाखिल नहीं किया।
केशव ने मामले में मेडिकल करने वाले चिकित्सक के बयान तक नहीं कराए। जिससे मुकदमे के शुरुआती दौर में अफ्सार की जमानत भी हो गई। इस पर अधिवक्ता राकेश वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी की। तब जाकर अफ्सार को कोर्ट में दोबारा प्रस्तुत किया गया और गुरुवार को उसे सजा हुई।
केस 2-
पाक्सो के मुल्जिम को बचाने में बिंदकी सीओ समेत दो फंसे
फतेहपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को बचाने के चक्कर में पुलिस अपने ही बुने जाल में फंसती नजर आ रही है। फरवरी 2021 में जहानाबाद थानाक्षेत्र की एक बच्ची के साथ ग्राम प्रधान ने दुष्कर्म किया। बच्ची जब पांच माह की गर्भवती हो गई तो परिजनों की जानकारी हुई। एफआईआर के बाद विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष राकेश पांडेय ने की।
जिसमें एक जून को मुल्जिम सरसिज मोहन उर्फ राजू सचान को जेल भेज दिया गया और विवेचना क्राइम ब्रांच को दे दी गई। यहां तत्कालीन विवेचक और मौजूदा इंस्पेक्टर खखरेरू दीपनरायन सरोज ने कोर्ट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 169 के तहत यह कहा कि मुल्जिम के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं, इसलिए उसे छोड़ दिया जाना चाहिए। जबकि इस बीच पीड़िता, उसके नवजात शिशु और मुल्जिम राजू का डीएनए टेस्ट कराया जा चुका था।
मगर रिपोर्ट आने से पहले ही विवेचक दीपनरायन सरोज ने अदालत के समक्ष मुल्जिम की रिमांड लेने का प्रार्थना पत्र ही नहीं दिया और आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हुआ। मजबूरन 90 दिन पूरा होते ही अदालत को मुल्जिम को छोड़ना पड़ा। इस सारे पत्राचार को बिंदकी सीओ योगेंद्र मलिक भी आंख मूंदकर आगे बढ़ाते रहे।
विवेचक दीपनरायन सरोज और सीओ योगेंद्र मलिक को लापरवाह ठहराते हुए पाक्सो कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मो. अहमद खान ने दोनों के विरुद्घ विभागीय कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक और डीजीपी को पत्र लिखा है।
विज्ञापन
फतेहपुर। कानून के रखवाले अनाधिकारिक रूप से अब अपराधियों के रहनुमा बनते नजर आ रहे हैं। यह कोई कहने की बात नहीं है, पुलिस की यह प्रवृत्ति अदालती प्रक्रिया के दौरान बकायदा लिखापढ़ी में पकड़ में आई है। मामला चाहे हत्या के प्रयास का हो या फिर किसी नाबालिग से दुष्कर्म का, दोनों ही मामलों में पुलिस ने अपराधियों को बचाने में सिद्दत से प्रयास किया।
अदालतों ने मामला पकड़ा तो अब कार्रवाई की नौबत बन आई है। गुुरुवार को ऐसे ही दो मामलों की बानगी देखने को मिली, जिसमें अदालत ने बिंदकी सीओ के साथ ही मौजूदा जाफरगंज और खखरेरू इंस्पेक्टर के विरुद्घ कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है।
विज्ञापन
केस एक-
अभियुक्त के पक्ष में ही लगा दी एफआर
फतेहपुर। अपराधियों पर पुलिस की मेहरबानी इस कदर है कि हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले के अभियुक्त के पक्ष में ही विवेचक ने एफआर लगा दी। जिगनी गांव में अफ्सार और महमूद ने चचेरे भाई शकीउल्ला की हत्या का प्रयास किया था। मामले में तत्कालीन विवेचक और मौजूदा जाफरगंज इंस्पेक्टर केशव वर्मा के विरुद्घ अपर जिला जज विनोद कुमार चौरसिया ने विभागीय कार्रवाई के लिए एसपी और डीजीपी को पत्र लिखा है।
विज्ञापन
पीड़ित पक्ष की ओर से न्यायालय में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश वर्मा ने बताया कि केशव वर्मा ने विवेचना के दौरान अभियुक्त अफ्सार को बचाने के लिए उसके पक्ष में एफआर लगा दी। इतना हीं नहीं उन्होंने अदालत के समक्ष यह बयान भी दर्ज कराया कि अफ्सार ने बताया कि उसने गोली नहीं चलाई, इसलिए उन्होंने कोर्ट में घटना में प्रयोग हुआ कट्टा भी दाखिल नहीं किया।
केशव ने मामले में मेडिकल करने वाले चिकित्सक के बयान तक नहीं कराए। जिससे मुकदमे के शुरुआती दौर में अफ्सार की जमानत भी हो गई। इस पर अधिवक्ता राकेश वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी की। तब जाकर अफ्सार को कोर्ट में दोबारा प्रस्तुत किया गया और गुरुवार को उसे सजा हुई।
केस 2-
पाक्सो के मुल्जिम को बचाने में बिंदकी सीओ समेत दो फंसे
फतेहपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को बचाने के चक्कर में पुलिस अपने ही बुने जाल में फंसती नजर आ रही है। फरवरी 2021 में जहानाबाद थानाक्षेत्र की एक बच्ची के साथ ग्राम प्रधान ने दुष्कर्म किया। बच्ची जब पांच माह की गर्भवती हो गई तो परिजनों की जानकारी हुई। एफआईआर के बाद विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष राकेश पांडेय ने की।
जिसमें एक जून को मुल्जिम सरसिज मोहन उर्फ राजू सचान को जेल भेज दिया गया और विवेचना क्राइम ब्रांच को दे दी गई। यहां तत्कालीन विवेचक और मौजूदा इंस्पेक्टर खखरेरू दीपनरायन सरोज ने कोर्ट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 169 के तहत यह कहा कि मुल्जिम के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं, इसलिए उसे छोड़ दिया जाना चाहिए। जबकि इस बीच पीड़िता, उसके नवजात शिशु और मुल्जिम राजू का डीएनए टेस्ट कराया जा चुका था।
मगर रिपोर्ट आने से पहले ही विवेचक दीपनरायन सरोज ने अदालत के समक्ष मुल्जिम की रिमांड लेने का प्रार्थना पत्र ही नहीं दिया और आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हुआ। मजबूरन 90 दिन पूरा होते ही अदालत को मुल्जिम को छोड़ना पड़ा। इस सारे पत्राचार को बिंदकी सीओ योगेंद्र मलिक भी आंख मूंदकर आगे बढ़ाते रहे।
विवेचक दीपनरायन सरोज और सीओ योगेंद्र मलिक को लापरवाह ठहराते हुए पाक्सो कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मो. अहमद खान ने दोनों के विरुद्घ विभागीय कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक और डीजीपी को पत्र लिखा है।