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Fatehpur News: 20 घंटे बाद यमुना में उतराता मिला मौसेरे भाई का शव
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फाइल फोटो-10-प्रतीक पांडेय। स्रोत: परिजन
जाफरगंज/अमौली। यमुना नदी में नहाते समय डूबकर लापता हुए किशोर का शव 20 घंटे बाद बुधवार सुबह उतराता मिला। शव मिलने की जानकारी के बाद ग्रामीणों और परिजन की भीड़ लग गई।
कस्बा निवासी योगेश उर्फ बड़कू मिश्रा मंगलवार को भतीजे ऋषभ मिश्रा (11) पुत्र अभिषेक और साढ़ू प्रमोद पांडेय के पुत्र प्रतीक (13) को लेकर बिंदौर यमुना घाट स्नान के लिए गए थे। नहाते समय दोनों किशोर गहरे पानी में डूब गए थे। ग्रामीणों ने कुछ देर बाद ऋषभ का शव खोज निकाला था। प्रतीक लापता हो गया था।
देर रात तक ईछावर, दरियाबाद और गंगौली घाटों पर जाल डालकर तलाश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह करीब छह बजे स्थानीय लोगों ने सैंमसी गांव के पास घटनास्थल से लगभग 200 मीटर दूर नदी में प्रतीक का शव उतराता देखा।
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प्रतीक के पिता प्रमोद पांडेय मूलरूप से चांदपुर कस्बा के निवासी हैं। वह परिवार सहित गाजियाबाद में रहते हैं और दिल्ली में नौकरी करते हैं। बेटे के डूबने की सूचना मिलते ही प्रमोद पांडेय और पत्नी प्रियंका मंगलवार रात गांव पहुंच गए थे। दोनों बच्चे माता-पिता की इकलौती संतान थे।
भतीजे को साथ लाने का सालता रहा मलाल
प्रतीक गर्मी की छुट्टियों में चाचा पवन के साथ गांव आया था। यहां से वह नाना संतोष तिवारी और फिर मौसी शालू के घर गया था। चाचा पवन ने कहा कि यदि वह भतीजे को गाजियाबाद से गांव न लाते तो शायद यह हादसा नहीं होता।
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मेरी आंखों के सामने दोनों डूब गए
घटना को याद कर योगेश उर्फ बड़कू भावुक हो उठे। उन्होंने रोते हुए कहा कि उनकी आंखों के सामने दोनों बच्चे डूब गए लेकिन वह उन्हें बचा नहीं सके। यह कहते ही वह फफक पड़े। उनकी हालत देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
तीन दिन में दोनों गहरे दोस्त हो गए थे
परिजन ने बताया कि पिछले वर्ष प्रतीक की ऋषभ से पहली मुलाकात हुई थी। इस बार दोनों तीन दिन तक साथ रहे और गहरे दोस्त बन गए थे। साथ खाना, खेलना और सोना उनकी दिनचर्या बन गई थी। दोनों कक्षा सात के छात्र थे। संयोग ऐसा रहा कि तीन दिन की दोस्ती के बाद दोनों ने एक साथ दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी अंतिम यात्रा भी एक ही दिन निकली।
मेरे लाल, जाते-जाते मुझे कलंकिनी बना गए
प्रतीक की मौसी शालू खुद को कोसते हुए कह रही थीं कि प्रतीक उनके घर आया था और वहीं से उसकी अर्थी उठ गई। शव से लिपटकर वह बार-बार कहती रहीं मेरे लाल, जाते-जाते मुझे कलंकिनी बना गए। उन्होंने बताया कि प्रतीक यमुना में स्नान करने की जिद कर रहा था। इसी वजह से उन्होंने पति से बच्चों को घाट ले जाने के लिए कहा था।
देर रात पहुंची एसडीआरएफ, सुबह शव मिलने पर लौटी
प्रतीक की तलाश के लिए प्रयागराज से एसडीआरएफ की टीम मंगलवार देर रात जाफरगंज पहुंची थी। टीम बुधवार सुबह नदी में सर्च अभियान शुरू करने वाली थी लेकिन उससे पहले ही घटनास्थल से कुछ दूरी पर प्रतीक का शव मिल गया। इसके बाद टीम बिना अभियान चलाए वापस लौट गई।
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कस्बा निवासी योगेश उर्फ बड़कू मिश्रा मंगलवार को भतीजे ऋषभ मिश्रा (11) पुत्र अभिषेक और साढ़ू प्रमोद पांडेय के पुत्र प्रतीक (13) को लेकर बिंदौर यमुना घाट स्नान के लिए गए थे। नहाते समय दोनों किशोर गहरे पानी में डूब गए थे। ग्रामीणों ने कुछ देर बाद ऋषभ का शव खोज निकाला था। प्रतीक लापता हो गया था।
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देर रात तक ईछावर, दरियाबाद और गंगौली घाटों पर जाल डालकर तलाश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह करीब छह बजे स्थानीय लोगों ने सैंमसी गांव के पास घटनास्थल से लगभग 200 मीटर दूर नदी में प्रतीक का शव उतराता देखा।
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प्रतीक के पिता प्रमोद पांडेय मूलरूप से चांदपुर कस्बा के निवासी हैं। वह परिवार सहित गाजियाबाद में रहते हैं और दिल्ली में नौकरी करते हैं। बेटे के डूबने की सूचना मिलते ही प्रमोद पांडेय और पत्नी प्रियंका मंगलवार रात गांव पहुंच गए थे। दोनों बच्चे माता-पिता की इकलौती संतान थे।
भतीजे को साथ लाने का सालता रहा मलाल
प्रतीक गर्मी की छुट्टियों में चाचा पवन के साथ गांव आया था। यहां से वह नाना संतोष तिवारी और फिर मौसी शालू के घर गया था। चाचा पवन ने कहा कि यदि वह भतीजे को गाजियाबाद से गांव न लाते तो शायद यह हादसा नहीं होता।
मेरी आंखों के सामने दोनों डूब गए
घटना को याद कर योगेश उर्फ बड़कू भावुक हो उठे। उन्होंने रोते हुए कहा कि उनकी आंखों के सामने दोनों बच्चे डूब गए लेकिन वह उन्हें बचा नहीं सके। यह कहते ही वह फफक पड़े। उनकी हालत देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
तीन दिन में दोनों गहरे दोस्त हो गए थे
परिजन ने बताया कि पिछले वर्ष प्रतीक की ऋषभ से पहली मुलाकात हुई थी। इस बार दोनों तीन दिन तक साथ रहे और गहरे दोस्त बन गए थे। साथ खाना, खेलना और सोना उनकी दिनचर्या बन गई थी। दोनों कक्षा सात के छात्र थे। संयोग ऐसा रहा कि तीन दिन की दोस्ती के बाद दोनों ने एक साथ दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी अंतिम यात्रा भी एक ही दिन निकली।
मेरे लाल, जाते-जाते मुझे कलंकिनी बना गए
प्रतीक की मौसी शालू खुद को कोसते हुए कह रही थीं कि प्रतीक उनके घर आया था और वहीं से उसकी अर्थी उठ गई। शव से लिपटकर वह बार-बार कहती रहीं मेरे लाल, जाते-जाते मुझे कलंकिनी बना गए। उन्होंने बताया कि प्रतीक यमुना में स्नान करने की जिद कर रहा था। इसी वजह से उन्होंने पति से बच्चों को घाट ले जाने के लिए कहा था।
देर रात पहुंची एसडीआरएफ, सुबह शव मिलने पर लौटी
प्रतीक की तलाश के लिए प्रयागराज से एसडीआरएफ की टीम मंगलवार देर रात जाफरगंज पहुंची थी। टीम बुधवार सुबह नदी में सर्च अभियान शुरू करने वाली थी लेकिन उससे पहले ही घटनास्थल से कुछ दूरी पर प्रतीक का शव मिल गया। इसके बाद टीम बिना अभियान चलाए वापस लौट गई।

फाइल फोटो-10-प्रतीक पांडेय। स्रोत: परिजन

फाइल फोटो-10-प्रतीक पांडेय। स्रोत: परिजन