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शीतलहर का प्रकोप जारी, चपेट में एक और की जान गई

Mon, 12 Jan 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Mon, 12 Jan 2015 12:33 AM IST
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cold waves continues, one more person dead
20 वीं सदी के 15वें साल में सर्दी रिकार्ड बनाने को आतुर दिखाई दे रही है। लुढ़कते पारे से तापमान में आ रही गिरावट से हरेक जीवन सहम गया है। महीने भर के दौरान ठंड से 28 मौतें अब तक हो चुकी हैं। देखा जाए तो ऐसे में मरने वालों का औसत हरेक दिन एक मौत का है।
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दो दिन से ठंड के बरपने शुरू हुए सितम सेे जिंदगी बेपटरी हो चली है। बाजारों से खरीदार ओझिल हो गए हैं। प्रशासन का प्रयास शासन स्तर दी जाने वाली आर्थिक सहायता तक सीमित है।
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गरीबों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने दूसरी कंबलों की दूसरी डिमांड भेजी है। हाड़कपाऊ सर्दी से छुट्टी का मजा किरकिरा हो गया।

लोग दोपहर तक घने कोहरे से ढके रहे आसमान और चल रहीं सर्दीली हवाओं से बाहर निकालने से बाज आए। लिहाजा रविवार को सड़कों पर छाने वाली रौनक सड़कों से नदारद रही।
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बच्चों को खासकर कमरों में कैद रखा गया। इस दिन ठंड ने पिछले कई दशक के रिकार्ड को हाशिए पर ला दिया। सर्दीली हवाओं के रूक रूक करके चलने से जनजीवन ठहर गया।

कंपकंपाने वाली ठंड के बीच देर सुबह तक घना कोहरा रहने से लोगाें ने घरों से निकलने का इरादा छोड़ दिया। बाहर वहीं निकले, जिन्हें जरूरी था।

यह मौसम का कहर ही था कि जाम से कराहने वाली शहर की सड़कें वाहनों से खाली नजर आई। अलबत्ता मवेशियों का जरूर इन सड़कों और चौराहों पर जमघट दिखाई दिया।

हालात यह रहे कि स्पोर्ट्स स्टेडियम, आईटीआई मैदान, जीआईसी मैदान अन्य दिनों की अपेक्षा खाली खाली नजर आए। गैरबाजारू इलाकों में तो कर्फ्यू जैसा नजर था। परिवार समेत टीवी के सामने बैठ करके बीच-बीच में मौसम के हालात जानने की कोशिशें होतीं रहीं।

गरीबों के लिए यह जाड़ा मुसीबत बना हुआ है। जलाऊ लकड़ी न होने से मजबूरी में लोग खरपतवार और रद्दी बोरों कागजों और बरसाती को जलाकर शरीर का तापमान बढ़ा रहे हैं।
रिकार्ड तोड़ कड़ाके की ठंड से जन-जीवन ठहर गया है। घरों में दुबके रहने के  लिए लोग मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी न होने से गरीब पेड़ों की छाल निकालकर ताप रहे हैं।


मान्यता प्राप्त प्राइवेट नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों के खुले रहने से बच्चे कपकपाते हुए आते-जाते हैं। घर जाते ही अलाव तापने लगते हैं। अब तो ठंड से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।


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