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सर्दी कहर बनकर टूटी, मासूम समेत छह की जान गई
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Tue, 30 Dec 2014 12:59 AM IST
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ठंड कहर बरपा कर रही है। जिले में चौबीस घंटे के भीतर सर्दी की चपेट में आकर मासूम समेत छह लोगों की जान चली गई। दो मौतें हंसवा पीएचसी के अंतर्गत हुईं जबकि चार मौतें हथगाम थाना क्षेत्र के अलग-अलग चार गांवों में हुईं।
आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं। पखवारे भर में ठंड से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी हैं। उधर, कोहरा व बर्फीली हवाओं से जनजीवन बेहाल है।
धूप निकलने के बाद भी उसकी तासीर गायब है। हाल यह है कि पूरे दिन लोग ठिठुरन से बचने की जुगत में लगे रहते हैं। उधर, प्रशासनिक स्तर पर ठंड से बचाव के लिए जारी प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
नौकरी पेशा लोगों को छोड़ दें, व्यापारिक गतिविधियां भी लगभग शून्य हैं। बाजारों से रौनक गायब हैं। ट्रेन व बस सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हैं। उधर, स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों की भीड़ लग रही है। मरीजों में वृद्ध व बच्चों की संख्या ज्यादा है।
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सोमवार को बिलंदा निवासी रजोल की बेटी रिंकी को ठंड लग गई। हालत बिगड़ने पर परिजन आननफानन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। रास्ते में ही मासूम का दम निकल गया।
इसी तरह रविवार की देर शाम हंसवा निवासी राजेश निर्मल की छह की बेटी की सर्दी लगने से मौत हो गई। उधर, हथगाम थाना क्षेत्र के अलग अलग चार गांवों में ठंड लगने से चार लोगाें की मौत हो गई।
रविवार की रात सरांय गांव निवासी महावीर गुप्ता (62) ने शाम को मट्ठा पी लिया था और घर के बाहर छप्पर के नीचे सो रहे थे। ठंडक लगने से रात को उनकी मौत हो गई। परिजनों को सुबह इसकी जानकारी मिली।
गौसपुर गांव में धुन्नू नट (55) झोपड़ी में सो रहा था। रात को ठंड लगने से मौत हो गई। इसी प्रकार पटेनी गांव में अहमद हुसैन (58) की ठंड से तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया।
अंहिदा गांव में मुन्ना मौर्य की पत्नी संध्या देवी(38) की सुबह पांच बजे घर का काम करते समय ठंड लग गई, उनकी मौत हो गई। एसडीएम बलराम सिंह ने बताया कि ठंड से मरने वालों की जानकारी नहीं है। पता कराकर नियमानुसार आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
पखवारे भर से जारी कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन अस्तव्यस्त है। ठंड का सबसे ज्यादा असर लोगों की सेहत पर है। अब तक सोलह लोगों की मौत हो चुकी है। उधर, कोहरे से बस व ट्रेन के यात्री भी परेशान हैं।
सोमवार को पूर्व व पश्चिम की यात्रा कराने वाली ट्रेनें घंटों विलंब रहीं। पूर्व की ओर चलने वाली जयपुर-इलाहाबाद एक्सप्रेस13 घंटे, रीवां एक्सप्रेस 12 घंटे, जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस तीन घंटे, नंदनकानन एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, नाई-ईस्ट एक्सप्रेस 29 घंटे, प्रयागराज एक्सप्रेस 11 घंटे, संगम एक्सप्रेस 10 घंटे, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस साढ़े 13 घंटे, मूरी एक्सप्रेस छह घंटे, आनंद बिहार एक्सप्रेस 16 घंटे, कालका-हावड़ा एक्सप्रेस साढ़े तीन घंटे व तूफान मेल 21 घंटे विलंब रही। इसी प्रकार से पश्चिम की यात्रा कराने वाली ट्रेनें रेंगने से यात्री शीतलहरी के बीच कंपकंपातें हुए इंतजार करने को मजबूर दिखाई दिए।
तूफान एक्सप्रेस आठ घंटे, नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस चार घंटे, महानंदा एक्सप्रेस साढ़े 28 घंटे, हावड़ा-कालका व हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस के सात-सात घंटे विलंब रहीं। रेलवे के इंक्वायरी रूम में गाड़ियों की स्थिति जानने को दोहपर ढाई बजे लोग जूझते नजर आए। दिल्ली के लिए गाड़ी कितने बजे हैं, कोलकाता के लिए सबसे पहले कौन सी ट्रेन आने आएगी, जैसे सवालों की झड़ी लगी थी। जवाब देने के बजाय मोबाइल में घरेलू बातें कर रहे इन्क्वायरी बाबू को देख कर एक युवक ने चाची से बाद में बतियाने की नसीहत दे दी।
सड़कों व बाजारों मेें छाया रहा सन्नाटा
दिसंबर के आखिरी सप्ताह का पहला दिन कंपकंपाने वाला साबित हुआ। तापमान के लुढ़कने से जिंदगी की रफ्तार पर असर दिखाई दिया। कामगार तबका हाड़-कपाऊ सर्दी के बीच जिंदगी की गाड़ी खींचता नजर आया। उधर कोहरे और शीतलहरी के चलते ज्यादातर लोग घरोें में कैद रहें। घरों से वहीं निकले जिन्हें जरूरी था। सड़कों पर वाहनों समेत राहगीरों की चहलकदमी न के बराबर दिखाई दी तो बाजारें भी खरीदारों के अभाव में साप्ताहिक बाजार की याद दिलातीं रहीं। चौक व कलक्टरगंज जैसे पॉश बाजारों में सन्नाटा दिखाई दिया।
अलाव के लिए कचरा, टायर तक जला रहे
कड़ाके की ठंड में अलाव बड़ा सहारा बनता है। अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम न होने पर लोग कचरे से लेकर टायर व ट्यूब तक जला रहे हैं। जिससे नगर पालिका कर्मियों का काम आसान हो गया है। सोमवार की सुबह ट्रेन पकड़ने के लिए आदर्श रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रास्ते के कूड़े को माचिस दिखाते दिखाई दिए। सिविल लाइन्स से लेकर जीटी रोड तक में जुगाड़ के ऐसे अलाव जगह-जगह जलते दिखाई दिए। शांतीनगर इलाके में वाहनों के टायर ट्यूब जला कर ठंड से बचने का प्रयास सारा दिन होता रहा।
बंदर सिकुड़े, थमा है उत्पात
सर्दी ने बंदरों के उत्पात पर पाबंदी लगाने का काम किया है। सारा दिन रिहाइशी इलाकों में धमाचौकड़ी करने वाले बंदर मौसम की मार से बेहाल नजर आ रहे हैं। सोमवार को आदर्श रेलवे स्टेशन के पब्लिक फुटओवर ब्रिज में स्कूल जा रहे बच्चों को बंदरों के झुंड से डर नहीं लगा।
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आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं। पखवारे भर में ठंड से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी हैं। उधर, कोहरा व बर्फीली हवाओं से जनजीवन बेहाल है।
धूप निकलने के बाद भी उसकी तासीर गायब है। हाल यह है कि पूरे दिन लोग ठिठुरन से बचने की जुगत में लगे रहते हैं। उधर, प्रशासनिक स्तर पर ठंड से बचाव के लिए जारी प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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नौकरी पेशा लोगों को छोड़ दें, व्यापारिक गतिविधियां भी लगभग शून्य हैं। बाजारों से रौनक गायब हैं। ट्रेन व बस सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हैं। उधर, स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों की भीड़ लग रही है। मरीजों में वृद्ध व बच्चों की संख्या ज्यादा है।
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सोमवार को बिलंदा निवासी रजोल की बेटी रिंकी को ठंड लग गई। हालत बिगड़ने पर परिजन आननफानन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। रास्ते में ही मासूम का दम निकल गया।
इसी तरह रविवार की देर शाम हंसवा निवासी राजेश निर्मल की छह की बेटी की सर्दी लगने से मौत हो गई। उधर, हथगाम थाना क्षेत्र के अलग अलग चार गांवों में ठंड लगने से चार लोगाें की मौत हो गई।
रविवार की रात सरांय गांव निवासी महावीर गुप्ता (62) ने शाम को मट्ठा पी लिया था और घर के बाहर छप्पर के नीचे सो रहे थे। ठंडक लगने से रात को उनकी मौत हो गई। परिजनों को सुबह इसकी जानकारी मिली।
गौसपुर गांव में धुन्नू नट (55) झोपड़ी में सो रहा था। रात को ठंड लगने से मौत हो गई। इसी प्रकार पटेनी गांव में अहमद हुसैन (58) की ठंड से तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया।
अंहिदा गांव में मुन्ना मौर्य की पत्नी संध्या देवी(38) की सुबह पांच बजे घर का काम करते समय ठंड लग गई, उनकी मौत हो गई। एसडीएम बलराम सिंह ने बताया कि ठंड से मरने वालों की जानकारी नहीं है। पता कराकर नियमानुसार आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
पखवारे भर से जारी कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन अस्तव्यस्त है। ठंड का सबसे ज्यादा असर लोगों की सेहत पर है। अब तक सोलह लोगों की मौत हो चुकी है। उधर, कोहरे से बस व ट्रेन के यात्री भी परेशान हैं।
सोमवार को पूर्व व पश्चिम की यात्रा कराने वाली ट्रेनें घंटों विलंब रहीं। पूर्व की ओर चलने वाली जयपुर-इलाहाबाद एक्सप्रेस13 घंटे, रीवां एक्सप्रेस 12 घंटे, जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस तीन घंटे, नंदनकानन एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, नाई-ईस्ट एक्सप्रेस 29 घंटे, प्रयागराज एक्सप्रेस 11 घंटे, संगम एक्सप्रेस 10 घंटे, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस साढ़े 13 घंटे, मूरी एक्सप्रेस छह घंटे, आनंद बिहार एक्सप्रेस 16 घंटे, कालका-हावड़ा एक्सप्रेस साढ़े तीन घंटे व तूफान मेल 21 घंटे विलंब रही। इसी प्रकार से पश्चिम की यात्रा कराने वाली ट्रेनें रेंगने से यात्री शीतलहरी के बीच कंपकंपातें हुए इंतजार करने को मजबूर दिखाई दिए।
तूफान एक्सप्रेस आठ घंटे, नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस चार घंटे, महानंदा एक्सप्रेस साढ़े 28 घंटे, हावड़ा-कालका व हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस के सात-सात घंटे विलंब रहीं। रेलवे के इंक्वायरी रूम में गाड़ियों की स्थिति जानने को दोहपर ढाई बजे लोग जूझते नजर आए। दिल्ली के लिए गाड़ी कितने बजे हैं, कोलकाता के लिए सबसे पहले कौन सी ट्रेन आने आएगी, जैसे सवालों की झड़ी लगी थी। जवाब देने के बजाय मोबाइल में घरेलू बातें कर रहे इन्क्वायरी बाबू को देख कर एक युवक ने चाची से बाद में बतियाने की नसीहत दे दी।
सड़कों व बाजारों मेें छाया रहा सन्नाटा
दिसंबर के आखिरी सप्ताह का पहला दिन कंपकंपाने वाला साबित हुआ। तापमान के लुढ़कने से जिंदगी की रफ्तार पर असर दिखाई दिया। कामगार तबका हाड़-कपाऊ सर्दी के बीच जिंदगी की गाड़ी खींचता नजर आया। उधर कोहरे और शीतलहरी के चलते ज्यादातर लोग घरोें में कैद रहें। घरों से वहीं निकले जिन्हें जरूरी था। सड़कों पर वाहनों समेत राहगीरों की चहलकदमी न के बराबर दिखाई दी तो बाजारें भी खरीदारों के अभाव में साप्ताहिक बाजार की याद दिलातीं रहीं। चौक व कलक्टरगंज जैसे पॉश बाजारों में सन्नाटा दिखाई दिया।
अलाव के लिए कचरा, टायर तक जला रहे
कड़ाके की ठंड में अलाव बड़ा सहारा बनता है। अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम न होने पर लोग कचरे से लेकर टायर व ट्यूब तक जला रहे हैं। जिससे नगर पालिका कर्मियों का काम आसान हो गया है। सोमवार की सुबह ट्रेन पकड़ने के लिए आदर्श रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रास्ते के कूड़े को माचिस दिखाते दिखाई दिए। सिविल लाइन्स से लेकर जीटी रोड तक में जुगाड़ के ऐसे अलाव जगह-जगह जलते दिखाई दिए। शांतीनगर इलाके में वाहनों के टायर ट्यूब जला कर ठंड से बचने का प्रयास सारा दिन होता रहा।
बंदर सिकुड़े, थमा है उत्पात
सर्दी ने बंदरों के उत्पात पर पाबंदी लगाने का काम किया है। सारा दिन रिहाइशी इलाकों में धमाचौकड़ी करने वाले बंदर मौसम की मार से बेहाल नजर आ रहे हैं। सोमवार को आदर्श रेलवे स्टेशन के पब्लिक फुटओवर ब्रिज में स्कूल जा रहे बच्चों को बंदरों के झुंड से डर नहीं लगा।