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चंपतपुर गांव में बीस साल हो चुकी पांच हत्याएं!
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Sat, 30 Jul 2016 01:31 AM IST
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खागा में हत्या की पड़ताल करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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छिवलहा कस्बे के करीब चंपतपुर गांव की ग्रामीणों ने जो कहानी बयां की, उससे सभी चौंक पड़े। इस छोटे से गांव में हत्याकांड की यह पहली वारदात नहीं है। फर्क बस यह है कि इस घटना के बाद पुलिसिया कार्रवाई शुरू हुई है। इससे साफ है कि गांव में किसी का डर और दहशत का माहौल रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि चार साल पहले जंगल में एक ग्रामीण का शव बरामद हुआ था। इससे पहले गांव में चार हत्याएं हो चुकी हैं। किसी के घर के अंदर मौत हुई तो कहीं पेड़ पर शव लटकते मिले। सभी में हालात संदिग्ध और चर्चाएं कई तरह की रहीं। गांव और पीड़ितों परिवार पुलिस के झमेले से बचने के चक्कर में कभी एफआईआर दर्ज नहीं कराते रहे हैं। वारदातों के बाद ग्रामीणों में दहशत और खौफ का भी माहौल रहता है।
हत्या जैसे सनसनीखेज मामलों में भी शवों का अंतिम संस्कार कर देने के बाद सब कुछ सामान्य जीवन में बदल जाता रहा है। सालों बाद शुक्रवार को पुलिस गांव में किसी हत्या की तफ्तीश करने पहुंची। सीओ पुर्णेंदु सिंह ने बताया कि गांव के इतिहास को सुनकर वह भी हैरान हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले 20 से 25 सालों में कई हत्याएं हो चुकी हैं लेकिन उनकी एफआईआर नहीं की गई।
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कातिल का नहीं था लूटपाट का इरादा - सूरजकली के कत्ल की वारदात के पीछे लूटपाट का इरादा नहीं था। सूरजकली कान और नाक में सोने के जेवरात पहने थी। कत्ल करने वाले ने उसके जेवरातों में हाथ तक नहीं लगाया। घर का सामान भी बिखरा नहीं मिला। सब कुछ सामान्य रहा है, दरवाजे भी खुले रहे हैं।
शरीर में आधा दर्जन चोटों के निशान मिले- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर में छह जगह गंभीर चोट के निशान मिले हैं। हमला ठोस वस्तु से किया गया है। ईंट के अलावा डंडे से पिटाई के भी निशान मिले हैं। उसकी मौत सिर में चोट लगने की वजह से हुई है। सिर में चोट लगने की वजह से कोमा में चली गई थी। इसके बाद उसका दम टूट गया।
पूड़ियों से पता चला कत्ल देर शाम हुआ- वृद्धा सूरजकली पड़ोस के ब्राह्मण और पाल परिवारों में चूल्हा बर्तन का काम करती थी। वह खाना भी अक्सर उन्हीं के घर में खा लेती थी। ब्राह्मण परिवार के घर का काम खत्म करने के बाद घर जा रही थी तो परिवार के लोगों ने उससे खाने के लिए पूछा था, उसने गुरुवार रात पूड़ी बनाने और खाने की इच्छा जाहिर की और चली गई थी। वह अपने घर शाम छह बजे पहुंची थी।
घर में शुक्रवार सुबह पांच पूड़ियां रसोई में रखी मिली, जिससे पता चलता है कि उसने पूड़ियां बनाने के बाद खाने के लिए रखी होगी। आमतौर पर आठ से नौ बजे खाना खाती थी। इसी दौरान उसका कत्ल कर दिया गया। अंतिम समय में वह बनाई पूड़ियां भी नहीं खा सकी।
चंपतपुर में आकर बसा था परिवार- सूरजकली के पति की एक साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। उसका परिवार मूलरूप से छिवलहा कस्बे का रहने वाला है। परिवार के लोग पेशे से हल, कुदाल बनाने का काम करते थे। इसी वजह से चंपतपुर के ग्रामीणों ने सालों पहले सूरजकली के ससुर को यहीं रोक लिया था। परिवार गांव किनारे छोटे से मकान में रहता था।
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ग्रामीणों ने बताया कि चार साल पहले जंगल में एक ग्रामीण का शव बरामद हुआ था। इससे पहले गांव में चार हत्याएं हो चुकी हैं। किसी के घर के अंदर मौत हुई तो कहीं पेड़ पर शव लटकते मिले। सभी में हालात संदिग्ध और चर्चाएं कई तरह की रहीं। गांव और पीड़ितों परिवार पुलिस के झमेले से बचने के चक्कर में कभी एफआईआर दर्ज नहीं कराते रहे हैं। वारदातों के बाद ग्रामीणों में दहशत और खौफ का भी माहौल रहता है।
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हत्या जैसे सनसनीखेज मामलों में भी शवों का अंतिम संस्कार कर देने के बाद सब कुछ सामान्य जीवन में बदल जाता रहा है। सालों बाद शुक्रवार को पुलिस गांव में किसी हत्या की तफ्तीश करने पहुंची। सीओ पुर्णेंदु सिंह ने बताया कि गांव के इतिहास को सुनकर वह भी हैरान हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले 20 से 25 सालों में कई हत्याएं हो चुकी हैं लेकिन उनकी एफआईआर नहीं की गई।
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कातिल का नहीं था लूटपाट का इरादा - सूरजकली के कत्ल की वारदात के पीछे लूटपाट का इरादा नहीं था। सूरजकली कान और नाक में सोने के जेवरात पहने थी। कत्ल करने वाले ने उसके जेवरातों में हाथ तक नहीं लगाया। घर का सामान भी बिखरा नहीं मिला। सब कुछ सामान्य रहा है, दरवाजे भी खुले रहे हैं।
शरीर में आधा दर्जन चोटों के निशान मिले- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर में छह जगह गंभीर चोट के निशान मिले हैं। हमला ठोस वस्तु से किया गया है। ईंट के अलावा डंडे से पिटाई के भी निशान मिले हैं। उसकी मौत सिर में चोट लगने की वजह से हुई है। सिर में चोट लगने की वजह से कोमा में चली गई थी। इसके बाद उसका दम टूट गया।
पूड़ियों से पता चला कत्ल देर शाम हुआ- वृद्धा सूरजकली पड़ोस के ब्राह्मण और पाल परिवारों में चूल्हा बर्तन का काम करती थी। वह खाना भी अक्सर उन्हीं के घर में खा लेती थी। ब्राह्मण परिवार के घर का काम खत्म करने के बाद घर जा रही थी तो परिवार के लोगों ने उससे खाने के लिए पूछा था, उसने गुरुवार रात पूड़ी बनाने और खाने की इच्छा जाहिर की और चली गई थी। वह अपने घर शाम छह बजे पहुंची थी।
घर में शुक्रवार सुबह पांच पूड़ियां रसोई में रखी मिली, जिससे पता चलता है कि उसने पूड़ियां बनाने के बाद खाने के लिए रखी होगी। आमतौर पर आठ से नौ बजे खाना खाती थी। इसी दौरान उसका कत्ल कर दिया गया। अंतिम समय में वह बनाई पूड़ियां भी नहीं खा सकी।
चंपतपुर में आकर बसा था परिवार- सूरजकली के पति की एक साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। उसका परिवार मूलरूप से छिवलहा कस्बे का रहने वाला है। परिवार के लोग पेशे से हल, कुदाल बनाने का काम करते थे। इसी वजह से चंपतपुर के ग्रामीणों ने सालों पहले सूरजकली के ससुर को यहीं रोक लिया था। परिवार गांव किनारे छोटे से मकान में रहता था।