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सीबीआई की पूछताछ में तत्कालीन खनन अधिकारियों के छूटे पसीने
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फतेहपुर। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी सपा शासन काल के मौरंग पट्टा आवंटित करने वाले तत्कालीन खनन अधिकारियों से बुधवार को सीबीआई ने लंबी पूछताछ की। इनके अलावा पट्टेधारकों के भी बयान दर्ज किए गए हैं। सीबीआई का रुख काफी सख्त माना जा रहा है जिससे मामले में कई खनन माफिया फंस सकते हैं। सीबीआई टीम ने मंगलवार को तत्कालीन खनन अधिकारियों और पट्टधारकों को पूछताछ के लिए बुलाया था।
डाक बंगले गेस्ट हाउस में सीबीआई टीम के समक्ष करीब 11 बजे तत्कालीन खनन अधिकारी सुरेंद्र कुमार सिंह और एसके सिंह पहुंचे। यह खनन अधिकारी के पद पर 2012 से 2017 के बीच तैनात रहे हैं। उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ चली। सीबीआई टीम ने पट्टाधारक शिव सिंह और जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद से भी पूछताछ की। इस तरह से करीब शाम 5 बजे तक पूछताछ का सिलसिला चालू रहा। पट्टों के आवंटन पहली कड़ी पर खनन अधिकारी ही आते हैं। उनकी तैयार फाइल पर ही डीएम और शासन स्तर से स्वीकृत हुई थी। ई-टेंडरिंग प्रकिया लागू होने के बाद पट्टों के रिन्यूवल किस आधार पर किया गया यह सवाल सीबीआई ने खनन अधिकारियों के सामने रखा। खनन अधिकारियों ने कई तर्क रखे। सीबीआई टीम के गले अधिकारियों के तर्क नहीं उतरे हैं। सीबीआई टीम पट्टे से जुड़े और भी कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुला सकती है।
बता दें मामले में सीबीआई ने असोथर वार्ड जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद और उसके पार्टनर शिव सिंह के नाम पर 2012 में कोर्रा कनक और गुरुवल मौरंग खंड के पट्टों का नवीनीकरण किया गया था। जबकि कोर्ट ने पट्टों पर रोक लगा रखी थी। 2017 में अवैध पट्टों की जांच शुरू की गई थी।
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डाक बंगले गेस्ट हाउस में सीबीआई टीम के समक्ष करीब 11 बजे तत्कालीन खनन अधिकारी सुरेंद्र कुमार सिंह और एसके सिंह पहुंचे। यह खनन अधिकारी के पद पर 2012 से 2017 के बीच तैनात रहे हैं। उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ चली। सीबीआई टीम ने पट्टाधारक शिव सिंह और जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद से भी पूछताछ की। इस तरह से करीब शाम 5 बजे तक पूछताछ का सिलसिला चालू रहा। पट्टों के आवंटन पहली कड़ी पर खनन अधिकारी ही आते हैं। उनकी तैयार फाइल पर ही डीएम और शासन स्तर से स्वीकृत हुई थी। ई-टेंडरिंग प्रकिया लागू होने के बाद पट्टों के रिन्यूवल किस आधार पर किया गया यह सवाल सीबीआई ने खनन अधिकारियों के सामने रखा। खनन अधिकारियों ने कई तर्क रखे। सीबीआई टीम के गले अधिकारियों के तर्क नहीं उतरे हैं। सीबीआई टीम पट्टे से जुड़े और भी कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुला सकती है।
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बता दें मामले में सीबीआई ने असोथर वार्ड जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद और उसके पार्टनर शिव सिंह के नाम पर 2012 में कोर्रा कनक और गुरुवल मौरंग खंड के पट्टों का नवीनीकरण किया गया था। जबकि कोर्ट ने पट्टों पर रोक लगा रखी थी। 2017 में अवैध पट्टों की जांच शुरू की गई थी।
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