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सदर अस्पताल की पैथोलॉजी में बाहरी जांचें बंद
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फतेहपुर। सदर अस्पताल की पैथोलॉजी में शुक्रवार से अचानक बाहरी जांचें बंद हो गई। लोगों को जानकारी न होने पर दूर-दूर से आए पीड़ितों को मायूस होना पड़ा। कई लोग इसे लेकर काउंटर पर नाराज भी नजर आए। ऐसा कोरोना में बढ़ी जांच और स्टाफ (कार्यदायी संस्था) की हड़ताल के चलते हुआ है। केवल उन्हीं मरीजों की जांच की जा रही है जो अस्पताल में भर्ती हैं।
सरकारी अस्पताल की इस पैथोलॉजी में रोजाना तीन सौ के आसपास मरीज ब्लड, शुगर, बीपी, कोलस्ट्राल, किडनी, लीवर समेत कई प्रकार की जांच होती है। शुक्रवार को महज 35 मरीजों की ही जांच हो सकी। यह मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि तीन गंभीर प्रकृति के लोगों की भी जांच उनके फिजीशियन की सलाह पर हुई। इधर, सुबह से ही यहां पर जांच कराने वालों का जुटना शुरू हो गया था लेकिन ओपीडी का पर्चा स्वीकार नहीं किया जा रहा था। जिससे ओपीडी के दौरान कई मर्तबा तकरारें भी सुनने को मिलीं। जनरल रोगियों की जांचें न होने से जरूरतमंदों को प्राइवेट पैथोलॉजी का रुख करना पड़ा। प्राइवेट पैथोलॉजी में हर जांच महंगी है। सूत्रों की मानें तो यह स्थिति लैब के पांच सहयोगियों के हड़ताल मेें जाने की वजह से बनी है।
पैथोलॉजी के वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन एके सिंह ने बताया कि केवल अस्पताल में भर्ती रोगियों की ही जांच की गई है। भीड़ की अधिकता रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। हर कोई जांच कराना चाहता है जबकि एक बड़ी संख्या को इसकी जरूरत नहीं है।
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एक नजर::
रोजाना जांच को आने वाले मरीजों की संख्या- 300 से 350 तक
होने वाली जांचों की संख्या- 600 से 750 तक
गुरुवार हुई जांचें- 35
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सरकारी अस्पताल की इस पैथोलॉजी में रोजाना तीन सौ के आसपास मरीज ब्लड, शुगर, बीपी, कोलस्ट्राल, किडनी, लीवर समेत कई प्रकार की जांच होती है। शुक्रवार को महज 35 मरीजों की ही जांच हो सकी। यह मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि तीन गंभीर प्रकृति के लोगों की भी जांच उनके फिजीशियन की सलाह पर हुई। इधर, सुबह से ही यहां पर जांच कराने वालों का जुटना शुरू हो गया था लेकिन ओपीडी का पर्चा स्वीकार नहीं किया जा रहा था। जिससे ओपीडी के दौरान कई मर्तबा तकरारें भी सुनने को मिलीं। जनरल रोगियों की जांचें न होने से जरूरतमंदों को प्राइवेट पैथोलॉजी का रुख करना पड़ा। प्राइवेट पैथोलॉजी में हर जांच महंगी है। सूत्रों की मानें तो यह स्थिति लैब के पांच सहयोगियों के हड़ताल मेें जाने की वजह से बनी है।
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पैथोलॉजी के वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन एके सिंह ने बताया कि केवल अस्पताल में भर्ती रोगियों की ही जांच की गई है। भीड़ की अधिकता रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। हर कोई जांच कराना चाहता है जबकि एक बड़ी संख्या को इसकी जरूरत नहीं है।
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रोजाना जांच को आने वाले मरीजों की संख्या- 300 से 350 तक
होने वाली जांचों की संख्या- 600 से 750 तक
गुरुवार हुई जांचें- 35