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Fatehpur News: आयुर्वेदिक अस्पताल...भर्ती नहीं किए जाते मरीज
Tue, 12 Mar 2024 11:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:08 AM IST
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फोटो-30- शहर के आयुर्वेदिक अस्पताल के खाली बेड।
- राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का हाल, 25 बेड की जगह सिर्फ पांच बेड हैं
- 2015 से संचालित है अस्पताल, दोपहर तीन बजे के बाद लटकता है ताला
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। कोविड के बाद से लोगों में आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्व बढ़ा है, लेकिन इलाज मुहैया कराने के लिए शहर का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बेमकसद साबित हो रहा है। हैरत की बात यह है कि अस्पताल में आज तक एक भी मरीज को भर्ती नहींं किया गया।
हाल यह है कि नौ वर्षों से संचालित 25 बेडाें के अस्पताल में सिर्फ पांच बेड हैं। वहीं, स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता। ोरोजाना दोपहर बाद अस्पताल का संचालन बंद हो जाता है।
शहर के पीरनपुर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में रोजाना करीब 50 मरीज पहुंचते हैं। एक साल में करीब 14 हजार मरीजों का इलाज किया जा चुका है। संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल बदहाली के दौर से गुजर रहा है। अस्पताल में 25 बेड स्वीकृति हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती करने का भी प्रावधान है, लेकिन 2015 से संचालित अस्पताल में अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुए।
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रखरखाव के अभाव में बेड भी खस्ताहाल हो चुके हैं। अस्पताल सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे संचालित है। जबकि यहां दो डॉक्टरों समेत सात कर्मचारियों की स्वीकृति है। मौजूदा समय यहां एक डॉक्टर, एक नर्स, दो वार्डबॉय, एक चपरासी और एक सफाईकर्मी है। संसाधन और डॉक्टरों के कमी से मरीजों को शल्य और पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा नहीं मिल पाती।
दो ग्रामीण अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर
जिले में खागा, बिंदकी, ललौली, औंग और थरियांव सहित 23 ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इसके अलावा पांच यूनानी अस्पताल हैं। सभी अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज आते हैं, लेकिन दतौली और थरियांव अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में दोनों जगह के लोग जिला अस्पताल के आयुष विंग उपचार के लिए आते हैं।
-- -कोट्स-- --
मुख्यालय से बेड और स्टाफ की मांग की गई है। दिन में मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है। स्टाफ पूरे होने के बाद मरीजों को पूरी तरह से भर्ती करने की सुविधा मिलेगी। - डॉ. सुधीर रंजन, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी।
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- राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का हाल, 25 बेड की जगह सिर्फ पांच बेड हैं
- 2015 से संचालित है अस्पताल, दोपहर तीन बजे के बाद लटकता है ताला
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। कोविड के बाद से लोगों में आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्व बढ़ा है, लेकिन इलाज मुहैया कराने के लिए शहर का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बेमकसद साबित हो रहा है। हैरत की बात यह है कि अस्पताल में आज तक एक भी मरीज को भर्ती नहींं किया गया।
हाल यह है कि नौ वर्षों से संचालित 25 बेडाें के अस्पताल में सिर्फ पांच बेड हैं। वहीं, स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता। ोरोजाना दोपहर बाद अस्पताल का संचालन बंद हो जाता है।
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शहर के पीरनपुर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में रोजाना करीब 50 मरीज पहुंचते हैं। एक साल में करीब 14 हजार मरीजों का इलाज किया जा चुका है। संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल बदहाली के दौर से गुजर रहा है। अस्पताल में 25 बेड स्वीकृति हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती करने का भी प्रावधान है, लेकिन 2015 से संचालित अस्पताल में अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुए।
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रखरखाव के अभाव में बेड भी खस्ताहाल हो चुके हैं। अस्पताल सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे संचालित है। जबकि यहां दो डॉक्टरों समेत सात कर्मचारियों की स्वीकृति है। मौजूदा समय यहां एक डॉक्टर, एक नर्स, दो वार्डबॉय, एक चपरासी और एक सफाईकर्मी है। संसाधन और डॉक्टरों के कमी से मरीजों को शल्य और पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा नहीं मिल पाती।
दो ग्रामीण अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर
जिले में खागा, बिंदकी, ललौली, औंग और थरियांव सहित 23 ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इसके अलावा पांच यूनानी अस्पताल हैं। सभी अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज आते हैं, लेकिन दतौली और थरियांव अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में दोनों जगह के लोग जिला अस्पताल के आयुष विंग उपचार के लिए आते हैं।
मुख्यालय से बेड और स्टाफ की मांग की गई है। दिन में मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है। स्टाफ पूरे होने के बाद मरीजों को पूरी तरह से भर्ती करने की सुविधा मिलेगी। - डॉ. सुधीर रंजन, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी।