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घर के तहखाने में बना रहे थे असलहे
अमर उजाला फतेहपुर
Updated Sun, 12 Jul 2015 12:05 AM IST
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शहर के जयराम नगर इलाके में कई वर्षों से संचालित असलहा फैक्ट्री पकड़ी गई है। इलाके में यह काम बेहद गुप्त तरीके से चल रहा था। यहां तक कि घर के अंदर तहखाना में फैक्ट्री बनाई गई थी। क्राइम ब्रांच और शहर पुलिस की संयुक्त छापेमारी में असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। मौके से टीम ने असलहा बनाने वाले मिस्त्री और सप्लायरों समेत तीन लोगों को दबोचा है। यहां के बनाए गए असलहों की सप्लाई पड़ोसी जनपदों तक होती थी।
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पुलिस लाइन में एसपी अनीस अहमद अंसारी ने शनिवार को बताया कि अपराधों की रोकथाम के लिए अवैध असलहों की अपराधियों तक सप्लाई रोकने के लिए सीओ सिटी वंदना सिंह को लगाया गया था। सटीक सूचना पर सीओ सिटी, चौकी इंचार्ज आबूनगर धीरेंद्र सिंह और क्राइम ब्रांच की इंटेलीजेंस विंग प्रभारी मनोज रघुवंशी, राजेश सिंह, बिपिन सिंह, रावेंद्र प्रताप और मुरली सिंह ने जयराम नगर इलाके में नरेश विश्वकर्मा के घर पर छापेमारी की। घर के अंदर नरेश ने एक दस बाई दस के कमरे का तहखाना बनाए था। तहखाने का रास्ता दो बाई दो करीब था। इसी तहखाने के अंदर असलहे की फैक्ट्री पकड़ी गई है। तहखाने की वजह से पड़ोसियों को भी असलहा फैक्ट्री संचालित होने की भनक तक नहीं लगी थी। फैक्ट्री के बनाए असलहे रामनरेश मौर्या, सप्लाई करता था। सप्लायर ने जिले के अलावा बांदा, कानपुर, कौशांबी तक अपना जाल बिछाया था। सप्लायर को सोनू सिंह पुत्र रजोली सिंह निवासी कु सुंभी थाना असोथर के साथ को कट्टा बेंचते पकड़ा गया है। फैक्ट्री से आधा दर्जन 315 बोर के अधबने तमंचे, एक रायफल 315 बोर, 5 अधबने तमंचे, दो कारतूस के खोखे, वेल्डिंग मशीन, इलेक्ट्रानिक ग्राइंडर, लोहे का ठीहा, ड्रील मशीन, तमंचा बनाने की स्प्रिंग, फायरिंग पिन, ट्रिगर गार्ड, ट्रिगर, बाडी प्लेट समेत तमाम सामाग्री बरामद हुई है।
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पुलिस की शिथिलता का उठाया फायदा
जिला पुलिस जयराम नगर में सालों से संचालित फैक्ट्री को पकड़ने के बाद खुद ही अपनी पीठ थपथपाने में जुटी है। जबकि पुलिस के लिए फैक्ट्री का सालों से संचालन बड़ी नाकामी को साबित कर रहा है। क्योंकि करीब तीन साल पहले एसटीएफ ने छापेमारी करके फैक्ट्री का भांडाफोड़ कर दिया था। जिला पुलिस के लिए नाकामी की बात यह है कि पुलिस टीमें तीन साल से भांडाफोड़ के बाद भी र्सो रही है। इन्होंने दोबारा फैक्ट्री के संचालन पर नजर दौड़ाना तक ठीक नहीं समझा। पुलिस की शिथलिता के चलते फैक्ट्री का संचालन धड़ल्ले से होता रहा है। तीन साल पहले एसटीएफ की छापेमारी में एक युवक भोला पकड़ा गया था।
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