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नहर में पानी आए तो शुरू हो धान की रोपाई
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फतेहपुर। नहर में पानी न आने से किसान खेतीबाड़ी के काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि नहर में पानी आए तो धान की रोपाई शुरू की जाए। तीन महीने से नहर बंद है। जून का महीना भी आधे से अधिक बीत गया है, लेकिन अभी तक नहरों में पानी नहीं आया है।
जिले की रामगंगा नहर, निचली गंगा नहर और जरौली पंप कैनाल से बड़े पैमाने पर जिले किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। खरीफ सीजन में करीब 75 हजार हेक्टेयर खेती में किसान नहर की सिंचाई के भरोसे फसल तैयार करते हैं। इसमें 22 हजार हेक्टेयर रामगंगा व 53 हजार हेक्टेयर निचली गंगा नहर से फसलों की सिंचाई की जाती है। निचली गंगा नहर में ही जरौली पंप कैनाल का पानी आता है।
रबी के सीजन में 15 मार्च को नहरों के पानी को बंद कर दिया गया था। धान की नर्सरी को किसानों से जैसे-तैसे तैयार कर ली है, लेकिन अब रोपाई के लिए खेतों में पानी का भराव होना जरूरी है। इसके लिए किसान नहर में पानी आने की आस लगाए हुए हैं।
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जिले की रामगंगा नहर, निचली गंगा नहर और जरौली पंप कैनाल से बड़े पैमाने पर जिले किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। खरीफ सीजन में करीब 75 हजार हेक्टेयर खेती में किसान नहर की सिंचाई के भरोसे फसल तैयार करते हैं। इसमें 22 हजार हेक्टेयर रामगंगा व 53 हजार हेक्टेयर निचली गंगा नहर से फसलों की सिंचाई की जाती है। निचली गंगा नहर में ही जरौली पंप कैनाल का पानी आता है।
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रबी के सीजन में 15 मार्च को नहरों के पानी को बंद कर दिया गया था। धान की नर्सरी को किसानों से जैसे-तैसे तैयार कर ली है, लेकिन अब रोपाई के लिए खेतों में पानी का भराव होना जरूरी है। इसके लिए किसान नहर में पानी आने की आस लगाए हुए हैं।
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