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मौसम के बदलाव से कम हो सकती है गेहूं की पैदावार
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फतेहपुर। जिले के बड़े हिस्से में होने वाली गेहूं की फसल को तेज धूप झुलसाने लगी है। तापमान सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो गया है। कृषि वैज्ञानिक भी मान रहे हैं कि तापमान अगर ऐसे ही चढ़ता गया तो पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक कम हो सकती है। फसल को तेज धूप से बचाने के लिए सिंचाई बढ़ाने और खेत में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
जिले में एक लाख 81 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल की गई है। जिन किसानों ने पहले गेहूं की बुआई की है, उनमें बालियां निकल आई हैं और जो गेहूं बाद में बोया गया है, उनमें तो अभी बालियां भी नहीं निकली हैं। गेहूं की फसल में अच्छी पैदावार के लिए इस समय अधिकतम 26 से 28 डिग्री तापमान की जरूरत होती है लेकिन तेज धूप के कारण तापमान 33-34 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में गेहूं की खेती करने वाले किसानों में पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बढ़ते तापमान के बावजूद अगर पूर्वा हवा चलती है, तो गेहूं की फसल को खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन पछुवा हवा चलने लगी तो बालियों के अंदर का दूध बहुत ही जल्द सूख जाएगा। गेहूं का दाना सिकुड़ जाएगा। इससे गेहूं की पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक नुकसान होगा। जबकि कृषि विभाग ने इस बार जिले में 45 से 55 क्विंटल एक हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार का आंकलन किया है, जो मौसम को देखते हुए पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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तापमान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इससे गेहूं की फसल को बचाने के लिए किसान खेत में हल्की सिंचाई करें। नमी हमेशा बनाए रखें। ऐसे ही मौसम रहा तो गेहूं के पैदावार का जो आंकलन किया गया है, उसमें 10 से 15 क्विंटल पैदावार घटने की संभावना है।
-- बृजेश सिंह, उप कृषि निदेशक।
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जिले में एक लाख 81 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल की गई है। जिन किसानों ने पहले गेहूं की बुआई की है, उनमें बालियां निकल आई हैं और जो गेहूं बाद में बोया गया है, उनमें तो अभी बालियां भी नहीं निकली हैं। गेहूं की फसल में अच्छी पैदावार के लिए इस समय अधिकतम 26 से 28 डिग्री तापमान की जरूरत होती है लेकिन तेज धूप के कारण तापमान 33-34 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में गेहूं की खेती करने वाले किसानों में पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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बढ़ते तापमान के बावजूद अगर पूर्वा हवा चलती है, तो गेहूं की फसल को खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन पछुवा हवा चलने लगी तो बालियों के अंदर का दूध बहुत ही जल्द सूख जाएगा। गेहूं का दाना सिकुड़ जाएगा। इससे गेहूं की पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक नुकसान होगा। जबकि कृषि विभाग ने इस बार जिले में 45 से 55 क्विंटल एक हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार का आंकलन किया है, जो मौसम को देखते हुए पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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तापमान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इससे गेहूं की फसल को बचाने के लिए किसान खेत में हल्की सिंचाई करें। नमी हमेशा बनाए रखें। ऐसे ही मौसम रहा तो गेहूं के पैदावार का जो आंकलन किया गया है, उसमें 10 से 15 क्विंटल पैदावार घटने की संभावना है।
-- बृजेश सिंह, उप कृषि निदेशक।