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शिद्दत के साथ सामाजिक सेवा में लगे हैं यह लोग
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Fri, 14 Aug 2015 12:34 AM IST
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फिरंगियों की जंजीर से मुक्ति दिलाने के लिए हमारे आजादी के नायकों ने अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। आजादी के 68 बरस बाद भी कई बार हम आप संसाधनों व अवसरों की कमी बता अपने दायित्वों से पीछे हट जाते हैं, लेकिन आज भी में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो शिद्दत के साथ समाज सेवा में लगे हैं। कोई गरीब लड़कियों के हाथ पीले कराने में मददगार साबित हो रहा है, तो कोई अपने निजी खर्चे से दुर्घटनाग्रस्त लोगों को अपने वाहन से अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहा है। इतना ही नहीं लावारिस लाशों को कंधा देकर लोग समाज में सेवा भाव की अमिट छाप छोड़ रहे हैं।
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920 गरीब लड़कियों के कराए हाथ पीले
शहर के रहने वाले प्रमुख व्यवसायी गोपाल गुप्ता अब तक 920 गरीब लड़कियों के हाथ पीले कराने में सहयोग कर चुके हैं। पूर्व मंत्री राधेश्याम गुप्ता के दूसरे नंबर के पुत्र गोपाल गुप्ता गरीब लड़की की शादी का निमंत्रण कार्ड अपने निजी संसाधनों से सत्यापन कराते हैं और अत्यंत गरीब होने की पुष्टि होने पर एक बोरी आटा, एक टीन डालडा, 25 किलो चीनी, एक साड़ी, ब्लाउज के साथ 2100 रुपये की आर्थिक मदद करते हैं। इतना ही नहीं उनका प्रयास होता है कि अपने निजी वाहन से सामाग्री लड़की के घर पहुंचाई जाए।
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समाज सेवी अशोक तपस्वी अब तक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 300 लोगों की जान बचा चुके हैं। स्व. पिता रामेश्वर सिंह तपस्वी की मौत के बाद उनकी याद में उन्होंने 2007 में निजी एंबुलेंस खरीदा था। बांदा सागर रोड पर स्थित निजी आवास में यह एंबुलेंस हर समय उपलब्ध रहती है। अब तक पौने छह सौ लोगों को अस्पताल पहुंचा चुके हैं, जिनमें 150 लोगों की अस्पताल पहुंचने पर मौत हो चुकी है। गंभीर रूप से तीन सौ घायलों को जिला अस्पताल से कानपुर रेफर किया गया, जिससे उनकी जान बची। यह काम समाज सेवी अपने हाथों से करते हैं। वह स्वयं घायल को वाहन में लादने से लेकर अस्पताल पहुंचाने तक का काम स्वयं करते हैं।
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लावारिस लाशों का कराते अंतिम संस्कार
नगरीय विकास समिति लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की बीड़ा उठाए हुए है। पिछले ढाई वर्षों में अब तक आधा सैकड़ा लावारिश शवों का अंतिम संस्कार नगरीय विकास समिति द्वारा कराया जा चुका है। समिति के अध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कराया जाता है चाहे वह जिस जाति धर्म की हो। हिंदू धर्म के शवों का अंतिम संस्कार वह स्वयं करते हैं जबकि मुस्लिम धर्म की लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार शहर काजी द्वारा कराया जाता है। बताया कि जिले में कालका रेल हादसा होने के बाद जिस तरह से लावारिस लाशों की बेकदरी की उससे समिति के सचिव हाजी रजा का मन खिन्न हो गया।
महिलाओं के हक की लड़ रहीं लड़ाई
राज्य महिला आयोग की सदस्य नफीसा बानों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। बचपन में मां की मौत के बाद अभाव में जीवन यापन करने वाली नफीसा बानों बचपन से गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने में आगे रही। किशोरा अवस्था में नगर पालिका ने दो दर्जन गरीबों की झोपड़िया ध्वस्त करा दी थी। इस लड़ाई से नफीसा का नाम समाज सेवियों की श्रेणी में आया। इसके बाद हर गरीब एवं दबी कुचली महिला की लड़ाई में युवती ने बढ़चढ़कर भागीदारी निभाई। इतना नहीं गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई में भी मदद करना इनका सबब बना है। प्रदेश सरकार ने नफीसा का समाज सुधारक जज्बा देखकर राज्य महिला आयोग का सदस्य बना दिया है। सदस्य के रूप में अब यह दबी कुचली महिलाओं की समस्याएं सुनकर अधिकारियों से निस्तारण कराती हैं।
स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां तेज
बिंदकी। तहसील क्षेत्र में स्वतंतत्रा दिवस को धूम-धाम से मनाए जाने की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई हैं। शहीद स्थल बावनी इमली सहित, सरकारी, गैरसरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, में आयोजित होने वाले कार्यक्रमाें के लिए आयोजक रूप रेखा तैयार करने में जुट गए है। तहसील मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर शहीद स्थल बावनी इमली में वन विभाग के कर्मचारी तैयारी में लग गए हैं। इस वर्ष भी अमर शहीद महानक्रांतिकारी जोधा सिंह अटैय्या की याद में शनिवार को विशाल मेला लगेगा। जहां प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न राजनैतिक दलों, संगठनों के लोग पहुंच कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यहां होने वाली सभा में जहां वक्ता देश की आजाद कराने वाले महान क्रांतिकारियों की वीर गाथाओं को सुनाकर इतिहास को ताजा करेंगे, वहीं विद्यालयों के नन्हे मुन्ने बच्चे देश भक्ति पर आधारित नाट्य कलाओं का प्रदर्शन करके लोगों को भाव विभोर कर देंगे।