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बैंक हड़ताल से दो अरब से अधिक का प्रभावित हुआ लेनदेन प्रभावित
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आईटीआई रोड स्थित बड़ौदा बैंक में प्रदर्शन करते बैंक कर्मी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारी सोमवार को हड़ताल पर रहे। उन्होंने बैंकों के बाहर प्रदर्शन किया।
इससे करीब दो अरब से अधिक का लेनदेन प्रभावित हुआ। वहीं सुबह बैंक पहुंचे लोगों को हड़ताल का पता चला और उन्हें जरूरत के रुपये न मिलने की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियंस के आवाहन पर दो दिवसीय हड़ताल का सोमवार को पहला दिन था।
बैंक कर्मचारियों ने बैंकों के सामने निजीकरण के पोस्टर, बैनर लगाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
आईटीआई रोड की बीओबी शाखा में निजीकरण का विरोध किया और पूरे दिन लेनदेन बंद रखा। जयराम नगर के ग्रामीण बैंक में हड़ताल करके सरकार के निजीकरण का विरोध किया।
ऑल इडिया रिजनल रूरर्स बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन अध्यक्ष अभिषेक पाठक ने आईटीआई रोड के आरएम कार्यालय में धरना प्रदर्शन और कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करना चाह रही हैं।
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इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संरक्षक कृष्णचंद्र ने कहा कि ग्रामीण बैंक की 43 शाखाओं में हड़ताल रही।
निजीकरण के अलावा बैंकिंग उद्योग में लागू की गई वेतन वृद्धि में 11वें वेतन के समझौता को भारत सरकार ने अभी तक ग्रामीण बैंकों में लागू नहीं किया गया है।
इसका आदेश जारी किया जाए। प्रदर्शन करने वालों में योगेश त्रिपाठी, ऋषि गुप्ता, बृजबिहारी त्रिवेदी, अभिषेक पाठक, सुखसागर, देवराज वर्मा, रामप्रकाश तिवारी, मेघा जैन, स्वेता प्रसाद, चंद्रभान मौजूद रहे।
लीड बैंक मैनेजर वीडी मिश्रा ने कहा कि एक दिन की बैंक हड़ताल से करीब दो अरब का लेनदेन प्रभावित हुआ है। मंगलवार को अभी और बैंक कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल करेंगे।
एटीम से नहीं निकला रुपया
शनिवार और रविवार अवकाश, फिर दो दिन की बैंक हड़ताल ने लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। सोमवार को शहर के सभी एटीएम शोपीस बने रहे। किसी बैंक से लेनदेन नहीं हुआ। लोग अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाते रहे।
देवीगंज निवासी शुभम सिंह ने बताया कि रविवार से एटीएम में रुपये नहीं हैं। सोमवार को उम्मीद थी कि बैंक खुलेगा और जरूरत के लिए रुपये मिल जाएंगे।
उमरगहना के पिंटू सिंह ने कहा कि रुपये निकालने के लिए गांव से बैंक आए थे। बैंक पहुंचे तो यहां हड़ताल का पता चला। फिर एटीएम से रुपया निकलने के लिए गए थे, लेकिन वहां भी रुपया नहीं मिला।
हड़ताल से बैंकों में बंद रहा ताला
खागा। निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल के तहत सभी बैंकों के कर्मचारी सोमवार शुरू की। नगर के स्टेट बैंक, बीओबी, पंजाब नेशनल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी की शाखाएं बंद रहीं।
बीओबी के मैनेजर संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि 80 से 90 लाख रोजाना जमा होता है और 50 से 60 लाख रुपयों का भुगतान किया जाता था।
स्टेट बैंक के मैनेजर प्रदीप यादव ने बताया कि लगभग एक करोड़ रुपए जमा और निकासी होती थी। इसी प्रकार किशनपुर कस्बा की बीओबी, दरियामऊ की बीओबी में हड़ताल रही। (संवाद)
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इससे करीब दो अरब से अधिक का लेनदेन प्रभावित हुआ। वहीं सुबह बैंक पहुंचे लोगों को हड़ताल का पता चला और उन्हें जरूरत के रुपये न मिलने की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियंस के आवाहन पर दो दिवसीय हड़ताल का सोमवार को पहला दिन था।
बैंक कर्मचारियों ने बैंकों के सामने निजीकरण के पोस्टर, बैनर लगाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
आईटीआई रोड की बीओबी शाखा में निजीकरण का विरोध किया और पूरे दिन लेनदेन बंद रखा। जयराम नगर के ग्रामीण बैंक में हड़ताल करके सरकार के निजीकरण का विरोध किया।
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ऑल इडिया रिजनल रूरर्स बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन अध्यक्ष अभिषेक पाठक ने आईटीआई रोड के आरएम कार्यालय में धरना प्रदर्शन और कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण करना चाह रही हैं।
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इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संरक्षक कृष्णचंद्र ने कहा कि ग्रामीण बैंक की 43 शाखाओं में हड़ताल रही।
निजीकरण के अलावा बैंकिंग उद्योग में लागू की गई वेतन वृद्धि में 11वें वेतन के समझौता को भारत सरकार ने अभी तक ग्रामीण बैंकों में लागू नहीं किया गया है।
इसका आदेश जारी किया जाए। प्रदर्शन करने वालों में योगेश त्रिपाठी, ऋषि गुप्ता, बृजबिहारी त्रिवेदी, अभिषेक पाठक, सुखसागर, देवराज वर्मा, रामप्रकाश तिवारी, मेघा जैन, स्वेता प्रसाद, चंद्रभान मौजूद रहे।
लीड बैंक मैनेजर वीडी मिश्रा ने कहा कि एक दिन की बैंक हड़ताल से करीब दो अरब का लेनदेन प्रभावित हुआ है। मंगलवार को अभी और बैंक कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल करेंगे।
एटीम से नहीं निकला रुपया
शनिवार और रविवार अवकाश, फिर दो दिन की बैंक हड़ताल ने लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। सोमवार को शहर के सभी एटीएम शोपीस बने रहे। किसी बैंक से लेनदेन नहीं हुआ। लोग अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाते रहे।
देवीगंज निवासी शुभम सिंह ने बताया कि रविवार से एटीएम में रुपये नहीं हैं। सोमवार को उम्मीद थी कि बैंक खुलेगा और जरूरत के लिए रुपये मिल जाएंगे।
उमरगहना के पिंटू सिंह ने कहा कि रुपये निकालने के लिए गांव से बैंक आए थे। बैंक पहुंचे तो यहां हड़ताल का पता चला। फिर एटीएम से रुपया निकलने के लिए गए थे, लेकिन वहां भी रुपया नहीं मिला।
हड़ताल से बैंकों में बंद रहा ताला
खागा। निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल के तहत सभी बैंकों के कर्मचारी सोमवार शुरू की। नगर के स्टेट बैंक, बीओबी, पंजाब नेशनल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी की शाखाएं बंद रहीं।
बीओबी के मैनेजर संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि 80 से 90 लाख रोजाना जमा होता है और 50 से 60 लाख रुपयों का भुगतान किया जाता था।
स्टेट बैंक के मैनेजर प्रदीप यादव ने बताया कि लगभग एक करोड़ रुपए जमा और निकासी होती थी। इसी प्रकार किशनपुर कस्बा की बीओबी, दरियामऊ की बीओबी में हड़ताल रही। (संवाद)