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Fatehpur News: गंगौली में विकास कार्यों में 8.52 लाख का गबन
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फतेहपुर। विकास खंड अमौली के ग्राम सभा गंगौली में कराए गए विकास कार्यों की मंडलीय टीएसी जांच में 8,52,676 रुपये का गबन सामने आया है। टीम के मुताबिक कार्य कागजों पर पूरे दिखाए गए हैं लेकिन जमीन पर ये अधूरे, घटिया और कई जगह हुए भी नहीं थे। इस मामले में प्रधान, सचिव और तकनीकी स्टाफ पर शिकंजा कसा गया है।
शिकायतकर्ता विमलेश कुमार पुत्र रमेश की शिकायत पर टीम ने जांच की। टीम हरिजन बस्ती में नाली निर्माण देखने पहुंची तो अनियमितता मिली। नाली की मोटाई निर्धारित मानक से काफी कम मिली। कमजोर सीमेंट और बालू से बनाई गई दीवारें हाथ लगाते ही झड़ने लगीं। लंबाई का बड़ा हिस्सा अधूरा था। भुगतान अभिलेखों में सौ फीसदी दिखाया गया था।
गंगौली-पूर्व टोला मार्ग की खड़ंजा सड़क भी जांच में फेल हो गई। पत्थरों की गुणवत्ता बेहद हल्की निकली और खड़ंजे में जगह-जगह बड़े गैप छोड़ दिए गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ ही दिनों में खड़ंजा उखड़ने लगा था। इसके विपरीत, रजिस्टर में पूरा भुगतान और पूर्ण कार्य दर्ज था।
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पंचायत भवन के पास बनी पटरी का हाल भी इसी तरह था। नीचे की लेयर में मिट्टी का समुचित समतलीकरण नहीं किया गया था। ऊपर की परत में केवल बालू डालकर काम पूरा कर दिया गया था। बारिश के बाद पटरी धंसने लगी। इससे उसकी गुणवत्ता की पोल खुल गई।
शिव मंदिर के पास इंटरलॉकिंग सड़क की तस्वीर तो और भी खराब दिखी। टाइल्स मानक मोटाई से कम थीं और जोड़ भरने की प्रक्रिया अधूरी छोड़ दी गई थी। सड़क का बड़ा हिस्सा कच्चा ही रह गया था। कागजों में इस कार्य को पूरा बताते हुए भुगतान कर दिया गया था।
हैंडपंप चबूतरे बनाने में भी बड़े खेल का खुलासा हुआ। कई चबूतरे बने ही नहीं थे फिर भी उनके भुगतान दर्ज किए गए थे। जहां चबूतरे बने थे, वहां ऊंचाई, फिनिशिंग और मजबूती में गंभीर खामियां मिलीं। जांच टीम ने इसे स्पष्ट अनियमितता बताया।
सबसे चौंकाने वाली गड़बड़ी मस्टर रोल और भुगतान रजिस्टर में मिली। मजदूरों के नाम पर ऐसे दिनों की प्रविष्टियां दर्ज थीं। जब उस जगह पर कोई काम हुआ ही नहीं। कई हस्ताक्षर फर्जी थे। तारीख बदलने और ओवरराइटिंग के प्रमाण मिलने के बाद रिकॉर्ड को अविश्वसनीय माना गया।
इन सभी गड़बड़ियों की जड़ में जिन नामों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है वे हैं तत्कालीन प्रधान रामाश्रय, ग्राम पंचायत सचिव संदीप कुमार, तकनीकी सहायक शिवकुमार, रोजगार सेवक संतोष वर्मा और निर्माण कार्य संभालने वाला ठेकेदार पिंटू सिंह।
इनसे इतनी होगी वसूली
प्रधान रामाश्रय पर 3,36,929 रुपये की वसूली होगी। इन पर नाली, खड़ंजा, पटरी मरम्मत और इंटरलॉकिंग कार्यों में अनियमित भुगतान कई जगह फर्जी मस्टर रोल लगाने का आरोप है। ग्राम पंचायत सचिव संदीप कुमारपर 3,36,929 की रिकवरी बनी है। इन पर दस्तावेज़ में हेराफेरी, मस्टर रोल में गड़बड़ी, भुगतान नियमों की अनदेखी कई कार्यों में मुख्य दोषी माना गया है। तकनीकी सहायक शिवकुमार पर 1,78,818 रुपये की रिकवरी बनी, इन पर मापी में अनियमितताएं, कम मोटाई, कम लंबाई, पुराने कार्यों को नया दिखाकर भुगतान, तकनीकी लापरवाही का आरोप है।
टीएसी की जांच के बाद अब आरोपियों से रिकवरी करने का आदेश जारी किया गया है। यदि वह पैसा जमा नहीं करते हैं तो सरकारी कर्मचारी के वेतन और प्रधान पर आरसी काट कर पैसा जमा कराया जाएगा।
- करुणाकर अदीब, उपायुक्त मनरेगा।
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शिकायतकर्ता विमलेश कुमार पुत्र रमेश की शिकायत पर टीम ने जांच की। टीम हरिजन बस्ती में नाली निर्माण देखने पहुंची तो अनियमितता मिली। नाली की मोटाई निर्धारित मानक से काफी कम मिली। कमजोर सीमेंट और बालू से बनाई गई दीवारें हाथ लगाते ही झड़ने लगीं। लंबाई का बड़ा हिस्सा अधूरा था। भुगतान अभिलेखों में सौ फीसदी दिखाया गया था।
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गंगौली-पूर्व टोला मार्ग की खड़ंजा सड़क भी जांच में फेल हो गई। पत्थरों की गुणवत्ता बेहद हल्की निकली और खड़ंजे में जगह-जगह बड़े गैप छोड़ दिए गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ ही दिनों में खड़ंजा उखड़ने लगा था। इसके विपरीत, रजिस्टर में पूरा भुगतान और पूर्ण कार्य दर्ज था।
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पंचायत भवन के पास बनी पटरी का हाल भी इसी तरह था। नीचे की लेयर में मिट्टी का समुचित समतलीकरण नहीं किया गया था। ऊपर की परत में केवल बालू डालकर काम पूरा कर दिया गया था। बारिश के बाद पटरी धंसने लगी। इससे उसकी गुणवत्ता की पोल खुल गई।
शिव मंदिर के पास इंटरलॉकिंग सड़क की तस्वीर तो और भी खराब दिखी। टाइल्स मानक मोटाई से कम थीं और जोड़ भरने की प्रक्रिया अधूरी छोड़ दी गई थी। सड़क का बड़ा हिस्सा कच्चा ही रह गया था। कागजों में इस कार्य को पूरा बताते हुए भुगतान कर दिया गया था।
हैंडपंप चबूतरे बनाने में भी बड़े खेल का खुलासा हुआ। कई चबूतरे बने ही नहीं थे फिर भी उनके भुगतान दर्ज किए गए थे। जहां चबूतरे बने थे, वहां ऊंचाई, फिनिशिंग और मजबूती में गंभीर खामियां मिलीं। जांच टीम ने इसे स्पष्ट अनियमितता बताया।
सबसे चौंकाने वाली गड़बड़ी मस्टर रोल और भुगतान रजिस्टर में मिली। मजदूरों के नाम पर ऐसे दिनों की प्रविष्टियां दर्ज थीं। जब उस जगह पर कोई काम हुआ ही नहीं। कई हस्ताक्षर फर्जी थे। तारीख बदलने और ओवरराइटिंग के प्रमाण मिलने के बाद रिकॉर्ड को अविश्वसनीय माना गया।
इन सभी गड़बड़ियों की जड़ में जिन नामों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है वे हैं तत्कालीन प्रधान रामाश्रय, ग्राम पंचायत सचिव संदीप कुमार, तकनीकी सहायक शिवकुमार, रोजगार सेवक संतोष वर्मा और निर्माण कार्य संभालने वाला ठेकेदार पिंटू सिंह।
इनसे इतनी होगी वसूली
प्रधान रामाश्रय पर 3,36,929 रुपये की वसूली होगी। इन पर नाली, खड़ंजा, पटरी मरम्मत और इंटरलॉकिंग कार्यों में अनियमित भुगतान कई जगह फर्जी मस्टर रोल लगाने का आरोप है। ग्राम पंचायत सचिव संदीप कुमारपर 3,36,929 की रिकवरी बनी है। इन पर दस्तावेज़ में हेराफेरी, मस्टर रोल में गड़बड़ी, भुगतान नियमों की अनदेखी कई कार्यों में मुख्य दोषी माना गया है। तकनीकी सहायक शिवकुमार पर 1,78,818 रुपये की रिकवरी बनी, इन पर मापी में अनियमितताएं, कम मोटाई, कम लंबाई, पुराने कार्यों को नया दिखाकर भुगतान, तकनीकी लापरवाही का आरोप है।
टीएसी की जांच के बाद अब आरोपियों से रिकवरी करने का आदेश जारी किया गया है। यदि वह पैसा जमा नहीं करते हैं तो सरकारी कर्मचारी के वेतन और प्रधान पर आरसी काट कर पैसा जमा कराया जाएगा।
- करुणाकर अदीब, उपायुक्त मनरेगा।