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खनन में 30 लाख डूबने से चले गए थे डिप्रेशन में
Updated Mon, 12 Mar 2018 11:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। मौरंग खनन में लगाई 30 लाख रुपये डूब जाने पर जयकरन डिप्रेशन में चले गए थे। इलाज हो रहा था लेकिन जीने की आस ही उन्होंने छोड़ दी थी। ससुर के कहने पर उन्होंने बोलेरो तो फाइनेंस करा ली लेकिन इसमें भी मन नहीं रमा। अंतत: मरने का फैसला लेकर पत्नी को दुर्गा मंदिर ले गए। वहां दोनों ने काफी देर तक बात की फिर एक साथ रेल पटरी पर लेट कर जान दे दी। पोस्टमार्टम हाउस आए परिजनों ने बातचीत के दौरान ये तथ्य उजागर किए।
गाजीपुर थाने के फुलवामऊ गांव निवासी जयकरन सिंह उर्फ बिल्लू सिंह (36) की शादी बांदा जिले के जलालपुर गांव निवासी रामेश्वर सिंह की इकलौती बेटी अमिता (30) के साथ हुई थी। रामेश्वर सिंह का एक घर यहां फतेहपुर शहर के अशोक नगर में है। पत्नी की मौत के बाद रामेश्वर सिंह गांव छोड़कर यहां अशोक नगर आ गए थे। यहीं पर बेटी और दामाद को भी साथ रख लिया था।
जयकरन के परिवार में उनकी तीन बेटियां और एक बेटा था। रामेश्वर सिंह के पैतृक गांव और उनके ननिहाल अतर्रा के समीप हस्तमपुर में काफी जायदाद है। ऐसे में दामाद और बेटी के साथ रामेश्वर खुशहाल जीवन जी रहे थे। इसी बीच जयकरन उर्फ बिल्लू सिंह कुछ मौरंग खनन वालों के संपर्क में आ गए।
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बिल्लू के छोटे भाई सेन सिंह ने बताया कि भैया ने मौरंग वालों के साथ मौरंग खनन में हिस्सेदारी के लिए करीब 30 लाख रुपये लगा दिए थे। इस धनराशि में घर के जेवर आदि भी गिरवी हो गए थे। खनन की तैयारी हो ही रही थी, कि जिले में जून 2015 में तत्कालीन सीएम का कार्यक्रम लग गया। उन्होंने कमिश्नर, डीएम, खनन अधिकारी को अवैध खनन के आरोप में निलंबित कर दिया था। खनन रुकने से जमा पूंजी डूब गई और वह तबाह हो गया।
परिजनों के समझाने के बावजूद वह मानसिक रूप से बीमार हो गए। घर के लोग इलाज करा रहे थे, लेकिन वह सालों से आत्महत्या करने की बात करते थे। ससुर ने बताया कि उसकी करोड़ों की संपत्ति बेटी और दामाद की ही थी। ऐसे में आत्महत्या करने की बात इन्हें सोचना ही नहीं चाहिए थी। बेटी और दामाद ने आत्महत्या करने का निर्णय क्यों ले लिया। यह बात उनकी समझ में नहीं आ रही है। सब कुछ ठीक चले इसके लिए एक बोलेरो भी दिला दी थी।
आत्महत्या के पहले ममेरे भाई से की बात
आत्महत्या करने के पहले बिल्लू सिंह ने अपने ममेरे भाई से फोन पर बात की। उनसे कहा कि मेरे अंतिम संस्कार में जरूर शामिल होना। असोथर निवासी ममेरे भाई धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि दोपहर करीब साढ़े तीन बजे भाई का फोन आया था। वह बार-बार 10 मिनट का साथी होने की बात कर रहे थे। इस तरह की बातें वह अक्सर करते थे। बताया कि उसे मोबाइल पर ट्रेन के हार्न की आवाज भी सुनाई थी। उसने घर जाने की बात कही थी, लेकिन वह बार-बार सोमवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने का अनुरोध कर रहे थे। उन्हें विश्वास नहीं था कि ऐसा हो जाएगा।
शिव मंदिर वाली गली में छाया है मातम
शहर के अशोकनगर में बांदा सागर रोड के किनारे शिवमंदिर के बगल से जाने वाली गली में घुसते ही मातम छाया रहा। करीब तीन सौ मीटर दूर गली में स्थित दंपति के घर में ताला बंद है। दोपहर करीब 12 बजे के आसपास के घरों में भी सन्नाटा पसरा दिखा। महिलाओं ने बताया कि चारों बच्चों को बिल्लू सिंह के भाई अपने साथ फुलवामऊ गांव लिवा ले गए हैं।
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फतेहपुर। मौरंग खनन में लगाई 30 लाख रुपये डूब जाने पर जयकरन डिप्रेशन में चले गए थे। इलाज हो रहा था लेकिन जीने की आस ही उन्होंने छोड़ दी थी। ससुर के कहने पर उन्होंने बोलेरो तो फाइनेंस करा ली लेकिन इसमें भी मन नहीं रमा। अंतत: मरने का फैसला लेकर पत्नी को दुर्गा मंदिर ले गए। वहां दोनों ने काफी देर तक बात की फिर एक साथ रेल पटरी पर लेट कर जान दे दी। पोस्टमार्टम हाउस आए परिजनों ने बातचीत के दौरान ये तथ्य उजागर किए।
गाजीपुर थाने के फुलवामऊ गांव निवासी जयकरन सिंह उर्फ बिल्लू सिंह (36) की शादी बांदा जिले के जलालपुर गांव निवासी रामेश्वर सिंह की इकलौती बेटी अमिता (30) के साथ हुई थी। रामेश्वर सिंह का एक घर यहां फतेहपुर शहर के अशोक नगर में है। पत्नी की मौत के बाद रामेश्वर सिंह गांव छोड़कर यहां अशोक नगर आ गए थे। यहीं पर बेटी और दामाद को भी साथ रख लिया था।
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जयकरन के परिवार में उनकी तीन बेटियां और एक बेटा था। रामेश्वर सिंह के पैतृक गांव और उनके ननिहाल अतर्रा के समीप हस्तमपुर में काफी जायदाद है। ऐसे में दामाद और बेटी के साथ रामेश्वर खुशहाल जीवन जी रहे थे। इसी बीच जयकरन उर्फ बिल्लू सिंह कुछ मौरंग खनन वालों के संपर्क में आ गए।
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बिल्लू के छोटे भाई सेन सिंह ने बताया कि भैया ने मौरंग वालों के साथ मौरंग खनन में हिस्सेदारी के लिए करीब 30 लाख रुपये लगा दिए थे। इस धनराशि में घर के जेवर आदि भी गिरवी हो गए थे। खनन की तैयारी हो ही रही थी, कि जिले में जून 2015 में तत्कालीन सीएम का कार्यक्रम लग गया। उन्होंने कमिश्नर, डीएम, खनन अधिकारी को अवैध खनन के आरोप में निलंबित कर दिया था। खनन रुकने से जमा पूंजी डूब गई और वह तबाह हो गया।
परिजनों के समझाने के बावजूद वह मानसिक रूप से बीमार हो गए। घर के लोग इलाज करा रहे थे, लेकिन वह सालों से आत्महत्या करने की बात करते थे। ससुर ने बताया कि उसकी करोड़ों की संपत्ति बेटी और दामाद की ही थी। ऐसे में आत्महत्या करने की बात इन्हें सोचना ही नहीं चाहिए थी। बेटी और दामाद ने आत्महत्या करने का निर्णय क्यों ले लिया। यह बात उनकी समझ में नहीं आ रही है। सब कुछ ठीक चले इसके लिए एक बोलेरो भी दिला दी थी।
आत्महत्या के पहले ममेरे भाई से की बात
आत्महत्या करने के पहले बिल्लू सिंह ने अपने ममेरे भाई से फोन पर बात की। उनसे कहा कि मेरे अंतिम संस्कार में जरूर शामिल होना। असोथर निवासी ममेरे भाई धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि दोपहर करीब साढ़े तीन बजे भाई का फोन आया था। वह बार-बार 10 मिनट का साथी होने की बात कर रहे थे। इस तरह की बातें वह अक्सर करते थे। बताया कि उसे मोबाइल पर ट्रेन के हार्न की आवाज भी सुनाई थी। उसने घर जाने की बात कही थी, लेकिन वह बार-बार सोमवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने का अनुरोध कर रहे थे। उन्हें विश्वास नहीं था कि ऐसा हो जाएगा।
शिव मंदिर वाली गली में छाया है मातम
शहर के अशोकनगर में बांदा सागर रोड के किनारे शिवमंदिर के बगल से जाने वाली गली में घुसते ही मातम छाया रहा। करीब तीन सौ मीटर दूर गली में स्थित दंपति के घर में ताला बंद है। दोपहर करीब 12 बजे के आसपास के घरों में भी सन्नाटा पसरा दिखा। महिलाओं ने बताया कि चारों बच्चों को बिल्लू सिंह के भाई अपने साथ फुलवामऊ गांव लिवा ले गए हैं।