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18 साल से अनावरण को तरस रही कारगिल शहीद की प्रतिमा
farrukhabad
Updated Tue, 25 Jul 2017 11:49 PM IST
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शहीद राकेश का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद। देश की हिफाजत के लिए कारगिल में शहीद हुए लांसनायक राकेश सिंह यादव की प्रतिमा पिछले 18 सालों से अनावरण के लिए तरस रही है। गरीब की बूढ़ी मां अपनी बेटे की प्रतिमा का अनावरण करना चाहती है। शहीद के बेटे को आश्वासन देने के बाद भी अखिलेश यादव शहीद की प्रतिमा का अनावरण करने मोहम्मदाबाद नहीं पहुंचे।
मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला जब्ब के रहने वाले राकेश सिंह यादव वर्ष 1984 में आगरा से सेना के ग्रेनेडियर कोर में भर्ती हुए थे। वर्ष 1999 में कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए श्रीनगर से उनकी कंपनी को कारगिल भेजा गया। देेश रक्षा में राकेश सिंह यहां शहीद हो गए तो वर्ष 2001 में उनकी पत्नी कमलेश कुमारी को सरकार की ओर से पेट्रोल पंप आवंटित किया गया। शहीद के पिता रामप्रकाश का वर्ष 2002 में निधन हो गया।
शहीद की पत्नी कमलेश कुमारी, बेटा राजन (20), बेटी प्रियंका (17), चंदन (15) मौजूदा समय में फतेहगढ़ की सैनिक कालोनी में रह रहे हैं। मां यशोदा अपने पैतृक गांव नगला जब्ब में रह रही है। उसका कहना है कि उनके पति ने शहीद बेटे की प्रतिमा का अनावरण कराने का संकल्प मुलायम सिंह यादव से लिया था। मुलायम सिंह यादव उस दौरान कई बार मोहम्मदाबाद आए लेकिन वह प्रतिमा का अनावरण करने नहीं पहुंचे। पति की मौत हो जाने के बाद प्रतिमा का अनावरण करवाने की पुरजोर पहल बच्चे नहीं कर सके।
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उसका कहना है कि बड़े पौत्र राजन ने अखिलेश यादव के मोहम्मदाबाद आने पर उनसे प्रतिमा अनावरण का कार्यक्रम लिया लेकिन वह भी अनावरण करने नहीं पहुंच सके। शहीद की प्रतिमा आज भी पॉलीथिन से पैक उसके पैतृक गांव नगला जब्ब में खड़ी है। आर्मी से रिटायर हुए शहीद के छोटे भाई शिवकेश यादव का कहना है कि प्रतिमा अनावरण के लिए काफी प्रयास किए गए पर सपा सरकार में किसी ने उनकी नहीं सुनी। अब वह फिर शासन स्तर पर पहल करेंगे और अपने शहीद भाई की प्रतिमा का जल्द अनावरण कराने का प्रयास करेंगे।
शहीद अशोक की बेवा को मिले थे 11 लाख
कारगिल युद्घ के दौरान फर्रुखाबाद के दो जवान शहीद हुए थे। इनमें थाना मेरापुर के गांव तिलियानी के रहने वाले सेवानिवृत्त हवलदार अहिबरन सिंह का बेटा अशोक कुमार भी शामिल है। वह 4 सितंबर 1999 को कारगिल में शहीद हो गया था। शहीद अशोक कुमार की पत्नी हेमलता को 11 लाख रुपये मिले थे, जिससे उनका बेटा पप्पू (24), मोनू (21) और पुत्री रीता (19) अपना कारोबार चला रहे हैं। यह परिवार गांव में ही रहकर अपनी गुजर-बसर कर रहा है।
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मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला जब्ब के रहने वाले राकेश सिंह यादव वर्ष 1984 में आगरा से सेना के ग्रेनेडियर कोर में भर्ती हुए थे। वर्ष 1999 में कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए श्रीनगर से उनकी कंपनी को कारगिल भेजा गया। देेश रक्षा में राकेश सिंह यहां शहीद हो गए तो वर्ष 2001 में उनकी पत्नी कमलेश कुमारी को सरकार की ओर से पेट्रोल पंप आवंटित किया गया। शहीद के पिता रामप्रकाश का वर्ष 2002 में निधन हो गया।
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शहीद की पत्नी कमलेश कुमारी, बेटा राजन (20), बेटी प्रियंका (17), चंदन (15) मौजूदा समय में फतेहगढ़ की सैनिक कालोनी में रह रहे हैं। मां यशोदा अपने पैतृक गांव नगला जब्ब में रह रही है। उसका कहना है कि उनके पति ने शहीद बेटे की प्रतिमा का अनावरण कराने का संकल्प मुलायम सिंह यादव से लिया था। मुलायम सिंह यादव उस दौरान कई बार मोहम्मदाबाद आए लेकिन वह प्रतिमा का अनावरण करने नहीं पहुंचे। पति की मौत हो जाने के बाद प्रतिमा का अनावरण करवाने की पुरजोर पहल बच्चे नहीं कर सके।
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उसका कहना है कि बड़े पौत्र राजन ने अखिलेश यादव के मोहम्मदाबाद आने पर उनसे प्रतिमा अनावरण का कार्यक्रम लिया लेकिन वह भी अनावरण करने नहीं पहुंच सके। शहीद की प्रतिमा आज भी पॉलीथिन से पैक उसके पैतृक गांव नगला जब्ब में खड़ी है। आर्मी से रिटायर हुए शहीद के छोटे भाई शिवकेश यादव का कहना है कि प्रतिमा अनावरण के लिए काफी प्रयास किए गए पर सपा सरकार में किसी ने उनकी नहीं सुनी। अब वह फिर शासन स्तर पर पहल करेंगे और अपने शहीद भाई की प्रतिमा का जल्द अनावरण कराने का प्रयास करेंगे।
शहीद अशोक की बेवा को मिले थे 11 लाख
कारगिल युद्घ के दौरान फर्रुखाबाद के दो जवान शहीद हुए थे। इनमें थाना मेरापुर के गांव तिलियानी के रहने वाले सेवानिवृत्त हवलदार अहिबरन सिंह का बेटा अशोक कुमार भी शामिल है। वह 4 सितंबर 1999 को कारगिल में शहीद हो गया था। शहीद अशोक कुमार की पत्नी हेमलता को 11 लाख रुपये मिले थे, जिससे उनका बेटा पप्पू (24), मोनू (21) और पुत्री रीता (19) अपना कारोबार चला रहे हैं। यह परिवार गांव में ही रहकर अपनी गुजर-बसर कर रहा है।