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सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव की बात बेमानी

Fri, 09 Jan 2015 11:22 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Fri, 09 Jan 2015 11:22 PM IST
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Wounds in hospitals safe delivery
सरकारी अस्पतालाें में सुरक्षित प्रसव कराने की बात बेमानी साबित हो रही
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है। प्रसूताओं को यहां नाश्ता व भोजन मानक के मुताबिक नहीं दिया जाता है। दवाएं भी बाहर से मंगाई जाती हैं। एंबुलेंस चालक से लेकर नर्स व दाई तक बिना पैसे के काम नहीं करती हैं। चेक  देेने के नाम पर भी परेशान किए जाने के मामले भी सामने आते हैं। शुक्रवार को अमर उजाला की पड़ताल में हकीकत सामने आई है। 
 
लोहिया में खानापूरी, चेक मिलने में भी दिक्कत
फर्रुखाबाद। लोहिया महिला अस्पताल में प्रसूताआें को सुविधा देने में खानापूरी होती है। डाइट में भी दूध और ब्रेड दी जाती है। चेक मिलने में भी इन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है। प्रसूताआें को सही जानकारी न देने से इन्हें भटकना पड़ता है। नवाबगंज में की मधु की डिलेवरी में कुछ दिन बाकी थे। इन्हें तीन दिन बाद आने की सलाह दी गई। अस्पताल में भर्ती शहनाज पत्नी वकील, रुकमणि पत्नी सुशील, कांती देवी

पत्नी सुखदेव ने बताया कि उन्हें सिर्फ दूध और ब्रेड दी गई।  खाना व नाश्ते में इसके अलावा कुछ नहीं मिला।  हिना पत्नी अय्याज के तीमारदाराें ने बताया कि वह चेक के लिए दो बार आ चुके हैं। आज चेक दी गई। शीलू पत्नी नवल किशोर भी  चेक के लिए आई थीं। इनके नाम में गड़बड़ी होने पर लौटा दिया गया।

प्रसूताओं की डाइट
प्रसूताआें को अस्पताल की ओर से अंडा, मक्खन, दूध, रोटी, दाल, खिचड़ी, फल देने का प्रावधान है।  आपरेशन वाली प्रसूताआें को एक हफ्ते तक अस्पताल में रोकने के निर्देश हैं। इन्हें इससे पहले ही डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

वर्जन
इस समय प्रसूताआें को दूध और ब्रेड दी जा रही है। खाना करीब तीन महीनों से बंद है।  सीएमओ को बताया जा चुका है। अंडा लेने में कई मरीज मना करते हैं। इसलिए नहीं दिया जाता है। इस समय स्टाफ की काफी कमी है। केवल दो डाक्टर हैं।  यहां रेफर केस ज्यादा आते हैं। प्रसूता को  छुट्टी होने पर चेक दी जाती है।  समय से पहले जाने वाली प्रसूताआें को चेक बाद में दी जाती है। - डा. सरोजवाला, महिला सीएमएस

लिया जाता सुविधा शुल्क, नाश्ते में खानापूरी
कमालगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। प्रसूताओं के परिजनों का आरोप है कि प्रसव के नाम पर सुविधा शुल्क लिया जाता है। वार्डों में लगी खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। इससे ठंडी हवा आती है। नाश्ते के नाम पर दो पांच-पांच रुपये वाले बिस्कुट के पैकेट व डेढ़ सौ ग्राम दूध दिया जाता है। ब्लड प्रेशर मशीन खराब है। दवाएं बाहर से लिखी जाती हैं। प्रसूता को छुट्टी होने के बाद ही जननी सुरक्षा योजना की चेक दे दी जाती है। ग्रामीण इलाकों से आने वाली प्रसूताओं को 1400 और शहरी इलाकों की प्रसूताओं को एक हजार रुपये की चेक दी जाती है। शाहीन पत्नी जावेद निवासी न्यामत नगर भड़ौसा ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस से आने के बावजूद आशा ने चालक को 100 रुपये दिलवाए। दो सौ रुपये अस्पताल के अंदर दाइयों को देने पड़े। शीतल पत्नी राकेश कुमार निवासी अखमेलपुर ने बताया कि उनके परिजनों से भी चार से पांच सौ रुपये सुविधा शुल्क लिया गया। उपचारिका संविदा शालिनी पीटर ने बताया कि इंजेक्शन नहीं दिए जाते हैं। इसलिए बाहर से मंगवाना पड़ता है। चीफ फार्मासिस्ट पीसी राजपूत ने बताया कि शालिनी पीटर ने अभी तक कोई भी डिमांड लेटर नहीं दिया है। इसके चलते इंजेक्शन नहीं दिए गए। सुविधा शुल्क की बात गलत है।

चार दिन से नहीं बंटा नाश्ता
राजेपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूताओं को चार दिन से नाश्ता नहीं दिया गया है। जननी सुरक्षा योजना की चेकों में भी सुविधा शुल्क लेने का आरोप है। सीएचसी में भर्ती होने वाली प्रसूताओं को आधा लीटर दूध, एक ब्रेड का पैकेट और एक केला नाश्ते में दिए जाने का प्रावधान है। चार दिन से प्रसूताओं को नाश्ता नहीं बांटा गया है। अधिकतर प्रसूताएं भी डिलेवरी होने के चौबीस घंटे बाद ही छुट्टी कराकर चली जाती हैं। इनको जननी सुरक्षा की चेक के लिए बाद में चक्कर काटना पड़ता है। दो दिन अस्पताल में रुकने वाली प्रसूताओं को छुट्टी होते ही जननी सुरक्षा की चेक दे दी जाती है। नाश्ता वितरण के बारे में ठेकेदार मुकेश कुमार से बात करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। मौजूदा समय में एकमात्र प्रसूता राजर्षि पत्नी जागेश्वर निवासी डबरी भर्ती है।

चेक के नाम पर पैसा लेने का आरोप
शमसाबाद। जननी सुरक्षा योजना के नाम पर प्रसूताओं के परिजनों से सुविधा शुल्क लेने का आरोप है। नाम न छापने की शर्त पर यहां की आशाओं ने बताया कि चेक के नाम पर 50 से 100 रुपये लिए जाते है। यही नहीं प्रसूताओं को नाश्ता भी मानक के अनुसार नहीं मिलता है। डेढ़ सौ ग्राम दूध और एक ब्रेड का पैकेट देकर ही इतिश्री कर ली जाती है। सविता पत्नी शिशुपाल निवासी मुरैठी का कहना है कि आज नाश्ते में एक गिलास दूध और ब्रेड ही दी गई। चेक एक हफ्ते बाद ही दी जाती है।  चिकित्साधीक्षक डा. धनसिंह शाक्य ने बताया कि प्रसूताओं को 108 एंबुलेंस से लाया जाता है और 102 एंबुलेंस से छुड़वाया जाता है। प्रसूताओं को नाश्ते में दूध और ब्रेड दिया जाता है। जननी सुरक्षा योजना की चेक के नाम पर सुविधा शुल्क लिए जाने की उन्हें अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

नहीं दिया जा रहा नाश्ता
मोहम्मदाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जच्चा-बच्चा वार्ड में प्रसूता रीना देवी पत्नी अमित कुमार शाक्य निवासी अरसानी ने शिकायत की कि उन्हें नाश्ता नहीं मिल रहा है। नर्स रामश्री यादव ने बताया कि नाश्ता दिया जाता है। आज किसी वजह से नहीं आया होगा। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि दूध, ब्रेड, बिस्कुट नाश्ते में दिया जाता है। अगर नाश्ता नहीं दिया जा रहा है तो इसकी जांच की जाएगी।

फल और अंडा कब बंटते पता नहीं
कायमगंज। सीएचसी में प्रसव को आने वाली महिलाओं को खाने के नाम पर सिर्फ दूध और ब्रेड का पैकेट ही मिलता है। फल और अंडा कब बांटा गया,  यहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी नहीं पता है।  
सीएचसी में सितंबर में 448  प्रसव हुए थे।  अक्टूबर में 370, नवंबर में 371 और दिसंबर में 333  प्रसव हुए। सीएचसी में भर्ती प्रसूताओं ने बताया कि उन्हें सुबह एक पैकेट दूध और एक पैकेट ब्रेड का दिया जाता है।  प्रसूताओं को  फल और अंडा वितरित किए जाने का भी प्रावधान है।  दिसंबर  में 8 बच्चों की जहां गर्भ में ही मौत हुई, वहीं 38 महिलाओं को गंभीरावस्था में रेफर किया गया।

सुरक्षित प्रसव पर एक नजर
राजेपुर अस्पताल की एएनएम विमलेश कुमारी ने बताया कि 21 अक्तूबर से 20 नवंबर तक 79 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें दो की मौत हुई। 21 नवंबर से 20 दिसंबर तक 93 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया। मोहम्मदाबाद में  नवंबर  में 153 डिलेवरी हुईं। इसमें रूपरानी पत्नी शिवदयाल निवासी करनपुर की बेटी मरी हुई हुई थी। दिसंबर में 144 प्रसव हुए। जनवरी अब तक 50 डिलेवरी हो चुकी हैं। लिपिक सीमा यादव ने बताया कि 10 जननी सुरक्षा योजना की चेकें बंटनी बाकी हैं। शमसाबाद में नवंबर में 67 और दिसंबर में 58 प्रसव हुए हैं। दिसंबर में दो मृत बच्चे पैदा हुए थे। जनवरी में अभी तक 40 बच्चों का जन्म हो चुका है। इनमें एक बच्चा मृत पैदा हुआ। प्रसूताओं को तीन दिन अस्पताल में रखा जाता है।
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