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तीसरे दिन पेट में गया निवाला ...तो निकली हंसी

Mon, 18 May 2020 08:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 08:42 PM IST
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Went in stomach on the third day, then the bloom
शहर के एनएकेपी डिग्री कालेज में बने क्वारंटीन सेंटर पर रूखा सूखा ही भोजन करने के बाद श्रमिक के बच? - फोटो : FARRUKHABAD
तीसरे दिन पेट में गया निवाला तो खिले चेहरे
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फर्रुखाबाद। गैर प्रांतों में रोजी-रोटी की खातिर गए श्रमिकों की कहानी बेहद दर्द भरी है। गुजरात के गोधरा ईंट पाथने गए 10 सदस्यीय परिवार को तीन दिन से अन्न तक नहीं मिला। सोमवार दोपहर में क्वारंटीन सेंटर पर जब भोजन मिला, तो बच्चे खाने पर टूट पड़े। अन्न पेट में गया तो सभी के चेहरे मुसीबत में भी खिल गए।
शमसाबाद थाने के गांव छछौनपुर पट्टी निवासी जायद अली का परिवार ईंट पाथने का काम करता है। 10 माह पहले पत्नी आशिदा बानो, पुत्र शाहिद अली, पुत्रवधू शहनाज, पुत्री सन्नौ, साहिबा बानो, तरन्नमुम, दामाद आस मोहम्मद और उसकी पत्नी सितारा बानो गुजरात के गोधरा गए थे। वहां सर्दी कम पड़ती है, काम अधिक होता है।
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जायद बताते हैं कि वह जरूरत के हिसाब से पैसे मालिक से लेते रहते थे। अचानक लॉकडाउन हुआ, तो एडवांस ले लिया। पैसा खत्म हो गया, तो भूख हावी हो गई। 15 मई को ट्रेन चली। स्टेशन पर भोजन के पैकेट मिले थे। इसके बाद सोमवार को दोपहर में यहीं भोजन मिला है। दो छोटे बच्चों को जब भूख लगती थी, तो पानी पिला देते। पास में पैसे भी नहीं थे, जो कहीं खरीदकर खिला सकते और कहीं खरीदने की इजाजत भी नहीं थी। हां अब घर पहुंच जाएंगे, तो खुशी है।
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...जब मकान मालिक बन गया फरिश्ता
एनएकेपी क्वारंटीन सेंटर पर राजेपुर के गांव भुसेरा के भंवरपाल सिंह अपनी पत्नी पूजा देवी, पुत्र कृष्ण कुमार, विजय सिंह और पुत्री जान्हवी के साथ पहुंचे। वह होली के बाद राजस्थान के पाली शहर में छपाई का काम करने गए थे। सात दिन काम करने के बाद ही लॉकडाउन हो गया। काम गया, तो रोटी के लाले पड़ गए।
पूजा कहती हैं कि मकान मालिक किसी फरिश्ते से कम नहीं थे। उन्होंने किसी भी दिन भूखे पेट नहीं सोने दिया। उन्हें संकोच लगता, तो वह खुद बच्चों से पूछने लगते और जबरन भोजन करवाते थे। उन्होंने बकाया किराया भी नहीं लिया। यहां तक कि उन्होंने अभी तक नहीं कहा कि तुम लोग चले जाओ। भंवरपाल कहते हैं कि गांव में कमाकर किराया चुकता जरूर करूंगा।

कागजी कार्रवाई पूरी होते ही मिल जाता भोजन का पैकेट
ड्यूटी पर लेखपाल रोशन लाल और सहायक राजस्व लेखाकार अनुराग सिंह वर्मा मौजूद थे। शाम चार बजे तक 83 लोग पहुंचे थे। बोले, आने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी करके तुरंत भोजन के पैकेट दे देते हैं। पानी की भी व्यवस्था है। स्वास्थ्य टीम ने 65 लोगों की जांच कर दी है। उन्हें कायमगंज तहसील के उनके गांवों को भेज दिया जाएगा।
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