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गांवों में भरा पानी, भोजन का संकट
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अमृतपुर के गांव हरसिंहपुर कायस्थ में बाढ़ का पानी भरने से चारपाई पर बैठे ग्रामीण।
- फोटो : FARRUKHABAD
गांवों में भरा पानी, भोजन का संकट, प्रशासन बेखबर
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर में स्थिर होने के बाद भी सोमवार को गांवों में भरा पानी भरा रहा। अब ग्रामीणों के सामने भोजन का संकट पैदा होने लगा है। प्रशासन की ओर से अभी तक राहत पैकेटों का इंतजाम भी नहीं कराया गया। अब बाढ़ पीड़ितों को अपने साथ पशुओं में भी बीमारी फैलने की आशंका सताने लगी है। गांवों में पशुओं के चारे की समस्या खड़ी हो गई है। अब पशुओं में बीमारी भी फैलने लगी है।
बांधों से गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। इससे गंगा का जलस्तर 136.80 मीटर पर स्थिर हो गया है। सोमवार को नरौरा बांध से गंगा में 96,235 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा के जलस्तर में ज्यादा कमी होने की संभावना नहीं है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 से 20 सेंटीमीटर ऊपर चल रहा है।
गंगा के किनारे के गांव हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, तीसराम की मढ़ैया, रामपुर, जोगराजपुर, सुंदरपुर, करनपुर घाट, कुडरी सारंगपुर, अम्बरपुर, लायकपुर, रतनपुर, कुशामपुर आदि में बाढ़ का पानी अभी भी भरा है। इससे ग्रामीणों को एक वक्त की रोटी भी नहीं मिल पा रही है।
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ग्रामीण किसी तरह से पेट भरने के लिए मजबूर हैं। बाढ़ का पानी तो कम हुआ, लेकिन गांवों में जाने वाले रास्ते जलमग्न हैं। इससे आवागमन में दिक्कत है। जहां पानी कम है वहां नाव नहीं चल पा रही है। लोग नाव में धक्का लगा कर आगे बढ़ा रहे हैं।
कई दिनों से बाढ़ का पानी भरा रहने से ग्रामीणों को पशुओं के चारे के लिए दूसरे गांव में जाकर घास काटनी पड़ रही है। पानी में काफी दिनों से खड़े जानवरों में खुरपका की बीमतारी भी फैलने लगी है।
पशु चिकित्सा विभाग ने बाढ़ से घिरे गांवों में पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया है। ग्रामीणों ने टीका लगाने की मांग की है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 12 हजार 1 सौ 68 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रामगंगा का जलस्तर 134.15 पर आ गया है।
राहत सामग्री की भेजी गई डिमांड
तहसील क्षेत्र के कई गांव में बाढ़ से घिरे हैं। इससे गांव में खाने पीने की दिक्कतों को देखते गए तहसीलदार संतोष कुमार कुशवाहा ने 1000 पैकेट राहत सामग्री की डिमांड भेजी है। तहसीलदार ने बताया कि राहत सामग्री आते ही गांव में वितरण कराई जाएगी।
पांच दिन से गंगा में खड़ा स्टीमर
कमालगंज। पैंटून पुल टूटने के बाद गंगा पार कराने के लिए आया स्टीमर पांच दिन से महमदपुर मड़ईन घाट पर खड़ा है। पैंटून पुल पानी बढ़ने से पहले ही खोल लिया जाता है। इससे लोगों को फर्रुखाबाद पांचाल घाट होते हुए जाना पड़ता है। इसमें 40 किलोमीटर से ज्यादा का चक्कर लगता है। इसी को देखते हुए इस बार स्टीमर मंगाया गया है। 37 फीट लंबे व 21 फिट चौड़े स्टीमर पर 100 से भी ज्यादा लोग बैठ सकते हैं। यह पांच दिन से पुल वाली जगह पर खड़ा है।
कुछ लोगों का कहना है कि स्टीमर का इंजन खराब होने से वह नहीं चलाया जा रहा। पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता वीरपाल सिंह ने बताया कि गंगा में इधर -उधर पानी फैला हुआ है। इसलिए अभी सवारियां नहीं हैं। ठेकेदार से कहा गया है कि एक मेकेनिक हर समय मौजूद रखा जाए। मोटर आदि हर समय सही रहे।
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अमृतपुर। गंगा का जलस्तर में स्थिर होने के बाद भी सोमवार को गांवों में भरा पानी भरा रहा। अब ग्रामीणों के सामने भोजन का संकट पैदा होने लगा है। प्रशासन की ओर से अभी तक राहत पैकेटों का इंतजाम भी नहीं कराया गया। अब बाढ़ पीड़ितों को अपने साथ पशुओं में भी बीमारी फैलने की आशंका सताने लगी है। गांवों में पशुओं के चारे की समस्या खड़ी हो गई है। अब पशुओं में बीमारी भी फैलने लगी है।
बांधों से गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। इससे गंगा का जलस्तर 136.80 मीटर पर स्थिर हो गया है। सोमवार को नरौरा बांध से गंगा में 96,235 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा के जलस्तर में ज्यादा कमी होने की संभावना नहीं है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 से 20 सेंटीमीटर ऊपर चल रहा है।
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गंगा के किनारे के गांव हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर, तीसराम की मढ़ैया, रामपुर, जोगराजपुर, सुंदरपुर, करनपुर घाट, कुडरी सारंगपुर, अम्बरपुर, लायकपुर, रतनपुर, कुशामपुर आदि में बाढ़ का पानी अभी भी भरा है। इससे ग्रामीणों को एक वक्त की रोटी भी नहीं मिल पा रही है।
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ग्रामीण किसी तरह से पेट भरने के लिए मजबूर हैं। बाढ़ का पानी तो कम हुआ, लेकिन गांवों में जाने वाले रास्ते जलमग्न हैं। इससे आवागमन में दिक्कत है। जहां पानी कम है वहां नाव नहीं चल पा रही है। लोग नाव में धक्का लगा कर आगे बढ़ा रहे हैं।
कई दिनों से बाढ़ का पानी भरा रहने से ग्रामीणों को पशुओं के चारे के लिए दूसरे गांव में जाकर घास काटनी पड़ रही है। पानी में काफी दिनों से खड़े जानवरों में खुरपका की बीमतारी भी फैलने लगी है।
पशु चिकित्सा विभाग ने बाढ़ से घिरे गांवों में पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया है। ग्रामीणों ने टीका लगाने की मांग की है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 12 हजार 1 सौ 68 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रामगंगा का जलस्तर 134.15 पर आ गया है।
राहत सामग्री की भेजी गई डिमांड
तहसील क्षेत्र के कई गांव में बाढ़ से घिरे हैं। इससे गांव में खाने पीने की दिक्कतों को देखते गए तहसीलदार संतोष कुमार कुशवाहा ने 1000 पैकेट राहत सामग्री की डिमांड भेजी है। तहसीलदार ने बताया कि राहत सामग्री आते ही गांव में वितरण कराई जाएगी।
पांच दिन से गंगा में खड़ा स्टीमर
कमालगंज। पैंटून पुल टूटने के बाद गंगा पार कराने के लिए आया स्टीमर पांच दिन से महमदपुर मड़ईन घाट पर खड़ा है। पैंटून पुल पानी बढ़ने से पहले ही खोल लिया जाता है। इससे लोगों को फर्रुखाबाद पांचाल घाट होते हुए जाना पड़ता है। इसमें 40 किलोमीटर से ज्यादा का चक्कर लगता है। इसी को देखते हुए इस बार स्टीमर मंगाया गया है। 37 फीट लंबे व 21 फिट चौड़े स्टीमर पर 100 से भी ज्यादा लोग बैठ सकते हैं। यह पांच दिन से पुल वाली जगह पर खड़ा है।
कुछ लोगों का कहना है कि स्टीमर का इंजन खराब होने से वह नहीं चलाया जा रहा। पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता वीरपाल सिंह ने बताया कि गंगा में इधर -उधर पानी फैला हुआ है। इसलिए अभी सवारियां नहीं हैं। ठेकेदार से कहा गया है कि एक मेकेनिक हर समय मौजूद रखा जाए। मोटर आदि हर समय सही रहे।