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जलस्तर गिरने से बरझाला नर्सरी उद्योग पर संकट

Mon, 18 Apr 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद Updated Mon, 18 Apr 2016 01:09 AM IST
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 water falling on the nursery industry crisis
बरझाला की नर्सरी में लहलहा रहे पौधे। - फोटो : अमर उजाला
कायमगंज के बरझाला क्षेत्र में जलस्तर 10 फीट नीचे खिसक जाने से यहां के प्रसिद्ध नर्सरी उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।  पानी की कमी के चलते यह उद्योग किसी भी समय खत्म हो सकता है। हालांकि इस उद्योग को बचाने के लिए जल निगम की ओर से नलकूप लगवा टंकी बनाकर कवायद शुरू की गई है। कायमगंज क्षेत्र डार्क जोन में घोषित होने के कारण यहां बोरिंग करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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बरझाला के आसपास पपड़ी, वीरपुर, अताईपुर, गोदाम नगला, मद्दूपुर, हंसापुर, नौराई, चिलसरी, अरियारा, लहरा, ममापुर और मेंदपुर के तकरीबन ढाई हजार हेक्टेयर भूमि पर यहां नर्सरी का कार्य किया जाता है। नर्सरी संचालक संदीप गंगवार का कहना है कि इस नर्सरी से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों में पौधे भेजे जाते है। सबसे ज्यादा पानी की खपत नर्सरी में होती है। यहां जलस्तर गिरने से पानी का संकट हो गया है। बरझाला के ग्राम प्रधान राजीव गंगवार का कहना है कि गत वर्ष 55 फीट पर पानी मिल जाता था। इस वर्ष 65 फीट नीचे पानी पहुंच गया है। 100, 110 फीट बोरिंग कराने के बाद भी पानी नियमित रूप से नहीं चल पा रहा है।
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उप जिलाधिकारी, कायमगंज, अजीत कुमार सिंह का कहना है कि कायमगंज को दो साल पहले ही डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। बरझाला नर्सरी उद्योग के कारण जलस्तर इस क्षेत्र में 10 फीट गहरे में पहुंच गया है। इससे नर्सरी उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। जल निगम के माध्यम से यहां एक नलकूप लगाकर ओवरहेड टैंक बनाया जाएगा। इसके लिए स्वीकृति मिल गई है। जमीन यहां उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। अब पपड़ी वीरपुर में जमीन मिली है।
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बरझाला के आसपास की नर्सरी में आम, शीशम, नीम और करौंदा समेत तकरीबन आधा सैकड़ा प्रजाति के पाम, अमरूद, नीबू, फाल्से, चीकू, मौलश्री, पपीता, रजनीगंधा प्रजाति के पेड़ों और फुलवारी में गुलाब, गेंदा, चमेली सहित सैकड़ों प्रजातियां तैयार की जाती हैं। यूकेलिप्टस बहुतायत से तैयार किया जाता है। पूरे देश में यहां से नर्सरी आपूर्ति की जाती है।
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