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नवाबगंज सीएचसी में खुले में पड़े जंग खा रहे बेड
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नवाबगंज सीएचसी में खुले में छत पर पड़े बेड।
- फोटो : FARRUKHABAD
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सीएचसी में खुले में पड़े बेड खा रहे जंग
नवाबगंज। तीन माह पूर्व पेंटिंग के लिए छत पर डाले गए बेड इन दिनों बारिश में जंग खा रहे हैं। इनकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है। अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं। कोरोना की दूसरी लहर में नवाबगंज सीएचसी को एल-2 अस्पताल बनाने की तैयारी की गई थी। कोराना नियंत्रण में आया तो जिम्मेदार बेपरवाह हो गए।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल से मई तक संक्रमितों की इस कदर बाढ़ आई कि अस्पताल कम पड़ गए। तब तत्कालीन सीएमओ ने नवाबगंज सीएचसी में 100 बेड का एल-2 अस्पताल बनाने की तैयारी शुरू की। जिलाधिकारी व सीडीओ ने भी निरीक्षण कर व्यवस्था पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। जोरशोर से तैयारियां चलीं और अस्पताल में पहले से मौजूद पुराने बेडों को छत पर डालकर पेंटिंग भी कराई गई।
जब तक अस्पताल में तैयारियां पूरी होतीं तब तक कोरोना नियंत्रण में आ गया। इससे जिम्मेदारों ने सीएचसी को एल-2 अस्पताल बनाने की जरूरत ही नहीं समझी। इसी के बाद हालात यह हैं कि तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी पेंटिंग के लिए छत पर डाले गए बेड हटाए नहीं गए।
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वे इन दिनों बारिश में भीगकर जंग खा रहे हैं। शौचालय में गंदगी है, वाशबेसिन भी टूटा पड़ा है। महिला शौचालय में ताला पड़ा रहता है। पानी न आने से टोटियां सूखी व टूटी पड़ी हैं।
स्टाफ की भी कमी
सीएचसी में डॉक्टर के आठ पदों में रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, दो फिजीशियन, एक कंसलटेंट फिजीशियन व एक महिला चिकित्सक का पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष मात्र तीन डॉक्टर ही आते हैं। सात नर्स की जगह दो ही कार्यरत हैं। व्यवस्थाओं पर नजर डालें तो प्रसव के लिए लगाया जाने वाला इंजेक्शन पिछले आठ दिन से अस्पताल में नहीं है।
सीएचसी को अब एल-2 अस्पताल नहीं बनाया जाएगा। अस्पताल में तैनात महिला चिकित्सक विधायक की बेटी होने की वजह से कभी आती ही नहीं हैं। छत पर खुले में बेड पड़े होने की जानकारी नहीं है। अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं एक सप्ताह में ठीक कराई जाएंगी।- डॉ.अभिजीत, प्रभारी अधीक्षक
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नवाबगंज। तीन माह पूर्व पेंटिंग के लिए छत पर डाले गए बेड इन दिनों बारिश में जंग खा रहे हैं। इनकी कोई सुधि लेने वाला नहीं है। अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं। कोरोना की दूसरी लहर में नवाबगंज सीएचसी को एल-2 अस्पताल बनाने की तैयारी की गई थी। कोराना नियंत्रण में आया तो जिम्मेदार बेपरवाह हो गए।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल से मई तक संक्रमितों की इस कदर बाढ़ आई कि अस्पताल कम पड़ गए। तब तत्कालीन सीएमओ ने नवाबगंज सीएचसी में 100 बेड का एल-2 अस्पताल बनाने की तैयारी शुरू की। जिलाधिकारी व सीडीओ ने भी निरीक्षण कर व्यवस्था पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। जोरशोर से तैयारियां चलीं और अस्पताल में पहले से मौजूद पुराने बेडों को छत पर डालकर पेंटिंग भी कराई गई।
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जब तक अस्पताल में तैयारियां पूरी होतीं तब तक कोरोना नियंत्रण में आ गया। इससे जिम्मेदारों ने सीएचसी को एल-2 अस्पताल बनाने की जरूरत ही नहीं समझी। इसी के बाद हालात यह हैं कि तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी पेंटिंग के लिए छत पर डाले गए बेड हटाए नहीं गए।
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वे इन दिनों बारिश में भीगकर जंग खा रहे हैं। शौचालय में गंदगी है, वाशबेसिन भी टूटा पड़ा है। महिला शौचालय में ताला पड़ा रहता है। पानी न आने से टोटियां सूखी व टूटी पड़ी हैं।
स्टाफ की भी कमी
सीएचसी में डॉक्टर के आठ पदों में रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, दो फिजीशियन, एक कंसलटेंट फिजीशियन व एक महिला चिकित्सक का पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष मात्र तीन डॉक्टर ही आते हैं। सात नर्स की जगह दो ही कार्यरत हैं। व्यवस्थाओं पर नजर डालें तो प्रसव के लिए लगाया जाने वाला इंजेक्शन पिछले आठ दिन से अस्पताल में नहीं है।
सीएचसी को अब एल-2 अस्पताल नहीं बनाया जाएगा। अस्पताल में तैनात महिला चिकित्सक विधायक की बेटी होने की वजह से कभी आती ही नहीं हैं। छत पर खुले में बेड पड़े होने की जानकारी नहीं है। अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं एक सप्ताह में ठीक कराई जाएंगी।- डॉ.अभिजीत, प्रभारी अधीक्षक