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Farrukhabad News: पांच साल से 10 वेंटिलेटर व पोर्टेबल एक्सरे मशीन के शुरू होने का इंतजार

Sat, 04 Jul 2026 12:25 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 12:25 AM IST
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Waiting for five years for the commissioning of 10 ventilators and portable X-ray machines.
फोटो-12 लोहिया अस्पताल की एक्सरे रूम में रखी पोर्टेबल एक्सरे मशीन। संवाद
फर्रुखाबाद। कोरोना काल में आए 10 वेंटिलेटर व एक पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। एक करोड़ से अधिक की मशीन पांच साल बीतने के बाद भी एक मरीज के काम न आ सकी।
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वर्ष 2021 में लोहिया अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए 10 वेंटिलेटर बेड तैयार किए गए थे। किसी भी बच्चे का एक्सरे करने के लिए उसे डिजिटल एक्सरे यूनिट तक न ले जाना पड़े, इसके लिए पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन भी आई थी। वेंटिलेटर, पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) के ही एक वार्ड में अन्य सभी सहयोगी मशीनों के साथ लगाए गए थे। इन वेंटिलेटर पर आज तक एक भी बच्चे का इलाज नहीं किया गया। सिर्फ मॉकड्रिल के दौरान ही यूनिट के वार्ड को खोलकर मशीनों पर डमी मरीज लिटाकर रिहर्सल किया जाता रहा। दो साल पहले बंद हो चुके पीकू यूनिट के वेंटिलेटर वार्ड के तब से ताले तक नहीं खुले हैं।
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पोर्टेबल एक्सरे मशीन डिजिटल एक्सरे रूम में रखी है। इस मशीन का भी मरीज पर एक बार भी उपयोग नहीं किया गया। जबकि वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर एक्सरे रूम तक ले जाने में तीमारदारों को मशक्कत करनी पड़ती है।
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वेंटिलेटर न होने की बात कहकर रेफर करते बच्चे
इमरजेंसी में मात्र आठ बेड का पीडियाट्रिक वार्ड है। कई बार बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने से बेडों पर दो-दो को लिटाना पड़ता है। हर रोज गंभीर हालत में आने वाले बच्चों को इमरजेंसी से वेंटिलेटर सुविधा न होने की बात कहकर रेफर किया जाता है। तीमारदारों को निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है।

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स्टॉफ की कमी संचालन में आ रही आड़े : सीएमएस
सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है। तीनों शिफ्टों के लिए एनेस्थेटिस्ट भी चाहिए। अन्य स्टाफ भी नहीं है। यदि पर्याप्त स्टाफ मिले तो मशीनों का सदुपयोग किया जा सकता है। पीकू यूनिट का संचालन सीएमओ स्तर से किया जा रहा था।
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