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Farrukhabad News: बाढ़ शरणालय में बच्चे की हालत देख डीएम बोलीं इसे तो नेफ्रोटिक सिंड्रोम, कराया भर्ती

Sat, 08 Aug 2026 12:11 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:11 AM IST
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Upon seeing the child's condition at the flood relief shelter, the District Magistrate remarked that he appeared to be suffering from nephrotic syndrome and had him admitted to the hospital.
फोटो-14 लोहिया अस्पताल में बच्चे का इलाज करते डॉक्टर। संवाद
फर्रुखाबाद। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने खुद ही कमान संभाली है। शहर के रहमानिया स्कूल में निरीक्षण के दौरान एक बच्चे की हालत देख वह बोलीं कि इसे तो नेफ्रोटिक सिंड्रोम बीमारी है। उन्होंने सीएमओ को उसका तत्काल इलाज शुरू कराने के निर्देश दिए। इसके बाद डॉक्टरों की पूरी टीम बाढ़ शरणालय पहुंची। जांच के बाद उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिलाधिकारी के इस मानवीय कदम की सभी ने सराहना की।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बढ़पुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव कटरी धर्मपुर में बाढ़ का पानी भरने से ग्रामीणों को शहर के मोहल्ला सलाबत खां स्थित रहमानिया स्कूल में बने बाढ़ शरणालय में पहुंचाया गया है। बुधवार को जिलाधिकारी ने बाढ़ शरणालय का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाएं देखीं। इसी बीच उनकी नजर गांव के मो. सारिक के आठ वर्षीय पुत्र अदनान उर्फ रोहित पर पड़ी।
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दिल्ली के एम्स जैसे संस्थान में चिकित्सकीय सेवाएं देने के बाद आईएएस बनीं जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर बच्चे की हालत देख रुक गईं। वह उसके पास गईं। उससे बातचीत के बाद माता-पिता से उसके इलाज के बारे में जानकारी की तो वह चुप हो गए। डीएम ने कहा कि इसे तो नेफ्रोटिक सिंड्रोम बीमारी है। परिवार की आर्थिक कमजोरी और बच्चे की पीड़ा देख जिलाधिकारी की चिकित्सीय सेवा की भावना जाग गई।
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सीएमओ के निर्देश पर सिविल अस्पताल लिंजीगंज के अधीक्षक डॉ. राणाप्रताप बाढ़ शरणालय पहुंचे। उन्होंने पिता व अन्य परिजन से बात की। इसके बाद बच्चे को लोहिया अस्पताल लाकर भर्ती कराया। वहां बाल रोग विशेषज्ञों की टीम उसके बेहतर उपचार में लगी है। सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि लोहिया अस्पताल से बच्चे को सैफई मेडिकल कॉलेज या आगरा भेजा जाएगा। इससे उसका और बेहतर इलाज हो सकेगा। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बताया कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम किडनी से संबंधित गंभीर बीमारी है। बच्चे का इलाज पहले ही शुरू हो जाना चाहिए था। फिर भी वह अच्छा इलाज कराने का प्रयास करेंगी।
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