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बेमौसम बारिश और तेज बारिश से प्रभावित हुआ बौर

Sun, 08 Mar 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Sun, 08 Mar 2015 11:05 PM IST
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Unseasonable rain and strong winds affected the blossom
पिछले दिनाें की बारिश से इस बार आम आदमी तक आम की पहुंच होना मुश्किल लग
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रहा है।  इस बार मात्र 10 से 12 प्रतिशत आम की पैदावार के आसार जताए जा रहे हैं। इससे आम बागवानों की चिंता बढ़ गई है। इनकी परेशानी है कि सर्दी के कारण बौर काला हो जाने से फसल चौपट हो सकती है।

मार्च में बारिश और सर्दी के कारण आम की फसल प्रभावित हुई है। बारिश और सर्द हवाओं ने आम के बौर को काला कर दिया है। इससे आम की फसल तबाह हो सकती है। आम उत्पादक रायपुर निवासी सैयदेन शाह, अकील खां, पितौरा निवासी मनीश गंगवार, बरझाला निवासी शीलू, विवेक गंगवार, दुर्वेश गंगवार, दिनेश गंगवार आदि ने बताया कि इस बार जनवरी से मार्च तक कई बार पानी बरसने और तेज हवाओं से आम की फसल पृूरी तरह तबाह हो चली है।

इस बार सर्दी अधिक पड़ने के  कारण पहले से ही फसल 50 प्रतिशत थी। बीच-बीच में पानी बरसने और सर्दी से बौर खराब हो गया है। इस बार 10 से 12 प्रतिशत ही फसल होने की उम्मीद है। बागवानों ने बताया कि जिन्होंने बाग किराए पर लिए हैं, उनकी इस बार लागत तो दूर मेहनत वसूल होती नहीं लग रही।

मलिहाबाद के बाद दशहरी आम के लिए पूरे देश में पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के बागवान इस साल आम की फसल के नाममात्र के होने की आशंकाओं से परेशान हैं। बागवानों का कहना है कि ऐसे मौसम में पेड़ों में फंगस रोग लग सकता है। बताया कि इसे दवाओं के छिड़काव से दूर किया जा सकता है। मौसम साफ होना चाहिए। रोज-रोज की बारिश ने दवाओं के छिड़काव पर भी रोक लगा दी है।

गेहूं किसानों की मेहनत पर पानी फेरा
बेमौसम बारिश के बाद तेज हवाओं ने गेहूं  की फसल को तबाह कर दिया है। तेज हवाआें से गेहूं की फसल  खेतों में लेट गई थी। इससे इस बार 20 से 25 फीसदी पैदावार गिरने की नौबत है। इस बार बिगड़े मौसम और तेज हवाओं ने गेहूं की फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया है। किसान खेतों में पसरी पड़ी फसल को देखकर चिंतित हैं। शनिवार देर रात बारिश और तेज हवाओं के बीच बिजली की गड़गड़ाहट से ओले पड़ने की आशंका हो गई थी।

ओले गिर जाते तो तंबाकू की फसल बर्बाद हो जाती। तंबाकू किसानों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। इनका कहना है कि जब तक तंबाकू कटकर घरों में नहीं पहुुंच जाती,  खतरा बना ही रहेगा। तंबाकू की फसल को देखकर व्यापारियों को इस साल रेट कम रहने का अंदेशा है। पिछले साल तंबाकू के रेट अच्छे होने के कारण अधिकांश किसानों ने अपने खेतों में तंबाकू की है।
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