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उन्नाव के सजायाफ्ता कैदी ने सेंट्रल जेल में फांसी लगाकर जान दी
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सेंट्रल जेल से बाहर आते एसपी।
- फोटो : FARRUKHABAD
जनपद उन्नाव के सजायाफ्ता कैदी ने सेंट्रल जेल के अंदर पेड़ पर लुंगी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अन्य कैदियों ने जब उसको फंदे पर लटका देखा तो इसकी सूचना जेल प्रशासन को दी। एसपी व कोतवाल मौके पर पहुंचे। कैदी के शव को फंदे से उतारा गया और सूचना उसके परिजनों को दी गई।
जनपद उन्नाव थाना असोहा के गांव अनवरपुर निवासी राधेश्याम यादव (62) को हत्या के मुकदमे में आजीवन कारावास की सजा 11 जनवरी 2005 को सुनाई गई थी। 14 जनवरी 2005 को राधेश्याम को उन्नाव से फतेहगढ़ की सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। तबसे वह यहीं बंद था।
4 फरवरी 2018 को कैदी राधेश्याम को मानसिक बीमारी चलते वाराणसी के मानसिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहां उसका तीन महीने से अधिक समय तक उपचार चलता रहा। 18 मई 2018 को उपचार के बाद राधेश्याम को वापस सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां भी उसे अस्पताल में ही रखा गया।
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रविवार सुबह को वह अस्पताल परिसर में बने शौचालय में शौच के लिए गया और काफी देर तक वापस नहीं आया। कुछ देर बाद अन्य कैदियों ने राधेश्याम का शव पीपल के पेड़ पर लुंगी के फंदे पर लटकता देखा। इसकी जानकारी बंदी रक्षकों को दी। घटना के बारे में जेलर व अधीक्षक को अवगत कराया गया।
कैदी के फांसी लगाने से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसपी डॉ. अनिल मिश्रा व कोतवाल अजय नारायण फोर्स के साथ जेल के अंदर पहुंचे। वहां तहसीलदार की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारा गया। कैदी ने पीपल के पेड़ पर काफी ऊंचाई पर फांसी लगाई थी।
शव को उतारने में जेल प्रशासन को कड़ी मशक्कत करना पड़ी। मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। शाम तक परिजन नहीं पहुंचे। कोतवाल अजय नारायण सिंह ने बताया कि मानसिक रूप से बीमार कैदी राधेश्याम ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।
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जनपद उन्नाव थाना असोहा के गांव अनवरपुर निवासी राधेश्याम यादव (62) को हत्या के मुकदमे में आजीवन कारावास की सजा 11 जनवरी 2005 को सुनाई गई थी। 14 जनवरी 2005 को राधेश्याम को उन्नाव से फतेहगढ़ की सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। तबसे वह यहीं बंद था।
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4 फरवरी 2018 को कैदी राधेश्याम को मानसिक बीमारी चलते वाराणसी के मानसिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहां उसका तीन महीने से अधिक समय तक उपचार चलता रहा। 18 मई 2018 को उपचार के बाद राधेश्याम को वापस सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां भी उसे अस्पताल में ही रखा गया।
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रविवार सुबह को वह अस्पताल परिसर में बने शौचालय में शौच के लिए गया और काफी देर तक वापस नहीं आया। कुछ देर बाद अन्य कैदियों ने राधेश्याम का शव पीपल के पेड़ पर लुंगी के फंदे पर लटकता देखा। इसकी जानकारी बंदी रक्षकों को दी। घटना के बारे में जेलर व अधीक्षक को अवगत कराया गया।
कैदी के फांसी लगाने से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसपी डॉ. अनिल मिश्रा व कोतवाल अजय नारायण फोर्स के साथ जेल के अंदर पहुंचे। वहां तहसीलदार की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारा गया। कैदी ने पीपल के पेड़ पर काफी ऊंचाई पर फांसी लगाई थी।
शव को उतारने में जेल प्रशासन को कड़ी मशक्कत करना पड़ी। मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। शाम तक परिजन नहीं पहुंचे। कोतवाल अजय नारायण सिंह ने बताया कि मानसिक रूप से बीमार कैदी राधेश्याम ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।