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दो कंबल के सहारे काटी सर्द रात

Sat, 26 Dec 2015 11:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद Updated Sat, 26 Dec 2015 11:08 PM IST
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Two blankets reaped through chilly night

शमसाबाद। गांव जटपुरा में चूल्हे की चिंगारी से जले कच्चे घरों के पीड़ितों ने दो कंबलों के सहारे सर्द रात काटी। किसी ने ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे आशियाना बनाया तो किसी ने पेड़ों से तिरपाल डालकर उसके नीचे रात गुजारी। दूसरे गांव के लोग भोजन लेकर आए तो बच्चों ने पेट की आग बुझाई। अग्निपीड़ितों की सुधि लेने के लिए दूसरे दिन जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी और कर्मचारी मौके पर नहीं गया। शनिवार को अमर उजाला संवाददाता से जब उनका हालचाल लिया तो दर्द छलक पड़ा।

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 शुक्रवार रात चूल्हे की चिंगारी से अवधेश तिवारी, लज्जाराम, सुखराम, शिवराम, रामशरन, बुद्धपाल और राजेंद्र सिंह के कच्चे घर जल गए थे। इनके यहां बिछाने के लिए कपड़े तक नहीं बचे थे। प्रभारी तहसीलदार गजेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर प्रधान मातादीन से अग्निपीड़ितों के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था कराने के लिए कहा था। इसके साथ ही मौके पर सभी अग्निपीड़ितों को दो-दो कंबल दिए थे।
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प्रधान ने अग्निपीड़ितों के रहने और भोजन की कोई व्यवस्था नहीं कराई। अग्निपीड़ितों ने ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे रात गुजारी। भोजन भी दूसरे गांव के लोग अग्निपीड़ितों के लिए लेकर आए। अमर उजाला संवाददाता ने अग्निपीड़ित अवधेश कुमार से जब बात की तो उन्होंने बताया कि रहने की छोड़ो, भोजन तक की कोई व्यवस्था नहीं करवाई गई। पड़ोसी गांव से लोग भोजन लेकर आए। ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे पैरा बिछाया। पड़ोस से दरी और बोरा लेकर आए थे। इसी को बिछौना बनाया। जिला प्रशासन ने सिर्फ दो कंबल दिए थे। इनमें पांच बच्चे और पत्नी पूरी रात सर्दी से ठंडाते रहे। सुबह भी भोजन की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जानवर भी खुले आसमान के नीचे ही बंधे रहे।
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अग्निपीड़ित लज्जाराम ने बताया कि नीम के पेड़ पर बोरा बांधकर तिरपाल ताना। इसके बाद उसके नीचे पैरा बिछाकर परिजनों समेत रात काटी। जानवर भी खुले आसमान के नीचे बांधे। उन्होंने मांग की कि कम से कम पालीथिन तो उपलब्ध करवाई जाए। गेहूं और चावल तो दिया गया है लेकिन भोजन बनाने को बर्तन तक नहीं हैं। ऐसे में भोजन पकाने में दिक्कत आएगी। उन्होंने जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता दिलवाए जाने की मांग की है।

वहीं, प्रधान मातादीन ने शनिवार को प्रत्येक अग्निपीड़ित को एक-एक बोरा चावल और गेहूं देने के लिए कोटेदार से कहा। कोटेदार ने अग्निपीड़ितों को गेहूं और चावल वितरित किए।

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