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गंगा के किनारे के पौधे हो गए गायब, पंचवटी के पौधे सूख गए
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बलीपट्टी रानीगांव में पंचवटी बनाने को लगाए गए पौधे। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
अमृतपुर लोगों को शुद्ध हवा मिल सके और गंगा कटान भी रुक जाए। इस उद्देश्य से पिछले वर्ष गंगा के किनारे के एक दर्जन से अधिक गांवों में बांस के पौधे लगाए गए थे। इन्हें लगाने में मोटी रकम भी खर्च हुई थी। इसके अलावा बलीपट्टी गांव में पंचवटी बनाने को फलदार व छायादार पौधे रोपे गए थे। पर अब यहां आधे से अधिक पौधे सूख गए हैं। जो बचे हैं, उन्हें भी कोई देखने वाला नहीं है। बांस के पौधे तो गायब ही हो गए हैं।
ब्लाक राजेपुर के गांव बलीपट्टी रानी गांव में पिछले वर्ष हजारों रुपये की लागत से वन विभाग ने ने पंचवटी बनाने को वहां लगभग पांच सौ से अधिक फलदार व छायादार पौधे लगाए थे। बलीपट्टी रानीगांव में गंगा के किनारे कटान रोकने को बंसा के एक हजार पौधे भी रोपे गए थे लेकिन रखरखाव सही से न होने से पंचवटी के बनाने को लगाए गए आधे से ज्यादा पौधे सूख चुके हैं।
सोता नाला के किनारे लगे बांस के पौधे अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। गंगा के किनारे के गांव आसमपुर, भाऊपुर चौरासी, कुबेरपुर, कुड़री सारंगपुर, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कास्थ्य, सलेमपुर, चाचूपुर, फखरपुर, रामपुर जोगरपुर, कंचनपुर सवलपुर आदि गांव मे कटान को रोकने के लिए प्रत्येक गांव में दो सौ से तीन सौ बांस के पौधे लगाए गए थे।
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पर अब ये पौधे गायब हो गए हैं। यही हाल पंचाल घाट का है। वहां पर वन विभाग ने गंगा के किनारे बांस के पौधे लगवाए थे। अब वहां भी एक भी बांस के पौधा नजर नहीं आ रहा है।
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ब्लाक राजेपुर के गांव बलीपट्टी रानी गांव में पिछले वर्ष हजारों रुपये की लागत से वन विभाग ने ने पंचवटी बनाने को वहां लगभग पांच सौ से अधिक फलदार व छायादार पौधे लगाए थे। बलीपट्टी रानीगांव में गंगा के किनारे कटान रोकने को बंसा के एक हजार पौधे भी रोपे गए थे लेकिन रखरखाव सही से न होने से पंचवटी के बनाने को लगाए गए आधे से ज्यादा पौधे सूख चुके हैं।
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सोता नाला के किनारे लगे बांस के पौधे अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। गंगा के किनारे के गांव आसमपुर, भाऊपुर चौरासी, कुबेरपुर, कुड़री सारंगपुर, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कास्थ्य, सलेमपुर, चाचूपुर, फखरपुर, रामपुर जोगरपुर, कंचनपुर सवलपुर आदि गांव मे कटान को रोकने के लिए प्रत्येक गांव में दो सौ से तीन सौ बांस के पौधे लगाए गए थे।
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पर अब ये पौधे गायब हो गए हैं। यही हाल पंचाल घाट का है। वहां पर वन विभाग ने गंगा के किनारे बांस के पौधे लगवाए थे। अब वहां भी एक भी बांस के पौधा नजर नहीं आ रहा है।