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फर्रुखाबाद में कूल्हा प्रत्यारोपित कर मरीज को पांच दिन में चलाया
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डाक्टर रिषीकांत वर्मा। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। जो काम निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च करके होता है, वह सरकारी अस्पतालों में भी बेहद कम खर्चे में संभव है। ये साबित किया है डा. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल के आर्थो सर्जन डा. रिषिकांत वर्मा ने। उन्होंने एक मरीज का कूल्हा प्रत्यारोपित करके पांच दिन में उसे चला भी दिया।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र गांव करनपुर ज्योता निवासी सुरेश चंद्र (60) का कूल्हा दुर्घटना में टूट गया था। परिजनों ने कई निजी डाक्टरों को दिखाया, मगर किसी ने भी इलाज का साहस नहीं दिखाया। 17 जुलाई को परिजन लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. रिषिकांत वर्मा को दिखाया। जांच के बाद पता चला कि मरीज का कूल्हा बदलना होगा। परिजनों ने सहमति दी तो उन्होंने इलाज शुरू कर दिया। डा. वर्मा ने बताया कि उन्होंने सीएमएस डा. एसपी सिंह से परामर्श किया। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ 22 जुलाई को मरीज का कूल्हा प्रत्यारोपित कर दिया।
पांच दिन बाद यानी सोमवार सुबह मरीज अपने पैरों से चलने लगा, तो परिजनों और मरीज की खुशी का ठिकाना न रहा। डा. ऋषिकांत ने बताया कि लोहिया अस्पताल में ऑपरेशन की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब मरीजों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बड़े और जिले के लिए ऐतिहासिक ऑपरेशन में सहयोग करने के लिए सीएमएस का आभार जताया। बोले, यहां जटिल ऑपरेशन भी संभव होने से गरीबों को इसका फायद होगा।
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फर्रुखाबाद। जो काम निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च करके होता है, वह सरकारी अस्पतालों में भी बेहद कम खर्चे में संभव है। ये साबित किया है डा. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल के आर्थो सर्जन डा. रिषिकांत वर्मा ने। उन्होंने एक मरीज का कूल्हा प्रत्यारोपित करके पांच दिन में उसे चला भी दिया।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र गांव करनपुर ज्योता निवासी सुरेश चंद्र (60) का कूल्हा दुर्घटना में टूट गया था। परिजनों ने कई निजी डाक्टरों को दिखाया, मगर किसी ने भी इलाज का साहस नहीं दिखाया। 17 जुलाई को परिजन लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. रिषिकांत वर्मा को दिखाया। जांच के बाद पता चला कि मरीज का कूल्हा बदलना होगा। परिजनों ने सहमति दी तो उन्होंने इलाज शुरू कर दिया। डा. वर्मा ने बताया कि उन्होंने सीएमएस डा. एसपी सिंह से परामर्श किया। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ 22 जुलाई को मरीज का कूल्हा प्रत्यारोपित कर दिया।
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पांच दिन बाद यानी सोमवार सुबह मरीज अपने पैरों से चलने लगा, तो परिजनों और मरीज की खुशी का ठिकाना न रहा। डा. ऋषिकांत ने बताया कि लोहिया अस्पताल में ऑपरेशन की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब मरीजों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बड़े और जिले के लिए ऐतिहासिक ऑपरेशन में सहयोग करने के लिए सीएमएस का आभार जताया। बोले, यहां जटिल ऑपरेशन भी संभव होने से गरीबों को इसका फायद होगा।
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