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Farrukhabad News: अपनी हनक बनाए रखने के लिए बार-बार गलती करती रही खाकी
Thu, 16 Oct 2025 12:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 16 Oct 2025 12:51 AM IST
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फर्रुखाबाद। अपनी हनक बनाये रखने की कोशिश में खाकी बार-बार गलती करती रही, और नतीजा यह हुआ कि मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। पुलिस पर मनमानी कार्रवाई, धमकाने और दबाव बनाने के आरोप लगे।
पहले तो पुलिस ने आरोपियों के रिश्तेदारों को बिना लिखापढ़ी के एक सप्ताह तक हिरासत में रखा, फिर जब पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, तो पुलिस पर याची को धमकाने का आरोप लगा। जब बात नहीं बनी, तो पुलिस ने हाईकोर्ट में मदद करने वाले प्रीति यादव के स्थानीय अधिवक्ता अवधेश मिश्रा के घर दबिश देकर दबाव बनाने का प्रयास किया।
इन लगातार गलतियों के चलते अब पुलिस को न्यायालय में जवाब देना पड़ा। कानूनी गलती और दबाव की कोशिशों से न केवल पुलिस की छवि धूमिल हुई, बल्कि अधिवक्ताओं में रोष है।
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कोतवाली कायमगंज क्षेत्र में मनोज की मारपीट कर हत्या करने के मामले में प्रीति यादव के दो परिजनों को पुलिस ने कोतवाली में बैठा लिया था। कोतवाली पुलिस और एसपी की चौखट से भी जब प्रीति को न्याय नहीं मिला तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने दाखिल याचिका में प्रीति यादव ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे पुलिस अधिकारियों ने उनके घर में घुसकर उनके परिजन अनुज यादव और अंशू यादव को जबरन उठाकर ले गए। आरोप है कि उन्हें छह दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया गया। पुलिस ने प्रीति यादव से जबरन पत्र लिखवाया कि कोई हिरासत नहीं हुई और उन्होंने कोई याचिका दायर नहीं की। इसके बाद 14 सितंबर की रात सभी को रिहा किया गया।
हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को न्याय में बाधा डालने का प्रयास बताया और संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि वे प्रीति यादव और उनके परिजनों को धमकाने, परेशान करने या संपर्क करने की कोशिश न करें। अदालत ने प्रीति यादव और उनके भतीजे अनमोल यादव को 14 अक्तूबर को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया था।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रीति यादव ने पुलिस पर दबाव बनाने की शिकायत की। वहीं उन्होंने स्थानीय अधिवक्ता अवधेश मिश्रा को भी उच्च न्यायालय परिसर से फर्रुखाबाद पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की बात कही। कोर्ट ने इस दौरान एसपी को न्याय कक्ष में मौजूद रहने और अधिवक्ता अवधेश मिश्रा को पेश करने के निर्देश दिए।
कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता अवधेश मिश्रा ने बताया कि उन पर दबाव बनाने के लिए 11 अक्तूबर की रात में 100 से अधिक पुलिस वालों ने उसके घर पर दबिश दी। उनके न मिलने पर पुलिस डीबीआर आदि अपने साथ ले गई। घर में तोड़फोड़ भी की। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को भी सुनवाई करने का आदेश दिया।
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पहले तो पुलिस ने आरोपियों के रिश्तेदारों को बिना लिखापढ़ी के एक सप्ताह तक हिरासत में रखा, फिर जब पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, तो पुलिस पर याची को धमकाने का आरोप लगा। जब बात नहीं बनी, तो पुलिस ने हाईकोर्ट में मदद करने वाले प्रीति यादव के स्थानीय अधिवक्ता अवधेश मिश्रा के घर दबिश देकर दबाव बनाने का प्रयास किया।
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इन लगातार गलतियों के चलते अब पुलिस को न्यायालय में जवाब देना पड़ा। कानूनी गलती और दबाव की कोशिशों से न केवल पुलिस की छवि धूमिल हुई, बल्कि अधिवक्ताओं में रोष है।
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कोतवाली कायमगंज क्षेत्र में मनोज की मारपीट कर हत्या करने के मामले में प्रीति यादव के दो परिजनों को पुलिस ने कोतवाली में बैठा लिया था। कोतवाली पुलिस और एसपी की चौखट से भी जब प्रीति को न्याय नहीं मिला तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने दाखिल याचिका में प्रीति यादव ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे पुलिस अधिकारियों ने उनके घर में घुसकर उनके परिजन अनुज यादव और अंशू यादव को जबरन उठाकर ले गए। आरोप है कि उन्हें छह दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया गया। पुलिस ने प्रीति यादव से जबरन पत्र लिखवाया कि कोई हिरासत नहीं हुई और उन्होंने कोई याचिका दायर नहीं की। इसके बाद 14 सितंबर की रात सभी को रिहा किया गया।
हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को न्याय में बाधा डालने का प्रयास बताया और संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि वे प्रीति यादव और उनके परिजनों को धमकाने, परेशान करने या संपर्क करने की कोशिश न करें। अदालत ने प्रीति यादव और उनके भतीजे अनमोल यादव को 14 अक्तूबर को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया था।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रीति यादव ने पुलिस पर दबाव बनाने की शिकायत की। वहीं उन्होंने स्थानीय अधिवक्ता अवधेश मिश्रा को भी उच्च न्यायालय परिसर से फर्रुखाबाद पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की बात कही। कोर्ट ने इस दौरान एसपी को न्याय कक्ष में मौजूद रहने और अधिवक्ता अवधेश मिश्रा को पेश करने के निर्देश दिए।
कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता अवधेश मिश्रा ने बताया कि उन पर दबाव बनाने के लिए 11 अक्तूबर की रात में 100 से अधिक पुलिस वालों ने उसके घर पर दबिश दी। उनके न मिलने पर पुलिस डीबीआर आदि अपने साथ ले गई। घर में तोड़फोड़ भी की। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को भी सुनवाई करने का आदेश दिया।