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शाहजहांपुर क्षेत्र में रामगंगा कटरी में मिले बाघ के पंजों के निशान
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रामगंगा के किनारे कटरी में बाघ के पंजों के निशानों को देखते वन विभाग की टीम के सदस्य। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। वन विभाग और टाइगर स्पेशलिस्ट टीम को बाघ पकड़ने में सफलता नहीं मिली। शनिवार को शाहजहांपुर क्षेत्र में रामगंगा की कटरी में बाघ के पंजों के निशान टीम को मिले।
इसकी जानकारी पर हरदोई और शाहजहांपुर के वन विभाग की टीम ने कटरी क्षेत्र में कांबिंग की, लेकिन बाघ नजर नहीं आया। अब फर्रुखाबाद जिले से बाघ के जाने की संभावना जताई जा रही है।
तहसील क्षेत्र के गांव उदयपुर कंचनपुर में कई दिनों से गन्ने के खेतों में बाघ के घूमने से गांव के लोग भयभीत थे। बाघ को पकड़ने के लिए कई जिलों के वन विभाग के कर्मचारी, दुधवा नेशनल पार्क के डॉ. दयाशंकर, डॉ. सर्वेश राय, कानपुर चिड़ियाघर के डॉ. आरके सिंह टीम के साथ डेरा डाले हुए हैं।
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गन्ने के खेतों में कई जगह पिंजरे और निगरानी को नाइट विजन कैमरे लगाए गए। इसके बावजूद बाघ को टीम नहीं पकड़ पाई। शनिवार को टीम ने राम गंगा कटरी क्षेत्र में काबिंग की।
वहां राम गंगा किनारे बाघ के पंजे के निशान दिखाई दिए। इसके बाद टीम ने शाहजहांपुर क्षेत्र में राम गंगा कटरी क्षेत्र में कांबिंग की तो वहां भी बाघ के पंजों के निशान मिले।
इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ कटरी के माध्यम से रामगंगा पार कर शाहजहांपुर या हरदोई क्षेत्र में चला गया है। इसकी जानकारी पर शाहजहांपुर व हरदोई जिले के वन विभाग की टीम ने कटरी क्षेत्र में कांबिंग की, लेकिन बाघ नजर नहीं आया।
बाघ के जाने की संभावना से गांव उदयपुर कंचनपुर, सबलपुर, जगतपुर, रामपुर जोगराजपुर, लायकपुर, गौटिया, अंबरपुर के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। डॉ. आरके सिंह ने बताया कि रामगंगा के पार शाहजहांपुर जिले की कटरी में बाघ के पंजों के निशान मिले हैं।
इससे संभावना है कि बाघ इस जिले से शाहजहांपुर या हरदोई जिले की कटरी में चला गया है। वह किधर गया है, इसका पता नहीं लगा पा रहा है। उसे पकड़ने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जब तक बाघ पकड़ में नहीं आएगा, तब तक उसे पकड़ने का अभियान चलता रहेगा।
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इसकी जानकारी पर हरदोई और शाहजहांपुर के वन विभाग की टीम ने कटरी क्षेत्र में कांबिंग की, लेकिन बाघ नजर नहीं आया। अब फर्रुखाबाद जिले से बाघ के जाने की संभावना जताई जा रही है।
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तहसील क्षेत्र के गांव उदयपुर कंचनपुर में कई दिनों से गन्ने के खेतों में बाघ के घूमने से गांव के लोग भयभीत थे। बाघ को पकड़ने के लिए कई जिलों के वन विभाग के कर्मचारी, दुधवा नेशनल पार्क के डॉ. दयाशंकर, डॉ. सर्वेश राय, कानपुर चिड़ियाघर के डॉ. आरके सिंह टीम के साथ डेरा डाले हुए हैं।
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गन्ने के खेतों में कई जगह पिंजरे और निगरानी को नाइट विजन कैमरे लगाए गए। इसके बावजूद बाघ को टीम नहीं पकड़ पाई। शनिवार को टीम ने राम गंगा कटरी क्षेत्र में काबिंग की।
वहां राम गंगा किनारे बाघ के पंजे के निशान दिखाई दिए। इसके बाद टीम ने शाहजहांपुर क्षेत्र में राम गंगा कटरी क्षेत्र में कांबिंग की तो वहां भी बाघ के पंजों के निशान मिले।
इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ कटरी के माध्यम से रामगंगा पार कर शाहजहांपुर या हरदोई क्षेत्र में चला गया है। इसकी जानकारी पर शाहजहांपुर व हरदोई जिले के वन विभाग की टीम ने कटरी क्षेत्र में कांबिंग की, लेकिन बाघ नजर नहीं आया।
बाघ के जाने की संभावना से गांव उदयपुर कंचनपुर, सबलपुर, जगतपुर, रामपुर जोगराजपुर, लायकपुर, गौटिया, अंबरपुर के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। डॉ. आरके सिंह ने बताया कि रामगंगा के पार शाहजहांपुर जिले की कटरी में बाघ के पंजों के निशान मिले हैं।
इससे संभावना है कि बाघ इस जिले से शाहजहांपुर या हरदोई जिले की कटरी में चला गया है। वह किधर गया है, इसका पता नहीं लगा पा रहा है। उसे पकड़ने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जब तक बाघ पकड़ में नहीं आएगा, तब तक उसे पकड़ने का अभियान चलता रहेगा।