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Farrukhabad News: मुठभेड़ के मामले में एसपी और तत्कालीन इंस्पेक्टर पर अवमानना की तलवार

Tue, 01 Sep 2026 12:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:08 AM IST
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Threat of contempt action looms over SP and the then-Inspector in encounter case.
फर्रुखाबाद। मुठभेड़ में आरोपी के गोली लगने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने एसपी आरती सिंह व तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कायमगंज मदन मोहन चतुर्वेदी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के लिए प्रकरण को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया है।
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कायमगंज थाना क्षेत्र में 19 मार्च को हुई मुठभेड़ में कुलदीप के गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पुलिस पार्टी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई थी। अदालत ने छह अगस्त को आदेश जारी कर एसपी और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक को सात दिन के भीतर हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए मुठभेड़ में शामिल पुलिस पार्टी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा था। आदेश की प्रति सात अगस्त को विपक्षीगण को प्राप्त करा दी गई थी लेकिन निर्धारित अवधि में इसका अनुपालन नहीं किया गया।
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अदालत ने कुलदीप की 19 मार्च की मेडिकल रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके बाएं पैर में गोली लगने के प्रवेश और निकास के घाव दर्ज किए गए थे। चिकित्सीय परीक्षण में चोटें ताजा बताई गई थीं। अदालत ने माना कि उपलब्ध मेडिकल दस्तावेजों और कुलदीप के बयान से चोट की गंभीरता सामने आती है। हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र तिवारी को भी मुठभेड़ में गोली लगने की बात कही गई थी। धर्मेंद्र तिवारी की मेडिकल रिपोर्ट में कोहनी पर गोली लगने के बजाय कठोर एवं कुंद वस्तु से आई चोट दर्ज थी। बाद की विवेचना में पुलिसकर्मियों के बयानों में भी यह सामने आया कि धर्मेंद्र तिवारी को चोट खेत में गिरने से लगी थी।
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अदालत ने यह भी कहा कि विवेचक ने चोट की प्रकृति स्पष्ट हुए बिना 12 मई को आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। बाद में न्यायालय की ओर से नोटिस जारी होने के बाद 12 जून को पूरक मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराई गई, जिसमें चोट को साधारण बताया गया। न्यायालय ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश से प्राथमिकी दर्ज कराने पर रोक नहीं
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर छह अगस्त के न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को अगली तिथि तक उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। विशेष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के उक्त आदेश से न तो इस प्रकरण की कार्यवाही पर रोक लगी थी और न ही पुलिस पार्टी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से रोका गया था। चूंकि प्राथमिकी दर्ज ही नहीं हुई थी, इसलिए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी।

दोनों अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट को भेजा संदर्भ
न्यायालय ने कहा कि दोनों अधिकारियों को हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया था। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा में निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया। अदालत ने इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना मानते हुए पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई के लिए प्रकरण हाईकोर्ट को संदर्भित कर दिया।
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