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सत्ता की सह पर बिना परमीशन जुटे हजारों लोग
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संकिसा में स्तूप पर जाते डीएम व एसपी। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। दो दिन चले बुद्ध महोत्सव में जिला ही नहीं आसपास करीब सात जिलों के हजारों बौद्ध अनुयायी जुटे। इस आयोजन की जिला प्रशासन से परमीशन तक लेने की जरूरत नहीं समझी गई। इसके पीछे मुख्य वजह सत्ता की हनक रही। इस दफा पहली बार टीले की न तो बेरीकेडिंग कराई गई और न ही चारों ओर पुलिस-पीएसी तैनात की गई। यही नहीं टीले के ऊपर मात्र चार महिला पुलिस कर्मी व एक दरोगा की ड्यूटी लगाई गई थी।
दो दिन चले बुद्ध महोत्सव मेले में मेला लगा। इसमें सैकड़ों दुकानें लगीं। यही नहीं धम्म यात्रा में मैनपुरी, इटावा, एटा, बदायूं, कासगंज, शाहजहांपुर आदि जिलों के कई हजार बौद्ध अनुयाइयों की भीड़ पहुंची। धम्म यात्रा के दौरान संकिसा तिराहे से गांव तक बौद्ध धर्मियों का हुजूम उमड़ पड़ा। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बावजूद सुरक्षा के नाम पर सिर्फ थाना पुलिस ही थी। हद तो यह हो गई कि थानाध्यक्ष ने भीड़ की जानकारी उच्चाधिकारियों को देने की जरूरत तक नहीं समझी।
थाने के कार्यालय में ड्यूटी करने वाली चार महिला पुलिस कर्मियों को टीले पर मंदिर की सुरक्षा में लगाया गया। मगर जिस वक्त उपद्रवी टीले पर चढ़ कर मंदिर का ध्वज उखाड़ कर पंचशील लगा रहे थे, उस वक्त महिला पुलिस कर्मी तमाशबीन होकर सिर्फ वीडियो बनाने में लगी थीं। करीब 10 मिनट बाद एक दरोगा ऊपर पहुंचा। उसने युवाओं को रोकने का प्रयास किया। संख्या अधिक होने की वजह से उपद्रवी तोड़फोड़ करते रहे। जब उप द्रवियों ने अपनी मंशा पूरी कर ली, तब चार पुलिस कर्मियों ने पहुंचकर उन्हें हटाया।
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आयोजकों की पहुंच और मंशा का इसी के अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना परमीशन के उन्होेंने इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर लिया। आयोजक मंडल के सूत्र बताते हैं कि एसडीएम ने मौखिक अनुमति दे दी थी। इसके पीछे माना जा रहा है कि सत्तापक्ष का दखल होने की वजह से किसी भी अफसर ने हस्तक्षेप करने की जहमत नहीं उठाई।
एसडीएम सदर अनिल कुमार ने बताया कि उन्होंने आयोजन की परमीशन नहीं दी है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने भी माना कि इस आयोजन की कोई परमीशन नहीं ली गई थी। बिना परमीशन के ही आयोजन किया गया था। बेशक डीएम ने ए़डीएम और एएसपी की जांच कमेटी बना दी हो, मगर इतना साफ है कि नियम विरुद्ध कृत्य करने के लिए आयोजक जिम्मेदार हैं।
पुरातत्व विभाग की संपप्ति होने के चलते शासन स्तर से टीले की सुरक्षा के लिए पांच पीएसी के जवान 24 घंटे मुस्तैद रहते हैं। इन जवानों की ड्यूटी टीले की सुरक्षा करना है, मगर जिस वक्त उपद्रवी त़ोड़फोड़ कर रहे थे, उस वक्त यह लोग कहां थे, इसके बारे में कोई भी बताने को तैयार नहीं था। बताया जाता है कि गार्द के सिपाही टेंट के बाहर खड़ा था और टेंट में कुछ बुद्ध अनुयायी आराम कर रहे थे।
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दो दिन चले बुद्ध महोत्सव मेले में मेला लगा। इसमें सैकड़ों दुकानें लगीं। यही नहीं धम्म यात्रा में मैनपुरी, इटावा, एटा, बदायूं, कासगंज, शाहजहांपुर आदि जिलों के कई हजार बौद्ध अनुयाइयों की भीड़ पहुंची। धम्म यात्रा के दौरान संकिसा तिराहे से गांव तक बौद्ध धर्मियों का हुजूम उमड़ पड़ा। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बावजूद सुरक्षा के नाम पर सिर्फ थाना पुलिस ही थी। हद तो यह हो गई कि थानाध्यक्ष ने भीड़ की जानकारी उच्चाधिकारियों को देने की जरूरत तक नहीं समझी।
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थाने के कार्यालय में ड्यूटी करने वाली चार महिला पुलिस कर्मियों को टीले पर मंदिर की सुरक्षा में लगाया गया। मगर जिस वक्त उपद्रवी टीले पर चढ़ कर मंदिर का ध्वज उखाड़ कर पंचशील लगा रहे थे, उस वक्त महिला पुलिस कर्मी तमाशबीन होकर सिर्फ वीडियो बनाने में लगी थीं। करीब 10 मिनट बाद एक दरोगा ऊपर पहुंचा। उसने युवाओं को रोकने का प्रयास किया। संख्या अधिक होने की वजह से उपद्रवी तोड़फोड़ करते रहे। जब उप द्रवियों ने अपनी मंशा पूरी कर ली, तब चार पुलिस कर्मियों ने पहुंचकर उन्हें हटाया।
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आयोजकों की पहुंच और मंशा का इसी के अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना परमीशन के उन्होेंने इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर लिया। आयोजक मंडल के सूत्र बताते हैं कि एसडीएम ने मौखिक अनुमति दे दी थी। इसके पीछे माना जा रहा है कि सत्तापक्ष का दखल होने की वजह से किसी भी अफसर ने हस्तक्षेप करने की जहमत नहीं उठाई।
एसडीएम सदर अनिल कुमार ने बताया कि उन्होंने आयोजन की परमीशन नहीं दी है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने भी माना कि इस आयोजन की कोई परमीशन नहीं ली गई थी। बिना परमीशन के ही आयोजन किया गया था। बेशक डीएम ने ए़डीएम और एएसपी की जांच कमेटी बना दी हो, मगर इतना साफ है कि नियम विरुद्ध कृत्य करने के लिए आयोजक जिम्मेदार हैं।
पुरातत्व विभाग की संपप्ति होने के चलते शासन स्तर से टीले की सुरक्षा के लिए पांच पीएसी के जवान 24 घंटे मुस्तैद रहते हैं। इन जवानों की ड्यूटी टीले की सुरक्षा करना है, मगर जिस वक्त उपद्रवी त़ोड़फोड़ कर रहे थे, उस वक्त यह लोग कहां थे, इसके बारे में कोई भी बताने को तैयार नहीं था। बताया जाता है कि गार्द के सिपाही टेंट के बाहर खड़ा था और टेंट में कुछ बुद्ध अनुयायी आराम कर रहे थे।

संकिसा में विधायक सुशील शाक्य से बात करते डीएम व एसपी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

संकिसा में घर की छतों से तमाशा देख रहे लोगों को अंदर जाने को कहते पुलिस कर्मी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

संकिसा में स्तूप परिसर से अनुयायियों को दौड़ाते पुलिस कर्मी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD