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घर में रोटी नहीं थी, फास्ट फूड खाया तो हो गई मौत
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फर्रुखाबाद। दुकान पर नौकरी करने वाले पिता को तीन महीने से वेतन नहीं मिला। इससे घर में कई दिन से रोटी नहीं बनी थी। भूखा किशोर दुकान से फास्टफूड लेकर आया। उसने खुद खाया और भाई व दादी को भी खिलाया। कुछ देर बाद किशोर की हालत बिगड़ गई। परिजन निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पिता ने बेटी की बीमारी से दुकान मालिक से रुपये एडवांस लिए थे, इसलिए तीन महीने से वेतन भी नहीं मिल रहा है।
शहर के मोहल्ला खतराना निवासी मनोज तिवारी एक दुकान पर नौकरी करते हैं। उनके घर में रोटी बनाने के लाले हैं। गुरुवार को भी रोटी नहीं बनी थी। बड़ा बेटा प्रिंस (14) शाम को मोहल्ले की दुकान से फास्टफूड लाया। प्रिंस, दादी सुमन और छोटे मंदबुद्धि भाई वाशु ने फास्टफूड खाया।
कुछ देर बाद प्रिंस को उल्टियां होने लगीं। घर में पैसे नहीं थे और मनोज भी घर में नहीं थे। इससे परिजन प्रिंस को डाक्टर के यहां नहीं ले गए। रात 11 बजे इलेक्ट्राल लाकर पिलाया, तो कुछ आराम हुआ लेकिन कुछ देर बाद उल्टियां शुरू हो गईं। शुक्रवार सुबह 10 बजे हालत बिगड़ने पर मनोज बेटे को निजी डॉक्टर के यहां ले गए। डॉक्टर दूसरी जगह ले जाने की सलाह दी। नाला मछरट्टा स्थित एक अस्पताल में डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मनोज ने बताया कि डाक्टर ने मौत का कारण फूड प्वाइजनिंग बताया है। किशोर का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
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मनोज ने बताया कि तीन माह पहले बेटी बिट्टी बीमार हो गई थी। निजी अस्पताल में उसे खून चढ़ाना पड़ा था। पांच हजार रुपये महीनेदारी पर दुकान मालिक से रुपये लिए थे। इससे तीन माह से पगार नहीं मिली। आठ दिन मनोज भी बीमार हो गए। काम पर नहीं पहुंचे तो मालिक घर आकर फटकार गया था।
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शहर के मोहल्ला खतराना निवासी मनोज तिवारी एक दुकान पर नौकरी करते हैं। उनके घर में रोटी बनाने के लाले हैं। गुरुवार को भी रोटी नहीं बनी थी। बड़ा बेटा प्रिंस (14) शाम को मोहल्ले की दुकान से फास्टफूड लाया। प्रिंस, दादी सुमन और छोटे मंदबुद्धि भाई वाशु ने फास्टफूड खाया।
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कुछ देर बाद प्रिंस को उल्टियां होने लगीं। घर में पैसे नहीं थे और मनोज भी घर में नहीं थे। इससे परिजन प्रिंस को डाक्टर के यहां नहीं ले गए। रात 11 बजे इलेक्ट्राल लाकर पिलाया, तो कुछ आराम हुआ लेकिन कुछ देर बाद उल्टियां शुरू हो गईं। शुक्रवार सुबह 10 बजे हालत बिगड़ने पर मनोज बेटे को निजी डॉक्टर के यहां ले गए। डॉक्टर दूसरी जगह ले जाने की सलाह दी। नाला मछरट्टा स्थित एक अस्पताल में डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। मनोज ने बताया कि डाक्टर ने मौत का कारण फूड प्वाइजनिंग बताया है। किशोर का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
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मनोज ने बताया कि तीन माह पहले बेटी बिट्टी बीमार हो गई थी। निजी अस्पताल में उसे खून चढ़ाना पड़ा था। पांच हजार रुपये महीनेदारी पर दुकान मालिक से रुपये लिए थे। इससे तीन माह से पगार नहीं मिली। आठ दिन मनोज भी बीमार हो गए। काम पर नहीं पहुंचे तो मालिक घर आकर फटकार गया था।