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मौसम बदलते ही बाल रोगियों की संख्या बढ़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Tue, 21 Feb 2017 10:33 PM IST
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इलाज के लिए अपनी मां के साथ आया अल्तमस।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मौसम के करवट लेते ही बाल रोगियों की संख्या बढ़ गई है। अधिकतर बाल रोगी वायरल से पीड़ित हैं। लोहिया अस्पताल में दवा लेने आए अल्तमस (5) पुत्र मोहम्मद शाकिर निवासी याकूतगंज और कुनाल (9) पुत्र अनिल निवासी ढिलावल समेत कई बाल रोगियों को मंगलवार को देखा गया।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. बीबी पुष्कर ने बताया कि मौसम बदलने से बाल रोगियों की संख्या बढ़ रही है। 100 से 120 तक बाल रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एकाएक गर्मी पड़ने के कारण बाल रोगियों की संख्या बढ़ गई है। गर्मी के चलते आने वाले समय में मच्छरजनित रोग हो सकते हैं। इसके लिए दवाइयां मंगाने के लिए मांगपत्र भेज दिया है। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
निवर्तमान उप मुख्य चिकित्साधिकारी व वरिष्ठ फिजीशियन डा. केएम द्विवेदी का कहना है कि गर्मी के शुरूआती दौर में ही मच्छर जनित रोग शुरू हो जाते हैं। इनसे बचने का एक ही उपाए है कि लोग मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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बच्चों और बड़े सभी को फुल आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए। घरों के आसपास कूलर, फ्रिज और गमलों में पानी नहीं भरना चाहिए। पानी भरा रहने से उनमें लार्वा पैदा हो जाते हैं। साफ पानी में डेंगू का मच्छर पैदा होता है। हर व्यक्ति को अपने घरों के आसपास पानी नहीं भरने देना चाहिए।
इसके साथ ही साथ ग्रीष्म ऋतु आगमन और शरद ऋतु की विदाई पर महिलाएं छोटे बच्चों को कपड़े पहनाने में परहेज करने लगती हैं, जो कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस ऋतु में ज्यादातर बच्चे निमोनिया का शिकार हो जाते हैं और समय पर दवाई न लेने से उनकी हालत बिगड़ जाती है।
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मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. बीबी पुष्कर ने बताया कि मौसम बदलने से बाल रोगियों की संख्या बढ़ रही है। 100 से 120 तक बाल रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एकाएक गर्मी पड़ने के कारण बाल रोगियों की संख्या बढ़ गई है। गर्मी के चलते आने वाले समय में मच्छरजनित रोग हो सकते हैं। इसके लिए दवाइयां मंगाने के लिए मांगपत्र भेज दिया है। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
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निवर्तमान उप मुख्य चिकित्साधिकारी व वरिष्ठ फिजीशियन डा. केएम द्विवेदी का कहना है कि गर्मी के शुरूआती दौर में ही मच्छर जनित रोग शुरू हो जाते हैं। इनसे बचने का एक ही उपाए है कि लोग मच्छरदानी का प्रयोग करें।
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बच्चों और बड़े सभी को फुल आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए। घरों के आसपास कूलर, फ्रिज और गमलों में पानी नहीं भरना चाहिए। पानी भरा रहने से उनमें लार्वा पैदा हो जाते हैं। साफ पानी में डेंगू का मच्छर पैदा होता है। हर व्यक्ति को अपने घरों के आसपास पानी नहीं भरने देना चाहिए।
इसके साथ ही साथ ग्रीष्म ऋतु आगमन और शरद ऋतु की विदाई पर महिलाएं छोटे बच्चों को कपड़े पहनाने में परहेज करने लगती हैं, जो कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस ऋतु में ज्यादातर बच्चे निमोनिया का शिकार हो जाते हैं और समय पर दवाई न लेने से उनकी हालत बिगड़ जाती है।