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गंगा में गिर रहा धिमरपुरा नाले का पानी
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फर्रुखाबाद। मेला रामनगरिया और प्रयागराज के माघ मेले के दौरान 14 जनवरी से एक मार्च तक गंगा को शुद्ध रखने का फरमान निरर्थक साबित हो रहा है। शहर से निकलने वाले एक नाले पर पानी के बायो ट्रीटमेंट के लिए आधा टैंक भरा मिला, जबकि धिमरपुरा नाले पर रखा टैंक खाली है। इसके अलावा सोता बहादुरपुर गांव के दो नाले गंगा में गिर रहे हैं। इन्हें न तो बंद किया गया और न ही पानी के ट्रीटमेंट की व्यवस्था की गई।
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने 17 दिसंबर को गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए रोस्टर के अनुसार कपड़ा छपाई उद्योगों, नालों के पानी को रोकने अथवा बायोरेमिडियेशन के निर्देश दिए थे। इसकी मॉनीटरिंग के लिए पांच अफसरों की टीम भी बनाई थी, मगर आदेशों का नियमित पालन नहीं किया जा रहा है। शनिवार को भैरो मंदिर के पास एक स्थान पर किनारे रखे टैंक से पानी की कुछ बूंदे टपकती दिखीं।
इसके अलावा धिमरपुरा के बड़े नाले का गंदा पानी गंगा में जा रहा था। यहां एक स्थान पर बायोरेमिडिएशन के लिए रखा टैंक खाली था। जिस स्थान पर गंगा में पानी गिर रहा था, वहां पानी काला दिखाई दे रहा है। यही नहीं पांचाल घाट पुल के पूर्व दिशा में बसे गांव सोता बहादुरपुर के दो नाले भी गंगा में बेरोकटोक गिर रहे हैं। इन नालों को न तो बंद किया गया और न ही ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की जरूरत समझी गई। लिहाजा गंगा में गंदा पानी मिल रहा है। इससे साफ है कि जिम्मेदार शासन और जिलाधिकारी के आदेशों पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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जिम्मेदार निभा रहे औपचारिकता
डीएम ने गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट, जिला उद्योग एवं उद्योग प्रोत्साहन केंद्र, गंगा प्रदूषण इकाई के सुपरवाइजर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के सहायक पर्यावरण अभियंता और वैज्ञानिक सहायक की टीम बनाई थी। प्रदूषण विभाग के अधिकारी भी जांच के लिए यहां आते हैं, लेकिन टीम औपचारिकता ही निभा रही है।
शनिवार को भी कई जगह जांच की। धिमरपुरा नाले की ओर नहीं जा सका। रविवार को उसे दिखवाकर पालिका को सूचित करूंगा। सोता बहादुरपुर नालों के बारे में भी अधिकारियों को जानकारी दी है। -फरेश कुमार, सहायक पर्यावरण अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने 17 दिसंबर को गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए रोस्टर के अनुसार कपड़ा छपाई उद्योगों, नालों के पानी को रोकने अथवा बायोरेमिडियेशन के निर्देश दिए थे। इसकी मॉनीटरिंग के लिए पांच अफसरों की टीम भी बनाई थी, मगर आदेशों का नियमित पालन नहीं किया जा रहा है। शनिवार को भैरो मंदिर के पास एक स्थान पर किनारे रखे टैंक से पानी की कुछ बूंदे टपकती दिखीं।
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इसके अलावा धिमरपुरा के बड़े नाले का गंदा पानी गंगा में जा रहा था। यहां एक स्थान पर बायोरेमिडिएशन के लिए रखा टैंक खाली था। जिस स्थान पर गंगा में पानी गिर रहा था, वहां पानी काला दिखाई दे रहा है। यही नहीं पांचाल घाट पुल के पूर्व दिशा में बसे गांव सोता बहादुरपुर के दो नाले भी गंगा में बेरोकटोक गिर रहे हैं। इन नालों को न तो बंद किया गया और न ही ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की जरूरत समझी गई। लिहाजा गंगा में गंदा पानी मिल रहा है। इससे साफ है कि जिम्मेदार शासन और जिलाधिकारी के आदेशों पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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जिम्मेदार निभा रहे औपचारिकता
डीएम ने गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट, जिला उद्योग एवं उद्योग प्रोत्साहन केंद्र, गंगा प्रदूषण इकाई के सुपरवाइजर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के सहायक पर्यावरण अभियंता और वैज्ञानिक सहायक की टीम बनाई थी। प्रदूषण विभाग के अधिकारी भी जांच के लिए यहां आते हैं, लेकिन टीम औपचारिकता ही निभा रही है।
शनिवार को भी कई जगह जांच की। धिमरपुरा नाले की ओर नहीं जा सका। रविवार को उसे दिखवाकर पालिका को सूचित करूंगा। सोता बहादुरपुर नालों के बारे में भी अधिकारियों को जानकारी दी है। -फरेश कुमार, सहायक पर्यावरण अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।