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डिप्टी जेलर के थप्पड़ ने कराया जिला जेल में बवाल
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फर्रुखाबाद। एसआईटी की अभी तक की जांच में जेल में बवाल के लिए दोनों डिप्टी जेलर का संवेदनहीन व्यवहार जिम्मेदार है। कैदी की मौत की बात पर एक डिप्टी जेलर ठहाका लगाकर हंसे थे और दूसरे ने बंदी को तमाचा जड़ दिया था। डिप्टी जेलर के तमाचा मारने से भड़के बंदियों ने बवाल शुरू कर दिया था।
जिले जेल के कैदी की सैफई मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। वह बैरक नंबर छह में बंद था। जेल में संदीप का चचेरा भाई संजीव भी बंद है। सात नवंबर की सुबह डिप्टी जेलर शैलेश कुमार सोनकर और अखिलेश मिश्रा बैरक नंबर नौ में चाय-नाश्ता बंटवाने गए थे। इस दौरान जेल में बवाल होने पर एक बंदी की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल और बंदी की मौत की एसआईटी जांच चल रही है।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच में सामने आया है कि नाश्ता वितरण के दौरान बंदी संजीव ने डिप्टी जेलर से कहा कि अगर संदीप का सही समय पर इलाज कराया जाता तो उसकी मौत नहीं होती। इस पर एक डिप्टी जेलर ने ठहाका लगाकर कहा था कि ऐसे तो बंदी मरते रहते हैं। यह कहकर वह बैरक से निकल आए। डिप्टी जेलर के व्यवहार का बंदी संजीव ने विरोध किया तो दूसरे डिप्टी जेलर ने उसे तमाचा जड़ दिया था।
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इसके बाद संजीव और उसके साथी बंदियों ने डिप्टी जेलर शैलेश कुमार सोनकर को पकड़ पिटाई शुरू कर दी। उस समय डिप्टी जेलर अखिलेश मिश्रा प्रागंण में दाढ़ी बनवा रहे थे। जानकारी पर वह भी मौके पर पहुंच गए। बंदियों ने अखिलेश मिश्रा पर भी हमला कर दिया। इसके बाद तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई। अभी तक की जांच में दोनों डिप्टी जेलर की भूमिका सही नहीं पाई गई है। एसआईटी की जांच अभी चल रही है।
डिप्टी जेलर कैंटीन में बिकवाते थे बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू
फर्रुखाबाद। जांच में यह भी पता चला है कि डिप्टी जेलर जेल में कैंटी का संचालन कर रहे थे। जिला जेल की कैंटीन में पैक सामान बेचने का शासनादेेश है। किंतु डिप्टी जेलर कैंटीन में जलेबी, पूड़ी, सब्जी, रसगुल्ले, मिठाई के साथ बीड़ी, सिगरेट, मसाला, तंबाकू भी बिकवाते थे। दिवाली व भइयादूज पर कई क्विंटल मिठाई बाहर से मंगवाकर कैंटीन में रखी गई थी। रसगुल्ले भी बनवाए गए थे। सामान महंगे दामों पर बेचा जाता था। सात नवंबर को बवाल के बाद कैंटीन बंद कर दी गई और माल खराब हो गया। अब माल सप्लाई करने वाले चार ठेकेदार भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं। (संवाद)
बंदियों के बर्तन छीने, चूल्हे किए गए ध्वस्त
जांच में यह भी पता चला है कि 500 से अधिक बंदी जेल में बना खाना नहीं खाते थे। वह बैरक में चूल्हे पर खाना बनवाकर खाते थे। बंदियों के पास खाना बनाने के बर्तन भी थे। सात नवंबर को बवाल के बाद बंदियों के चूल्हे तोड़ कर बर्तन जमा करवा लिए गए।
बंदियों का राशन भी डिप्टी जेलर ले जाते थे घर
जिला जेल में लगभग 1300 बंदी हैं। एक बंदी को प्रतिदिन 140 ग्राम दाल देने का प्रावधान है। मैस के इंचार्ज डिप्टी जेलर राशन में कटौती करवाकर खाना बनवाते थे। बचा हुआ राशन घर ले जाते थे। शिकायत मिलने पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. रामधनी ने राशन ले जाने पर रोक लगा दी थी।
जेल में हुआ घायल बंदियों का एक्सरे
जिला जेल में बवाल के बाद पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी थीं। इसमें सैकड़ों बंदी घायल हुए थे। कुछ बंदियों के हाथ-पैर टूटे हैं। बंदियों का बाहर इलाज करवाने पर जेल प्रशासन की पोल खुल सकती थी। कई दिन से जेल में ही एक्सरे मशीन मंगवाने के लिए पत्राचार किया जा रहा था। सोमवार को लोहिया अस्पताल से एक्सरे मशीन लेकर टेक्नीशियन जिला जेल में पहुंचे। इस मशीन से बंदियों का एक्सरे किया गया। इसके पहले क्षयरोग अस्पताल के टेक्नीशियन कपिल ने जेल की पुरानी एक्सरे मशीन को सही करने का प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली।
अवकाश से लौटे अधीक्षक, चार्ज छोड़ा
डेंगू होने से जिला जेल के अधीक्षक डॉ. रामधनी डेंगू अवकाश पर थे। उनकी पत्नी को भी डेंगू हो गया था। सोमवार को अधीक्षक अवकाश से जिला जेल लौट आए और दोपहर बाद अधीक्षक का चार्ज जेलर अखिलेश कुमार को सौंप दिया। डॉ. रामधनी का प्रमोशन कर सेंट्रल जेल इटावा में वरिष्ठ अधीक्षक के पद पर स्थानांतरण कर दिया गया है। सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद शुक्ला ने बताया कि डॉ. रामधनी अधीक्षक का चार्ज छोड़कर रवाना हो गए हैं।
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जिले जेल के कैदी की सैफई मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। वह बैरक नंबर छह में बंद था। जेल में संदीप का चचेरा भाई संजीव भी बंद है। सात नवंबर की सुबह डिप्टी जेलर शैलेश कुमार सोनकर और अखिलेश मिश्रा बैरक नंबर नौ में चाय-नाश्ता बंटवाने गए थे। इस दौरान जेल में बवाल होने पर एक बंदी की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल और बंदी की मौत की एसआईटी जांच चल रही है।
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सूत्रों के अनुसार एसआईटी की जांच में सामने आया है कि नाश्ता वितरण के दौरान बंदी संजीव ने डिप्टी जेलर से कहा कि अगर संदीप का सही समय पर इलाज कराया जाता तो उसकी मौत नहीं होती। इस पर एक डिप्टी जेलर ने ठहाका लगाकर कहा था कि ऐसे तो बंदी मरते रहते हैं। यह कहकर वह बैरक से निकल आए। डिप्टी जेलर के व्यवहार का बंदी संजीव ने विरोध किया तो दूसरे डिप्टी जेलर ने उसे तमाचा जड़ दिया था।
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इसके बाद संजीव और उसके साथी बंदियों ने डिप्टी जेलर शैलेश कुमार सोनकर को पकड़ पिटाई शुरू कर दी। उस समय डिप्टी जेलर अखिलेश मिश्रा प्रागंण में दाढ़ी बनवा रहे थे। जानकारी पर वह भी मौके पर पहुंच गए। बंदियों ने अखिलेश मिश्रा पर भी हमला कर दिया। इसके बाद तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई। अभी तक की जांच में दोनों डिप्टी जेलर की भूमिका सही नहीं पाई गई है। एसआईटी की जांच अभी चल रही है।
डिप्टी जेलर कैंटीन में बिकवाते थे बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू
फर्रुखाबाद। जांच में यह भी पता चला है कि डिप्टी जेलर जेल में कैंटी का संचालन कर रहे थे। जिला जेल की कैंटीन में पैक सामान बेचने का शासनादेेश है। किंतु डिप्टी जेलर कैंटीन में जलेबी, पूड़ी, सब्जी, रसगुल्ले, मिठाई के साथ बीड़ी, सिगरेट, मसाला, तंबाकू भी बिकवाते थे। दिवाली व भइयादूज पर कई क्विंटल मिठाई बाहर से मंगवाकर कैंटीन में रखी गई थी। रसगुल्ले भी बनवाए गए थे। सामान महंगे दामों पर बेचा जाता था। सात नवंबर को बवाल के बाद कैंटीन बंद कर दी गई और माल खराब हो गया। अब माल सप्लाई करने वाले चार ठेकेदार भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं। (संवाद)
बंदियों के बर्तन छीने, चूल्हे किए गए ध्वस्त
जांच में यह भी पता चला है कि 500 से अधिक बंदी जेल में बना खाना नहीं खाते थे। वह बैरक में चूल्हे पर खाना बनवाकर खाते थे। बंदियों के पास खाना बनाने के बर्तन भी थे। सात नवंबर को बवाल के बाद बंदियों के चूल्हे तोड़ कर बर्तन जमा करवा लिए गए।
बंदियों का राशन भी डिप्टी जेलर ले जाते थे घर
जिला जेल में लगभग 1300 बंदी हैं। एक बंदी को प्रतिदिन 140 ग्राम दाल देने का प्रावधान है। मैस के इंचार्ज डिप्टी जेलर राशन में कटौती करवाकर खाना बनवाते थे। बचा हुआ राशन घर ले जाते थे। शिकायत मिलने पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. रामधनी ने राशन ले जाने पर रोक लगा दी थी।
जेल में हुआ घायल बंदियों का एक्सरे
जिला जेल में बवाल के बाद पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी थीं। इसमें सैकड़ों बंदी घायल हुए थे। कुछ बंदियों के हाथ-पैर टूटे हैं। बंदियों का बाहर इलाज करवाने पर जेल प्रशासन की पोल खुल सकती थी। कई दिन से जेल में ही एक्सरे मशीन मंगवाने के लिए पत्राचार किया जा रहा था। सोमवार को लोहिया अस्पताल से एक्सरे मशीन लेकर टेक्नीशियन जिला जेल में पहुंचे। इस मशीन से बंदियों का एक्सरे किया गया। इसके पहले क्षयरोग अस्पताल के टेक्नीशियन कपिल ने जेल की पुरानी एक्सरे मशीन को सही करने का प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली।
अवकाश से लौटे अधीक्षक, चार्ज छोड़ा
डेंगू होने से जिला जेल के अधीक्षक डॉ. रामधनी डेंगू अवकाश पर थे। उनकी पत्नी को भी डेंगू हो गया था। सोमवार को अधीक्षक अवकाश से जिला जेल लौट आए और दोपहर बाद अधीक्षक का चार्ज जेलर अखिलेश कुमार को सौंप दिया। डॉ. रामधनी का प्रमोशन कर सेंट्रल जेल इटावा में वरिष्ठ अधीक्षक के पद पर स्थानांतरण कर दिया गया है। सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद शुक्ला ने बताया कि डॉ. रामधनी अधीक्षक का चार्ज छोड़कर रवाना हो गए हैं।