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बिना पढ़ाई के हो गई परीक्षा
अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:10 PM IST
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परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फर्रुखाबाद। प्रदेश भर के परिषदीय विद्यालय नौनिहालों को बेरोजगार बनाने की कार्यशाला साबित हो रहे हैं। अनदेखी का आलम यह है कि प्रथम सत्र की परीक्षा 16 अगस्त को समाप्त हो गई और आज तक बच्चों को मिलने वाली निशुल्क पुस्तकों की खेप किसी भी विद्यालय में नहीं पहुंची है। पाठ्य पुस्तकें मुख्यालय पर न पहुंचने की कमी फर्रुखाबाद के विद्यालयों को ही नहीं खल रही है, बल्कि प्रदेश भर में कहीं भी पाठ्य पुस्तकें अभी तक नहीं भेजी गई हैं।
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सरकार की ओर से वर्ष 2004-05 से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा अध्ययन करने वाले बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस साल पहले शिक्षा सत्र की परीक्षा हो जाने के बाद भी पुस्तकें परिषदीय विद्यालयों में नहीं पहुंची हैं। जिले में प्राथमिक विद्यालयों में 1,30,169 और परिषद के जूनियर स्कूलों में 35,372 छात्र-छात्राएं शिक्षा अध्ययन कर रही हैं। यहां 1290 प्राथमिक और 565 जूनियर विद्यालय हैं।
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इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पुस्तकें न मिलने के कारण यह सभी विद्यालय बेरोजगार बनाने की कार्यशाला साबित हो रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश तो दिए जा रहे हैं लेकिन विद्यालय के शिक्षकों व प्रधानाध्यापक को कक्षा 1 से लेकर 8 तक किसी भी छात्र-छात्रा को फेल करने का अधिकार नहीं है।
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उच्च शिक्षा की नींव समझी जाने वाली प्राथमिक शिक्षा पूरी तरह से गुणवत्ताहीन हो गई है। इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को मलाल है कि एक तरफ सरकार शिक्षा में गुणवत्ता की बात कर रही है और दूसरी तरफ बिना पुस्तकों के छात्रों को शिक्षा पढ़ाई करवा रही है।
अध्यापकों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा उच्च शिक्षा की नींव होती है और कमजोर नींव पर उच्च शिक्षा की इमारत कैसे खड़ी हो सकेगी। इसको लेकर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक परेशान हैं। शिक्षकों का कहना है कि शत-प्रतिशत नामांकन की भी जिम्मेदारी उन पर डाली गई है। जिस तरह से परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। उससे साफ जाहिर है कि उन्हें बेरोजगार होना पड़ेगा।
बीएसए संदीप चौधरी ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में इस वर्ष पाठ्यपुस्तकें आने में निश्चित विलंब हुआ है। केवल फर्रुखाबाद में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। टेंडर होने में विलंब रहा। यही हमें जानकारी दी गई है। पुस्तकों की खेप शीघ्र आने वाली है।