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डूबतों को मिला ‘फरिश्तों’ का सहारा
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Fri, 01 Jul 2016 11:24 PM IST
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जहां फरिश्ते बनकर आएं नाबालिग नाविकों ने छह लोगों को मौत के मुंह से खींच लिया।
- फोटो : अमर उजाला
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‘जरा सा काम मुश्किल है, मुझे मालूम है लेकिन, अगर हो चाह मन में तो करिश्मा हो भी सकता है’। कुछ ऐसा ही करिश्मा पांचाल घाट में देखने को मिल। जहां फरिश्ते बनकर आएं नाबालिग नाविकों ने छह लोगों को मौत के मुंह से खींच लिया। उनकी दिलेरी की चर्चा हर जुबान में हैं।
गांव सोताबहादुरपुर के रहने वाले नाविक उम्मेर का कहना है कि यह घटना उनकी आंखों के सामने घटी। जिस समय यह लोग गंगा में डूब रहे थे, उस समय वह फर्रुखाबाद की तरफ गंगा तट पर मौजूद था। इनकी उछल-कूद को देखकर वह आनन-फानन अपने पारिवारिक भाई सालिब को साथ लेकर मौके पर पहुंचा और उसने इन डूबते हुए लोगों को बांस-बल्लियां थमाकर निकाल लिया।
छह लोगों को उसने जीवित बचा लिया। यह लोग उस समय यह नहीं बता पाए कि इनके साथ और कितने लोग थे। बाद में जब पता चला तो काफी देर हो चुकी थी। गंगा की तेज धार होने के कारण वह पता नहीं कितने आगे बढ़ गए होंगे। इस वजह से उन्हें निकाल नहीं सके।
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गांव सोताबहादुरपुर के रहने वाले नाविक उम्मेर का कहना है कि यह घटना उनकी आंखों के सामने घटी। जिस समय यह लोग गंगा में डूब रहे थे, उस समय वह फर्रुखाबाद की तरफ गंगा तट पर मौजूद था। इनकी उछल-कूद को देखकर वह आनन-फानन अपने पारिवारिक भाई सालिब को साथ लेकर मौके पर पहुंचा और उसने इन डूबते हुए लोगों को बांस-बल्लियां थमाकर निकाल लिया।
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छह लोगों को उसने जीवित बचा लिया। यह लोग उस समय यह नहीं बता पाए कि इनके साथ और कितने लोग थे। बाद में जब पता चला तो काफी देर हो चुकी थी। गंगा की तेज धार होने के कारण वह पता नहीं कितने आगे बढ़ गए होंगे। इस वजह से उन्हें निकाल नहीं सके।
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