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नियमों के फंदे में गई खाताधारक की जान

Tue, 05 Apr 2016 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद Updated Tue, 05 Apr 2016 01:37 AM IST
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The rules in the trap of death of the account holder
रामसनेही( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

आर्यावर्त ग्रामीण बैंक चुरसई में बैंक कर्मियों की हीला हवाली से बीमार खाताधारक की मौत हो गई। परिजनों ने शव बैंक में रखकर जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि यदि समय रहते बैंक कर्मियों ने भुगतान कर दिया होता तो खातेदार की जान बच सकती थी।

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थाना जहानगंज के गांव रुनी चुरसई के रहने वाले रामसनेही पिछले दो माह से दमा की बीमार चल रहे थे। उनके पुत्र देवेश और मनोज अपने पिता रामसनेही को ट्रैक्टर-ट्राली में लिटाकर बैंक लाए और बैंक अधिकारियों को बताया कि पिता के खाते में केसीसी के पड़े 74 हजार रुपये में से 72 हजार रुपये निकाल दें।
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बैंक प्रबंधक सतीश पाठक ने बिड्राल पर दस्तखत कराने के लिए फील्ड आफिसर प्रमोद वर्मा को भेजा। प्रमोद वर्मा ने उनकी हालत को गंभीर देखकर अंगूठा लगवा लिया और अंदर आकर प्रबंधक को बताया कि न रामसनेही बोल पा रहे हैं और न ही देख पा रहे हैं। मैनेजर ने उनसे गवाह लाने की बात कही तो तो वहां पर मौजूद रामसनेही के भाई रामबाबू ने गुस्से में बिड्राल फाड़ दिया।
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इससे पहले रामसनेही के पुत्र देवेंद्र ने बैंक मैनेजर से 15-20 हजार रुपये ही निकाल देने का अनुरोध किया। कहा कि इससे उनके पिता का इलाज शुरू हो जाएगा लेकिन बैंक मैनेजर ने मना कर दिया। वह लोग रामसनेही को अस्पताल ले जाने लगे। रास्ते में रामसनेही की मौत हो गई। परिजनाें ने शव लाकर बैंक के अंदर रख दिया और हंगामा करने लगे।

परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते उनके पिता को पैसा दे दिया जाता तो उनकी जान बच सकती थी। लगभग दो घंटे तक चले हंगामे के बाद मौके पर फर्रुखाबाद विकास मंच के नेता मोहन अग्रवाल और पूर्व जिला पंचायत सदस्य फतेहचंद भी वहां पहुंच गए। इन लोगों ने भी बैंक कर्मियों को दोषी ठहराया। घटना की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई। दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास किए जा रहे हैं। बैंक में हुए हंगामे की सूचना पाकर सीनियर मैनेजर मदुसूदन श्रीवास्तव और वीके सिंह भी मौके पर पहुंच गए। फील्ड आफिसर प्रमोद का कहना है कि केसीसी का यह पैसा रामसनेही के बचत खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था।

शाखा प्रबंधक, सतीशचंद्र पाठक ने बताया कि खाताधारक रामसनेही पूरी तरह से बेहोश था। इसके बाद भी उसे इलाज के लिए 20-25 हजार रुपये देने को कहा। उसके बेटे 72 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। इस वजह से गवाह की मांग की गई। अब समझौता हो गया है। उसके बेटों के नाम लोन कर दिया जाएगा। बैंक से हर संभव सहायता दी जाएगी।


विजया बैंक के शाखा प्रबंधक जयवर्द्धन ने किसी भी बैंक अधिकारी के सामने यदि खाताधारक बीमार होने पर घर पर भी हस्ताक्षर करता है तो उसे भुगतान दे दिया जाना चाहिए। ऐसा नियम बैंक नियमावली में है।

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