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बौद्ध धर्म गुरुओं ने किया अविधम्मा का पाठ
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Mon, 07 Nov 2016 11:05 PM IST
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स्तूप की पूजा करते भंते।
- फोटो : amarujala
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अंतर्राष्ट्रीय अविधम्मा तृतीय कार्यक्रम में भगवान बुद्ध की तपस्थली संकिसा में विश्व भर से पहुंचे बौद्ध धर्म गुरुओं के कारण संकिसा में बौद्ध धर्म की भीनी-भीनी फुहार पड़ रहीं है। इनके ध्यान और पूजा अर्चना को देख कर लोग मानसिक शांति और आत्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं।
जहां धर्म गुरु भगवान बुद्ध की देशनाओं पर प्रकाश डाल रहे वहीं दूसरी ओर ध्यान, भजन पूजन करके अध्यात्म का अनूठा संदेश दे रहे हैं।
कार्यक्रम के दूसरे दिन भगवान बुद्ध के ऊपर चर्चा करते हुए वर्मा से आये इच्चा बल भंते ने कहा कि भगवान बुद्ध इंद्र और ब्रम्हा के साथ संकिसा के इसी स्तूप पर अवतरित हुए थे। तत्पश्चात मनुष्य योनि में रहकर अपने कुशल कर्मों से पुण्य प्राप्त से वह देव लोक में चले गये थे।
उन्होंने कहा कि जो देव लोक में पैदा होता है यह आवश्यक नहीं हैं कि वह मनुष्य एक बार जन्म लेकर सीधा देव लोक में पहुंच जाए। इसके लिए मनुष्य को कई बार जन्म लेकर अपने-अपने पुण्यों के प्रभाव से देवताओं की श्रेणी में पहुंचता है।
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यह भी आवश्यक नहीं है कि मनुष्य योनि में रहकर देवताओं की तरह आचरण न किया जा सकें। देवता भी मनुष्य योनि प्राप्त करने के लिए परेशान रहते हैं तथागत में यहां स्वर्ग से सीधे उतर कर लोगों को जागरूक किया और बिना किसी जाति पात के लोगों को दीक्षा दी बुद्ध धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म हैं यहां शांति से जीना सिखाया जाता हैं। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही गौरव की बात हैं जिस स्तूप पर तथागत स्वर्ग से पधारे थे आज हम भिक्षुओं को पूजा अर्चना का मौका मिला हैं।
बौद्ध भिक्षु ने कहा कि वह धन्य है जो इस धरती पर पहुंच कर उस धरती की माटी को अपने माथे से लगा रहे है जिस धरती की माटी पर भगवान बुद्ध ने पैर रखें हैं। उन्होंने कहा कि देवता कभी भी निर्वाण को प्राप्त नहीं होते केवल मनुष्य ही अच्छे कर्मों के द्वारा निर्वाण को प्राप्त होता हैं।
हर व्यक्ति को मनुष्य योनि में आना ही पड़ता है और कर्मों के अनुसार फिर उसे मोक्ष मिलती हैं। इससे पूर्व स्तूप के ऊपर भिक्षु संघ अविधम्मा का पाठ पूरे जोर-शोर से हुआ इस मौके पर डा. धम्म पाल, डा. जुरान नागसेन गुडसागर, संगमित्रा, आनन्द मित्रा, मिस मोलिनी सहित एक सैकड़ा धर्म गुरु मौजूद रहे।
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जहां धर्म गुरु भगवान बुद्ध की देशनाओं पर प्रकाश डाल रहे वहीं दूसरी ओर ध्यान, भजन पूजन करके अध्यात्म का अनूठा संदेश दे रहे हैं।
कार्यक्रम के दूसरे दिन भगवान बुद्ध के ऊपर चर्चा करते हुए वर्मा से आये इच्चा बल भंते ने कहा कि भगवान बुद्ध इंद्र और ब्रम्हा के साथ संकिसा के इसी स्तूप पर अवतरित हुए थे। तत्पश्चात मनुष्य योनि में रहकर अपने कुशल कर्मों से पुण्य प्राप्त से वह देव लोक में चले गये थे।
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उन्होंने कहा कि जो देव लोक में पैदा होता है यह आवश्यक नहीं हैं कि वह मनुष्य एक बार जन्म लेकर सीधा देव लोक में पहुंच जाए। इसके लिए मनुष्य को कई बार जन्म लेकर अपने-अपने पुण्यों के प्रभाव से देवताओं की श्रेणी में पहुंचता है।
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यह भी आवश्यक नहीं है कि मनुष्य योनि में रहकर देवताओं की तरह आचरण न किया जा सकें। देवता भी मनुष्य योनि प्राप्त करने के लिए परेशान रहते हैं तथागत में यहां स्वर्ग से सीधे उतर कर लोगों को जागरूक किया और बिना किसी जाति पात के लोगों को दीक्षा दी बुद्ध धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म हैं यहां शांति से जीना सिखाया जाता हैं। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही गौरव की बात हैं जिस स्तूप पर तथागत स्वर्ग से पधारे थे आज हम भिक्षुओं को पूजा अर्चना का मौका मिला हैं।
बौद्ध भिक्षु ने कहा कि वह धन्य है जो इस धरती पर पहुंच कर उस धरती की माटी को अपने माथे से लगा रहे है जिस धरती की माटी पर भगवान बुद्ध ने पैर रखें हैं। उन्होंने कहा कि देवता कभी भी निर्वाण को प्राप्त नहीं होते केवल मनुष्य ही अच्छे कर्मों के द्वारा निर्वाण को प्राप्त होता हैं।
हर व्यक्ति को मनुष्य योनि में आना ही पड़ता है और कर्मों के अनुसार फिर उसे मोक्ष मिलती हैं। इससे पूर्व स्तूप के ऊपर भिक्षु संघ अविधम्मा का पाठ पूरे जोर-शोर से हुआ इस मौके पर डा. धम्म पाल, डा. जुरान नागसेन गुडसागर, संगमित्रा, आनन्द मित्रा, मिस मोलिनी सहित एक सैकड़ा धर्म गुरु मौजूद रहे।