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आलू की मंदी से गिरवीं जेवर डूबने की नौबत

Thu, 10 Dec 2015 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद Updated Thu, 10 Dec 2015 12:03 AM IST
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The recession led to the sinking of potato Girvin jewelery
 आलू के भाव को उबरते ने देख किसानों को कर्ज अदायगी की चिंता सताने लगी है। बुधवार को 50 रुपये क्विंटल का इजाफा होने के बाद भी किसानों के चेहरे मुरझाए हुए है। बुधवार को आलूे के दाम 501 से 601 रुपये क्विंटल रहे। आलू के इन दामों से किसानों की लागत निकलने का भी टोटा है। आलू की खेती के लिए बड़ी तादाद में किसानों ने बैंक से लोन लेकर और घर के जेवर गिरवी रखकर फसल तैयार की थी। ऐसे में कर्ज चुका पाना अब किसानों को मुश्किल दिख रहा है। एक सप्ताह में आलू का भाव 451 रुपये से घटकर 220 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो )  आ चुका है। मंडी में आने वाले किसानों से अमर उजाला की बातचीत की एक रिपोर्ट
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आलू के गिरते दामों पर एक नजर

3 दिसंबर                401-451 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)
4 दिसंबर                351-381 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)
5 दिसंबर                301-331 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)
6 दिसंबर                251-291 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)
7 दिसंबर                231-251 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)
8 दिसंबर                220- 250 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)
9 दिसंबर           250 से 300 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो)


फोटो 12 परिचय- सुखराम
मंडी में आलू बेचने आए सिरौली गांव के सुखराम कहते हैं कि पत्नी की नथनी और जेवर गिरवीं रखकर 20 बीघा खेत में आलू की फसल की थी। आलू का भाव गिरने से बाजार में गिरवीं रखे जेवर के डूब जाने की चिंता सता रही है।
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फोटो 13 परिचय- रामनाथ।
गांव लऊआ नगला निवासी रामनाथ कहते हैं कि घर में जमा पूंजी लगाकर चार बीघा खेत में आलू बोया था।  एक बीघा खेत में करीब 20 पैकेट आलू निकला है। 400 रुपये क्विंटल के भाव से लागत भी नहीं निकल रही है। एक  बीघा में दो हजार रुपये का नुकसान हो रहा है।
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फोटो 14 परिचय- आलोक कुमार।
रमापुर दबीर गांव के  किसान आलोक कुमार बताते हैं कि 15 बीघा खेत में आलू बोया था। आलू का भाव दिन पर दिन गिर रहे हैं। ऐसे में परिवार के गुजारे पर भी संकट खड़ा हो गया है।

फोटो 15 परिचय- रक्षपाल।
मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव रमापुर दबीर निवासी रक्षपाल ने बताया कि 4 बीघा खेत में आलू बोया था। आलू बेचकर मकान बनवाना चाहते थे। मंदी से घर बनवाने का अरमान टूट गया।




ऐसे बढ़ सकते आलू के भाव
चुनाव के बाद ट्रकों के खाली होने से बिहार और बंगाल के बाजारों के लिए लोडिंग में तेजी आएगी। सांसद फर्रुखाबाद से रेलवे की बोगी बुक करवाएं तो आलू किसानों की मदद हो सकती है। आलू की फसल को ट्रक से बिहार भेजने में 220 रुपये का भाड़ा लगता है । रेलवे की बोगी से आलू भेजने में प्रति क्विंटल 80 रुपये की लागत आती है। असम में आलू भेजने के लिए ट्रक से 440 रुपये और मालगाड़ी से 140 रुपये प्रति कुंतल का भाड़ा देना पड़ता है। आलू कारोबारी सुधीर वर्मा रिंकू  कहते हैं कि केंद्र सरकार  मालगाड़ी की एक बोगी रोजाना  बुक करवा दे तो आलू के भाव में उछाल आ सकता है।
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