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Farrukhabad News: पुलिस ने ग्राम प्रधान से मिलकर नंदू के खिलाफ रची थी साजिश
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मोहम्मदाबाद। पुलिस अभियुक्तों को पकड़ने और गिरफ्तारी दिखाने में आमतौर पर खेल करती है। जहां तक नंदू की गिरफ्तारी की बात है, तो इसमें पुलिस ने ग्राम प्रधान से मिलकर साजिश रची थी।
सिपाही यशवीर और प्रधान के मोबाइल पर दो दिन में 17 बार बात होना पाया गया। जांच अधिकारी सीओ के हाथ लगे एक वायरल ऑडियो में भी तमंचा में नंदू को जेल भेजने की बात कही जा रही है।
सीओ राजेश कुमार द्विवेदी की ओर से कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार भाटी, दरोगा महेंद्र सिंह, सिपाही अंशुमन चाहर, राजन पाल व यशवीर सिंह के खिलाफ मुकदमा लिखाने के बाद पुलिस का बड़ा खेल सामने आया है। तमंचे में जेल भेजे गए पिपरगांव के नंदू को 18 अगस्त की शाम तीन बजे संतोष पाल की दुकान से सादा कपड़ों में पहुंचे सिपाही अंशुमान चेन स्पॉकेट डलवाने के बहाने थाने लाया था। उसी दिन यशवीर और प्रधान कुंतेश यादव के मोबाइल पर 12 बार बातचीत हुई।
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16 अगस्त को पांच बार बातचीत की गई। जांच अधिकारी सीओ अरुण कुमार ने दुकान मालिक संतोष की पत्नी, पड़ोसी दुकानदार गोपेश तथा सामने दुकानदार राजवीर सिंह से बात की, तो साफ हो गया कि नंदू को 18 अगस्त को सिपाही अंशुमान लाया था।
यही नहीं सीओ को प्रधान के साथी अनिल ठाकुर का एक ऑ़डियो भी हाथ लगा, जिसमें वह नंदू को तमंचे में जेल भिजवाने की बात कह रहा है। नंदू को इंस्पेक्टर के आदेश पर थाने के भोजनालय कक्ष में रात भर रखा गया था। 19 अगस्त को दरोगा महेंद्र सिंह, सिपाही राजन पाल, अंशुमान चाहर ने इंस्पेक्टर की स्कार्पियो से सुबह साढ़े नौ बजे के करीब गिरफ्तारी दिखाकर दाखिल कर दिया।
सीओ ने तीन चश्मदीद गवाहों, अनिल का वायरल ऑडियो और सिपाही यशवीर व प्रधान कुंतेश की वार्ता को साक्ष्य मानकर नंदू के साथ साजिश होना पाया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पांचों का फंसना तय माना जा रहा है।
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सिपाही यशवीर और प्रधान के मोबाइल पर दो दिन में 17 बार बात होना पाया गया। जांच अधिकारी सीओ के हाथ लगे एक वायरल ऑडियो में भी तमंचा में नंदू को जेल भेजने की बात कही जा रही है।
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सीओ राजेश कुमार द्विवेदी की ओर से कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार भाटी, दरोगा महेंद्र सिंह, सिपाही अंशुमन चाहर, राजन पाल व यशवीर सिंह के खिलाफ मुकदमा लिखाने के बाद पुलिस का बड़ा खेल सामने आया है। तमंचे में जेल भेजे गए पिपरगांव के नंदू को 18 अगस्त की शाम तीन बजे संतोष पाल की दुकान से सादा कपड़ों में पहुंचे सिपाही अंशुमान चेन स्पॉकेट डलवाने के बहाने थाने लाया था। उसी दिन यशवीर और प्रधान कुंतेश यादव के मोबाइल पर 12 बार बातचीत हुई।
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16 अगस्त को पांच बार बातचीत की गई। जांच अधिकारी सीओ अरुण कुमार ने दुकान मालिक संतोष की पत्नी, पड़ोसी दुकानदार गोपेश तथा सामने दुकानदार राजवीर सिंह से बात की, तो साफ हो गया कि नंदू को 18 अगस्त को सिपाही अंशुमान लाया था।
यही नहीं सीओ को प्रधान के साथी अनिल ठाकुर का एक ऑ़डियो भी हाथ लगा, जिसमें वह नंदू को तमंचे में जेल भिजवाने की बात कह रहा है। नंदू को इंस्पेक्टर के आदेश पर थाने के भोजनालय कक्ष में रात भर रखा गया था। 19 अगस्त को दरोगा महेंद्र सिंह, सिपाही राजन पाल, अंशुमान चाहर ने इंस्पेक्टर की स्कार्पियो से सुबह साढ़े नौ बजे के करीब गिरफ्तारी दिखाकर दाखिल कर दिया।
सीओ ने तीन चश्मदीद गवाहों, अनिल का वायरल ऑडियो और सिपाही यशवीर व प्रधान कुंतेश की वार्ता को साक्ष्य मानकर नंदू के साथ साजिश होना पाया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पांचों का फंसना तय माना जा रहा है।