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Farrukhabad News: भूमिगत नाले पर पड़े जाल टूटे, हादसे को दे रहे दावत
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फोटो-29 पलरिया में भूमिगत नाले के ऊपर टूटा जाल। संवाद
फर्रुखाबाद। शहर का सबसे बड़ा भूमिगत नाला पलरिया से नाला सिम्तसुमाल, पक्कापुल होकर गुदड़ी तक जाता है। इस पर दिनभर पैदल, बाइक ही नहीं ई-रिक्शा की भीड़ रहती है। नाले पर कई स्थानों पर मैनहोल पर जाल पड़े हैं। मगर जाल कहीं टूटे तो कहीं जर्जर हालत में होने की वजह से हादसे को दावत दे रहे हैं। जिम्मेदार मरम्मत कराने की जरूरत नहीं समझ रहे।
इस नाले से करीब 10 मोहल्लों का पानी गुदड़ी तक आता है। नाले पर कई स्थानों पर मैनहोल बनाए गए हैं। इन पर पड़े लोहे के जाल टूटे पड़े हैं। पलरिया मोड़ पर भूमिगत नाला शुरू होते ही गली के रास्ते पर पड़़ा जाल जर्जर है। इसके कुछ आगे करीब आठ फीट चौड़ी गली में चार-चार फीट के जाल पड़े हैं। 50 मीटर दूरी में पड़े चार जालों में दो पूरी तरह टूट गए हैं, जबकि दो जर्जर हालत में हैं। एक जाल में कई बार ई-रिक्शा पलटने से लोगों ने ईंट-गिट्टी भरी बोरी डाल दी है। इससे चौपहिया और तीन पहिया वाहन काफी धीमी गति से निकल जाते हैं। लेकिन रात में बिजली गुल होने पर कई बार लोग गिर कर चुटहिल भी हो चुके हैं।
अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जहां जाल टूट गए हैं, वहां ठीक करा दिए जाएंगे।
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गलियों के नालों पर नहीं लगे जाल, भरता है कूड़ा
भूमिगत नालों में आसपास की गलियों से आई छोटी नालियां मिलती हैं। इन नालियों पर जाल की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यही वजह है कि भूमिगत नाले में पॉलिथीन समेत बड़ा कूड़ा भर जाता है। इससे आए दिन चोक होने से बारिश के समय जलभराव के रूप में जनता को मुसीबत का सामना करना पड़ता है।
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इस नाले से करीब 10 मोहल्लों का पानी गुदड़ी तक आता है। नाले पर कई स्थानों पर मैनहोल बनाए गए हैं। इन पर पड़े लोहे के जाल टूटे पड़े हैं। पलरिया मोड़ पर भूमिगत नाला शुरू होते ही गली के रास्ते पर पड़़ा जाल जर्जर है। इसके कुछ आगे करीब आठ फीट चौड़ी गली में चार-चार फीट के जाल पड़े हैं। 50 मीटर दूरी में पड़े चार जालों में दो पूरी तरह टूट गए हैं, जबकि दो जर्जर हालत में हैं। एक जाल में कई बार ई-रिक्शा पलटने से लोगों ने ईंट-गिट्टी भरी बोरी डाल दी है। इससे चौपहिया और तीन पहिया वाहन काफी धीमी गति से निकल जाते हैं। लेकिन रात में बिजली गुल होने पर कई बार लोग गिर कर चुटहिल भी हो चुके हैं।
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अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जहां जाल टूट गए हैं, वहां ठीक करा दिए जाएंगे।
गलियों के नालों पर नहीं लगे जाल, भरता है कूड़ा
भूमिगत नालों में आसपास की गलियों से आई छोटी नालियां मिलती हैं। इन नालियों पर जाल की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यही वजह है कि भूमिगत नाले में पॉलिथीन समेत बड़ा कूड़ा भर जाता है। इससे आए दिन चोक होने से बारिश के समय जलभराव के रूप में जनता को मुसीबत का सामना करना पड़ता है।

फोटो-29 पलरिया में भूमिगत नाले के ऊपर टूटा जाल। संवाद
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