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भतीजे ने बहनोई के साथ मिलकर की थी हत्या

Thu, 22 Sep 2022 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 11:00 PM IST
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The nephew along with the brother-in-law had killed the uncle
पुलिस गिरफ्त में नीलेश व रजनेश। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। बाइक मेकेनिक की हत्या के मामले में पुलिस ने भतीजे व उसके बहनोई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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मकान व खेत का एग्रीमेंट कराने और वापस करने के लिए अधिक रुपये मांगने की खुन्नस में दोनों ने गोली मारकर मेकेनिक की हत्या की थी।
पुलिस ने दोनों के पास से दो तमंचे व कारतूस बरामद किए हैं।
शहर कोतवाली की ग्राम पंचायत पिपरगांव के मजरा उस्मान नगला निवासी बाइक मेकेनिक विनोद राजपूत की 16 सितंबर की रात गांव के रास्ते पर भट्ठे के पास गोली मारकर हत्या की गई थी।
एसओजी प्रभारी अशोक कुमार ने सर्विलांस की मदद से एकत्र किए साक्ष्यों के आधार पर पैर से दिव्यांग भतीजे नीलेश राजपूत उर्फ टेंपू व नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव घुमइया रसूलपुर निवासी उसके बहनोई रजनेश उर्फ गब्बर को पकड़ लिया।
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पूछताछ में भतीजे ने बताया कि रुपये की आवश्कता होने पर चाचा विनोद राजपूत ने एक पूर्व उसके मकान व खेत का एग्रीमेंट करा लिया था।
जब उसने मकान व खेत वापस करने के लिए कहा तो वह मूलधन के साथ ब्याज भी मांग रहे थे। इससे उसने बहनोई रजनेश उर्फ गब्बर के साथ मिलकर चाचा की हत्या करने की योजना बनाई।
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विनोद रोज रात को लगभग आठ बजे दुकान से घर वापस आते थे। नीलेश बहनोई रजनेश के साथ खेत की रखवाली करने की बात कहकर घर से निकले।
खेत पर पहुंचने पर पिता ओमकार को खाना खाने के लिए घर भेज दिया। इसी दौरान विनोद मोपेड से घर जा रहा था। तभी उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
ओमकार खाना खाने के बाद जब वापस खेत पर जा रहे थे तब उन्होंने विनोद को पड़ा देखा था। एसपी अशोक कुमार मीणा ने पुलिस लाइन के सभागार में घटना का खुलासा किया।

इस दौरान सीओ सिटी प्रदीप कुमार सिंह व सीओ मोहम्मदाबाद अरुण कुमार मौजूद रहे।
भतीजे नीलेश ने बहनोई रजनेश के साथ मिलकर चाचा विनोद के चार गोली मारी थीं। पोस्टमार्टम में विनोद के तीन गोली लगने की पुष्टि हुई थी। दो गोली आर-पार हो गईं थीं और बुलेट छाती में फंसा मिला था। भतीजे नीलेश ने बताया कि एक गोली सिर को छूती हुई निकल गई थी।
चाचा विनोद की हत्या करने के बाद नीलेश बहनोई के साथ खेत से भागकर घर की ओर चला गया था।
पिता ओमकार के घटना स्थल पर पहुंचने के बाद वह भी वहां पहुंच गया।
पिता के साथ चाचा के शव को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचा था। तब उसके चेहरे पर कोई सिकन नहीं थी।
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