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Farrukhabad News: युवा पीढ़ी को बतानी होगी भारतीय सेना की स्वर्णिम गौरवगाथा
Mon, 16 Dec 2024 11:01 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 16 Dec 2024 11:01 PM IST
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फर्रुखाबाद। युवा पीढ़ी को देश के इतिहास के बारे में जानकारी नहीं है। स्कूल, कॉलेजों में शिविर लगाकर उनको भारतीय सेना की स्वर्णिम गौरव गाथा बतानी चाहिए। पूर्व सैनिकों ने युद्ध के संस्मरण सुनाकर सेना की वीरगाथा बयां की।
सोमवार को विजय दिवस पर पूर्व सैनिक संवा परिषद की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ले. कर्नल अजय प्रताप सिंह ने कहा कि आज की पीढ़ी को भारतीय सेना की वीरगाथा बतानी चाहिए। स्कूलों में जाकर बच्चों को सेना के बारे में जानकारी देकर उनके अंदर देशभक्ति का जज्बा पैदा करना है।
सीमित संसाधनों और सटीक रणनीति से ही इतना बड़ा युद्ध 14 दिन में ही जीत लिया गया। आज से 30-40 वर्ष पहले एक स्थान से दूसरे स्थान पर संदेश भेजने के लिए 15 से 20 दिन लग जाते थे। भारतीय सेना ने इतिहास बनाया है। भारतीय सेना देश की रीढ़ की हड्डी है। इसके बारे में सभी को जानकारी होनी चाहिए।
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मुनेश्वर सिंह राठौर, ठाकुर वीरेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि देेश की सरहद सेना के हाथों में सुरक्षित है। कमांडर नवीन कटियार, ठा वीरेंद्र सिंह राठौर, ले. कर्नल अजय प्रताप सिंह आदि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। पूर्व हवलदार वीरेंद्र सिंह राठौर, पूर्व कैप्टठन आरपी अग्निहोत्री, कैप्टन रामकरन सिंह चौहान, वीरेंद्र सिंह वर्मा, सीपी सिंह परिहार, वीएस वर्मा, राकेश सिंह राठौर, कैप्टन उदयराज सिंह, बीबी सिंह, श्याम सिंह चौहान, फूल सिंह रहे।
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सोमवार को विजय दिवस पर पूर्व सैनिक संवा परिषद की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ले. कर्नल अजय प्रताप सिंह ने कहा कि आज की पीढ़ी को भारतीय सेना की वीरगाथा बतानी चाहिए। स्कूलों में जाकर बच्चों को सेना के बारे में जानकारी देकर उनके अंदर देशभक्ति का जज्बा पैदा करना है।
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सीमित संसाधनों और सटीक रणनीति से ही इतना बड़ा युद्ध 14 दिन में ही जीत लिया गया। आज से 30-40 वर्ष पहले एक स्थान से दूसरे स्थान पर संदेश भेजने के लिए 15 से 20 दिन लग जाते थे। भारतीय सेना ने इतिहास बनाया है। भारतीय सेना देश की रीढ़ की हड्डी है। इसके बारे में सभी को जानकारी होनी चाहिए।
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मुनेश्वर सिंह राठौर, ठाकुर वीरेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि देेश की सरहद सेना के हाथों में सुरक्षित है। कमांडर नवीन कटियार, ठा वीरेंद्र सिंह राठौर, ले. कर्नल अजय प्रताप सिंह आदि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। पूर्व हवलदार वीरेंद्र सिंह राठौर, पूर्व कैप्टठन आरपी अग्निहोत्री, कैप्टन रामकरन सिंह चौहान, वीरेंद्र सिंह वर्मा, सीपी सिंह परिहार, वीएस वर्मा, राकेश सिंह राठौर, कैप्टन उदयराज सिंह, बीबी सिंह, श्याम सिंह चौहान, फूल सिंह रहे।