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रबी की बुवाई में गिरावट के आसार

Fri, 20 Nov 2015 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद Updated Fri, 20 Nov 2015 12:05 AM IST
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The expected decline in sowing of rabi
फर्रुखाबाद। सिंचाई की समस्या के चलते रबी की पैदावार में गिरावट के आसार हैं। इससे बुवाई के रकबे में कटौती की नौबत है। गेहूं की बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो चुकी है। अभी तक लक्ष्य के मुताबिक 8.58 फीसदी बुवाई ही हो पाई है। राजकीय बीज गोदामाें से गेहूं का बीज उठाने को ही किसान तैयार नहीं हो रहे हैं।
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सिंचाई के संकट को लेकर कृषि महकमा भी संजीदा है। महकमे केे जिम्मेदार 25 से 30 फीसदी बुवाई कम होने का आकलन कर रहे हैं। महकमे ने इस सीजन में 77468 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई का लक्ष्य तय किया है। इसमें से 6648 हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है। यह आंकड़ा अब तक दो गुनेे से ज्यादा होना चाहिए था। जौ की बुवाई का लक्ष्य 10174 हेक्टेयर था। अब तक 537 हेक्टेयर यानी 50 फीसदी बुवाई ही हो पाई है। चना की बुवाई के लिए 738 हेक्टेयर लक्ष्य तय था। इसमें से 554 हेक्टेयर में बुवाई हो पाई है।
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गेहूं की बुवाई 15 दिसंबर तक होनी है। नहरों में पानी ही नहीं है। हजियांपुर से रोशनाबाद और बैरमपुर नहर में अरसे से पानी नहीं है। यही हाल बाकी जगह है। इससे पलेवा का संकट है। 15 से 20 की संख्या में राजकीय नलकूप हमेशा ठप रहते हैं। अभी यह संख्या 17 है।  देहात में बिजली की उपलब्धता 24 में से 5 घंटे भी नहीं है। सूखा के चलते वाटर लेबल गिरा है। इससे पांच से सात फीसदी निजी नलकूप बंद हो गए। डीजल महंगा है।
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एक बीघा में 400 रुपये पलेवा के लग रहे हैं। अधिकतम तापमान दिन में 27 से 30 डिग्री सेल्सियस रहता है। इससे हर 7 से 10 दिन में सिंचाई की स्थिति बन जाती है। इससे रबी की बुवाई का लक्ष्य पूरा होता नहीं लग रहा है। इससे पैदावार में भी तगड़ी गिरावट की आशंका।


क्या कहते हैं किसान

असगरपुर के किसान शोभित गंगवार, नगला नान के प्रभाकर पांडेय व उलियापुर के रमेशचंद्र क हते हैं कि किसानों की पूंजी आलू में चली गई। नई फसल में जेब से जा रहा है। ऐसे में गेहूं में लागत की समस्या है। जरूरत भर के लिए ही बुवाई करेंगे। इसी से राजकीय बीज गोदामों में बीज की बिक्री धीमी है।

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